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रैपिड रेल कॉरिडोर के आसपास घर बनाना और व्यवसाय करना मंहगा होगा

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर पर स्टेशनों की डेढ़ किलोमीटर की परिधि में घर बनाना और व्यवसाय करना महंगा हो जाएगा। ऐसा रेपिड रेल पर खर्च होने वाले धन का ऋण चुकाने के लिए चार तरह से राजस्व वसूलने के चलते होगा। शुक्रवार को जीडीए में हुई बैठक में नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने ये सुझाव दिए हैं। शासन की मंजूरी मिलने के बाद रेपिड रेल इंफ्लुएंस जोन (स्टेशनों के चारों ओर डेढ़ किलोमीटर की परिधि) में नया राजस्व मॉडल लागू हो जाएगा।

50 से 80 प्रतिशत हिस्सा लोन की किश्तें चुकाने में जाएगा

दिल्ली से मेरठ तक 85 किलोमीटर लंबा रेपिड रेल चलाने के लिए करीब 32 हजार 500 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। इसके लिए करीब 19 हजार 200 करोड़ रुपये का ऋण लिया जाना है। ऋण की अदायगी के लिए एनसीआरटीसी ने प्रदेश सरकार और विकास प्राधिकरणों को चार तरह से राजस्व वसूली के सुझाव दिए हैं। मुख्य रूप से रेपिड रेल कॉरिडोर के पास (रेपिड रेल इंफ्लुएंस जोन) स्टांप ड्यूटी में एक प्रतिशत और विकास शुल्क में 25 फीसदी की बढ़ोत्तरी की तैयारी है। इसके अलावा विकास शुल्क प्लॉट के क्षेत्रफल की बजाय कुल बने क्षेत्रफल (ऊपरी मंजिलें भी) पर वसूलने का सुझाव है। साथ ही एफएआर डेढ़ से चार (परचेबल) करने का भी प्रस्ताव है। इन चारों तरीकों से जो राजस्व सरकार को मिलेगा। इसका 50 से 80 प्रतिशत हिस्सा लोन की किश्तें चुकाने में जाएगा। बैठक की अध्यक्षता मंडलायुक्त अनीता मेश्राम ने की। बैठक में उपस्थित जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने बताया कि, सभी विभागों से लिखित में इस नए मॉडल पर सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। इसके बाद इस प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन के पास भेज दिया जाएगा।

60 फीसदी रकम ऋण से जुटाई जाएगी

रेपिड रेल के सभी स्टेशनों की डेढ़ किलोमीटर परिधि को इंफ्लुएंस जोन में रखा गया है। चारों सुझाव केवल इसी क्षेत्र में लागू होंगे। इसके अन्तर्गत करीब 700 हेक्टेयर क्षेत्रफल आता है। स्पेशल डेवलपमेंट एरिया भी दायरे में दिल्ली-मेरठ रेपिड रेल के चार स्टेशनों को विशेष दर्जा दिया गया है। गुलधर, दुहाई, मेरठ दक्षिण और मोदीपुरम स्टेशनों के चारों ओर करीब 400 हेक्टेअर भूमि को भी स्पेशल डेवलपमेंट एरिया में शामिल किया गया है। इनमें भी राजस्व के चारों सुझाव लागू होंगे। गाज़ियाबाद में साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई, मुरादनगर, मोदीनगर (दक्षिण) और मोदीनगर (उत्तर) ये सात रेलवे स्टेशन बनेंगे। 32 हजार 500 करोड़ रुपये का बजट हाईस्पीड ट्रेन का बजट 32,500 करोड़ रुपये है। इसमें यूपी सरकार को 4300 करोड़ रुपये का अंशदान देना है। दिल्ली सरकार को 861 करोड़ व केंद्र को 5165 करोड़ का वित्तीय भार आएगा। इस प्रजोक्ट में 60 फीसदी रकम ऋण से जुटाई जाएगी।

किसानों ने जमीन के बदले नौकरी की मांग की 

वहीं, इस प्रोजेक्ट को लेकर एनसीआरटीसी को दस गांव के किसानों से सीधे जमीन खरीदनी है। लेकिन कुछ गांव के किसान जमीन देने से इंकार कर रहे हैं। किसान जमीन के बदले नौकरी की मांग कर रहे हैं। इस विवाद को सुलझाने के लिए एनसीआरटीसी और प्रशासन के बीच कई बार बैठक हुई। इसमें किसानों को भी बुलाया गया, लेकिन किसान अपनी बात पर अड़े हुए हैं।

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