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प्रियंका गांधी की राजनीति में एंट्री एनडीए के लिए कोई चुनौती नहीं – प्रशांत किशोर

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा है कि कांग्रेस की नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए चुनौती नहीं हैं। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि प्रियंका कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए प्रतिद्वंदी नहीं बनेंगी, लेकिन राजनीति में उनके आने का भविष्य में प्रभाव होगा।

भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के घटक दल जदयू के पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने ये बातें कहीं। इसके साथ ही प्रियंका गांधी के बारे में उन्होंने कहा, ‘एकदम से बहुत कम समय में…दो-तीन महीने में या आगामी लोकसभा चुनाव के नजरिए से मैं उन्हें चुनौती के तौर पर नहीं देखता। मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं कि उनमें क्षमता है या नहीं, लेकिन किसी भी व्यक्ति के लिए तुरंत आकर दो-तीन महीने में परिणामों पर बहुत व्यापक असर डालना संभव नहीं है।’ जदयू उपाध्यक्ष ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा, ‘हालांकि, अगर लंबे समय के नजरिए से आप देखेंगे तो वे एक बड़ा चेहरा और नाम हैं। काम करेंगी और जनता उनके काम को पसंद करेगी तो उसका असर दिख भी सकता है।’

प्रियंका गांधी के राजनीति में आने का कांग्रेस को फायदा होगा या नहीं, इस सवाल पर प्रशांत ने कहा कि यह आगामी चुनाव (लोकसभा चुनाव) में पता चलेगा और इस बारे में अभी कोई अटकल लगाना सही नहीं है। जदयू में शामिल होने से पहले प्रशांत किशोर बतौर चुनावी रणनीतिकार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम कर चुके हैं। उस समय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘हम लोगों की सोच थी कि अगर प्रियंका गांधी कांग्रेस के युवा प्रकोष्ठ का नेतृत्व करेंगी तो उससे इस दल को फायदा हो सकता है लेकिन किसी कारण से इस सुझाव पर अमल नहीं हो सका।’

क्या प्रियंका अपने बड़े भाई राहुल गांधी की प्रतिद्वंदी के रूप में उभर सकती हैं, यह पूछे जाने पर प्रशांत ने कहा, ‘निश्चित तौर पर नहीं। राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष हैं, जबकि प्रियंका कई राष्ट्रीय महासचिवों में से एक हैं…लेकिन उनके प्रवेश का लंबे समय में प्रभाव पड़ेगा।’ बिहार में विपक्षी ‘महागठबंधन’, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है, के बारे में पूछे जाने पर प्रशांत का कहना था, ‘कोई भी गठबंधन जिसमें पांच या अधिक पार्टियां हैं, वह कागज पर मज़बूत दिख सकता है। लेकिन इस तरह के गठबंधन के साथ चुनावी कामयाबी हासिल करना बहुत मुश्किल है। लेकिन, अगर महागठबंधन अच्छा प्रदर्शन करता है, तो यह हम सभी के लिए सीखने का अनुभव होगा।’

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