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आज है वर्ल्ड किडनी डे : जानें किडनी की बीमारी से जुड़े इन आंकड़ों को

14 मार्च को यानी आज है वर्ल्ड किडनी डे। इस साल थीम ‘किडनी हेल्थ फॉर एवरीवन एवरी व्हेयर’ रखी गई है। यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशाम्बीगाज़ियाबाद के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. पीएन अरोड़ा ने  बताया कि, दुनियाभर में 85 करोड़ लोग किडनी से संबंधित किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं देश में 1200 किडनी विशेषज्ञ हैं। इसके  इलाज के लिए 10000 डायलिसिस केंद्र भी हैं। इसके अलावा 1500 हीमोडायलसिस केंद्र भी हैं। हर साल 24 लाख लोगों की मृत्यु किडनी की बीमारियों के कारण होती है। विश्वभर में किडनी से संबंधित बीमारियां मृत्यु का छठा सबसे प्रमुख कारण है।

जानें ये आंकड़े

1,200 किडनी विशेषज्ञ हैं देश में

1,500 हीमोडायलिसिस केंद्र हैं देश में

10000 डायलिसिस केंद्र भी हैं

80 फीसदी किडनी ट्रांसप्लांट हो रहे निजी अस्पतालों में

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशाम्बी गाज़ियाबाद के डायरेक्टर किडनी ट्रांसप्लांट विभाग एवं वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. पी बी सिंह ने बताया कि हमारा शरीर अपने आप में एक अनूठी मशीन है, जिसका हर पुर्जा अपने हिस्से का काम बिना रूके करता रहता है, लेकिन अगर किसी तरह की लापरवाही हो तो बीमारी अपना सिर उठाने लगती है और एक हिस्से की बीमारी दूसरे अंगों पर भी असर डालती है। किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है और इसके प्रति लापरवाही जानलेवा हो सकती है। हाल के वर्षों में खान पान और दिनचर्या में बदलाव के चलते दुनिया भर में किडनी की बीमारी से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

यशोदा हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. क्यू हसनैन ने बताया कि मेडिकल साइंस में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के नाम से पुकारे जाने वाले रोग का मतलब किडनी का काम करना बंद कर देना होता है। इसके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए 14 मार्च को “वर्ल्ड किडनी डे” मनाया जाता है। साल 2019 के “वर्ल्ड किडनी डे” की थीम “किडनी हेल्थ फॉर एवरी वन, एवरी वेयर” है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आसपास आने वाले इस दिन पर महिलाओं को इस रोग के बारे में विशेष रूप से जागरूक किए जाने की जरूरत है।

यशोदा हॉस्पिटल के वरिष्ठ गुर्दा एवं मूत्र रोग विशषेज्ञ डॉ. संजय गर्ग ने कहा कि किडनी के निष्क्रिय होने के कई कारण होते हैं पर मूल कारण जो हम भारतीय में पाया गया है। वह है लापरवाही या उपचार की व्यापक व्यवस्था का न होना। वर्तमान में उपचार की तो व्यापक व्यवस्था हो चुकी है पर अभी भी लापरवाही को कम नहीं किया जा सका है। किडनी से संबंधित बीमारियों में गुर्दे में पथरी होना, गुर्दे का कैंसर और गुर्दे का निष्क्रिय होना है। इन तीनों ही परिस्थितियों में समय रहते अगर उपचार करा लिया जाए तो किडनी को बचाया जा सकता है। गुर्दे में पथरी के लक्षण दर्द, बुखार, उल्टी, पेशाब में खून आना व जलन होना है।

यशोदा हॉस्पिटल के वरिष्ठ गुर्दा एवं मूत्र रोग विशषेज्ञ डॉ. कुलदीप ने बताय कि, किडनी में पथरी होना आम बात है और यह सही भी है क्योंकि इसका कारण लोगों का पानी कम पीना, गर्मी की अधिकता व इनफेक्शन का होना है। डॉ. कुलदीप ने बताया कि हमारे देश में लोग सहनशीलता और बीमारी में अंतर किए बगैर जीते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि शरीर सामान्य रूप से स्वस्थ्य नहीं रह पाता।

किडनी की बीमारियों से बचाव हेतु डॉ. कुलदीप ने बताया कि स्वस्थ आहार ले, शरीर का वजन स्वस्थ सीमा में रखें, नमक का इस्तेमाल कम करें, अगर आपको डायरिया, उल्टी, बुखार आदि है तो डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए खूब सारा तरल पदार्थ लें, नियमित रूप से व्यायाम करें, धूम्रपान या अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल ने करें, धूम्रपान के किडनी में रक्तसंचार कम हो जाता है, जिससे पहले से हो चुकी समस्या गंभीर रूप ले सकती है। दर्द निवारक जैसी ओवर द काउंटर दवाओं का इस्तेमाल कम करें, क्योंकि ये आपकी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है। अगर आप हाई रिस्क ग्रूप में आते हैं तो किडनी फंक्शन की जांच नियमित रूप से कराएं।

 

 

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