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वायु-ध्वनि प्रदूषण रोकने में यूपी सरकार नाकाम, NGT ने लगाया 5 करोड़ का जुर्माना

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नदियों में प्रदूषण को रोकने में नाकाम उत्तर प्रदेश सरकार पर एनजीटी ने पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि इन नदियों के पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना के क्रियान्वयन पर यह ‘परफॉर्मेंस गारंटी राशि’ खर्च होगी।

एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने यूपी के मुख्य सचिव को सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और गाजियाबाद जिलों के निवासियों के पेयजल मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने का निर्देश दिया है।

इस मामले पर यूपी सरकार की अब तक की गंभीर नाकामी और नदियों के प्रदूषण से जनता के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को चिंताजनक बताते हुए पीठ ने कहा कि यह जुर्माना लगाना जरूरी है। पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को पांच करोड़ रुपये देगी और उसे छह महीने के अंदर इस कार्ययोजना को लागू करना पड़ेगा। यदि कार्ययोजना लागू नहीं हुई तो यह राशि जब्त कर ली जाएगी।

एनजीटी ने मुख्य सचिव को रिटायर्ड जस्टिस एसयू खान की अध्यक्षता वाली समिति को अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। ताकि समिति इन नदियों को अपने मूल स्वरूप में लाने के लिए कार्ययोजना को लागू करने की निगरानी कर सके। ट्रिब्यूनल द्वारा गठित समिति ने कहा है कि गैर शोधित सीवेज पानी और औद्योगिक कचरे को इन जिलों की नदियों में डालने से ये प्रदूषित हुई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन इलाकों में हैंडपंप का दूषित पानी लोग अब भी पी रहे हैं। प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए अधिकारियों ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। इसके साथ ही प्रदूषित पानी पीने से बीमार लोगों की पहचान के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं, ताकि उन्हें मुआवजा दिया जा सके।

एनजीटी ने रविवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों में बहने वाली काली, कृष्णा और हिंडन नदी को प्रदूषित करने वाले 124 उद्योगों को बंद करने और उनके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। स्वच्छ हवा और पानी को जनता का मूलभूत अधिकार बताते हुए एनजीटी ने इससे पहले इन छह जिलों के डीएम को प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल मुहैया कराने के लिए कार्ययोजना सौंपने का निर्देश दिया था। एनजीओ दोआबा पर्यावरण समिति की याचिका पर पीठ सुनवाई कर रही है।

एनजीटी ने वायु प्रदूषण पर छह राज्यों को 30 अप्रैल तक वायु प्रदूषण पर कार्य योजना सौंपने का निर्देश दिया है। कहा कि यदि निर्धारित समय में कार्ययोजना नहीं सौंपी गई तो प्रत्येक राज्यों पर 1-1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस ए के गोयल ने असम, झारखंड, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तराखंड और नगालैंड सरकारों के मुख्य सचिवों को निर्धारित समय में कार्ययोजना सौंपने का निर्देश दिया है।

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