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परंपरागत वोट बैंक पर दिखा बसपा का भरोसा, चरणबद्ध सूची में दिखी बदलाव की झलक भी

इस बार लोकसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) ने केवल 11 उम्मीदवारों की घोषणा की है। यह पहला मौका है जब चरणवार सूची जारी की जा रही है। इन उम्मीदवारों के माध्यम से बसपा सुप्रीमो मायावती ने जहां एक ओर अपने परंपरागत दलित, ओबीसी और मुस्लिम वोट बैंक पर भरोसा जताया है, वहीं दूसरी ओर चरणबद्ध उम्मीदवारों की घोषणा से नई सोच को भी बल दिया है।

माना जा रहा है कि इस बदलाव के पीछे बसपा के युवा चेहरे आकाश आनंद का बड़ा हाथ रहा है। पिछले काफी समय से परछाई बन अपनी बुआ की मदद करते आ रहे आकाश अब खुल कर राजनीति में आ गए हैं। यह इस बात से भी सिद्ध होता है कि अपने स्टार प्रचारकों की सूची में बसपा ने आनंद प्रकाश को तीसरे नंबर पर रखा है। उम्मीद की जा रही है कि आकाश उत्तर प्रदेश के बेरोजगार और भटके हुए युवाओं को पार्टी से जोड़ने का काम करेंगे खासकर उन दलित, पिछड़े और मुस्लिम वर्ग के युवाओं को जिनका इस्तेमाल अब तक लगभग सभी पार्टियां केवल भीड़ जुटाने के लिए करती रही हैं।

दरअसल पिछले काफी समय से दलितों और पिछड़ों की सशक्त आवाज बनकर उभरी बहुजन समाजवादी पार्टी में किसी युवा चेहरे की कमी खल रही थी। लंदन से एमबीए की पढ़ाई कर लौटे आकाश आनंद न सिर्फ इस कमी को पूरा करने में सहायक होंगे, बल्कि संभव है कि वे अपनी सोच और मायावती के राजनैतिक अनुभव के सहारे अगड़ी जाति के युवाओं को भी पार्टी से जोड़ने में कामयाब हो जाएँ।

आपको बता दें कि इस बार बसपा यूपी में 25 साल बाद सपा से गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ रही है। उसे गठबंधन में 38 सीटें मिली है। पहले दो चरणों में 16 सीटों पर होने वाले मतदान में बसपा 10 सीटों पर जोर आजमाइश कर रही है। मायावती ने इन चरणों की 11 सीटों पर जो उम्मीदवार घोषित किए हैं उनमें हाजी फजलुर रहमान सहारनपुर से मेयर का चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया था। मेयर चुनाव में बेहतर परफार्मेंस देखते हुए उन पर लोकसभा चुनाव में दांव लगाया गया है।

अमरोहा से मैदान में आने वाले कुंवर दानिश अली हाल ही में बसपा में शामिल हुए हैं और वह जनता दल (एस) के महासचिव व प्रवक्ता रह चुके हैं। कुंवर दानिश पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हापुड़ के रहने वाले हैं। हाजी मोहम्मद याकूब बसपाई हैं, लेकिन वर्ष 2003 में सपा में चले गए थे और विधानसभा का चुनाव भी जीते थे। सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां से नाराजगी के बाद वह पुनः बसपा में लौट आए।

नगीना सुरक्षित सीट से गिरीश चंद्र जाटव हैं और बसपा के पुराने नेता हैं। संभल से विधायक रह चुके हैं। बुलंदशहर सुरक्षित सीट से योगेश वर्मा की पत्नी मेरठ की मेयर है और बंद के दौरान काफी दिनों तक जेल में रह चुके हैं। अलीगढ़ से अजीत बालियान जाट, बिजनौर से गुर्जर जाति के मूलक नागर और गौतमबुद्ध नगर से गुर्जर सतवीर नागर पर दांव लगाया गया है।

सपा से आई बिजनौर की पूर्व विधायक रुचि वीरा पर भी विश्वास जताते हुए मैदान में उतारा गया है। यह वही रुचि वीरा है जिन्हें पूर्व में बिजनौर से लोकसभा प्रभारी बनाया गया था, लेकिन विरोध के चलते उन्हें आंवला से मैदान में उतारा गया है। रुचि वैश्य समुदाय से हैं और अखिलेश से खटपट होने के बाद उन्होंने बसपा में शामिल होकर राजनीति शुरू की है। फ़तेहपुर सीकरी से ठाकुर राजवीर सिंह को टिकट दिया गया है। राजवीर बसपा में हाल ही में आए हैं, बिल्डर हैं और उन्हें आनंद का करीबी भी बताया जाता है।बसपा ने पहले फेस में चार नए चेहरे पर दांव लगाया है। इसमें अजीत बालियान जाट हैं और ओबीसी हैं। आगरा में मनोज कुमार सोनी दलित है। फतेहपुर सीकरी में राजपूत बिरादरी के राजवीर सिंह है। अमरोहा में दानिश अली है। इन्हें पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा का करीबी माना जाता रहा हैं।

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