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बंद क्रेडिट कार्ड को दोबारा चालू कराकर ठगों ने उड़ाए 3.88 लाख रूपये

जालसाजों ने नैनीताल बैंक के असोसिएट वाइस प्रेजिडेंट के सरेंडर किए गए क्रेडिट कार्ड को फिर से शुरू कर 3 लाख 88 हजार 967 रुपये का चूना लगा दिया। पीड़ित के पास जब बिल आया तो ठगी का पता चला। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की। इस मामले में शनिवार को घंटाघर कोतवाली में 2015 में एसबीआई नवयुग मार्केट के सेल्स मैनेजर रहे विकास संधू के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। कोतवाली प्रभारी जयकरण सिंह ने बताया कि इस मामले में रूद्रपुर में रिपोर्ट दर्ज हुई थी, जिसे गाजियाबाद ट्रांसफर किया गया है।

वर्तमान में रूद्रपुर में नैनीताल बैंक के असोसिएट वाइस प्रेजिडेंट भुवनेश सक्सेना ने बताया कि जनवरी 2015 में उन्होंने एसबीआई का एक क्रेडिट कार्ड लिया था। उस वक्त वह मालीवाड़ा ब्रांच के हेड थे। सालभर रखने के बाद जब उसका कोई यूज नहीं हुआ और बैंक की तरफ से कार्ड की फीस मांगी गई तो दिसंबर में वह नवयुग मार्केट स्थित एसबीआई की शाखा में कार्ड सरेंडर करने पहुंचे। वहां सेल्स मैनेजर विकास संधू ने बताया कि 2 हजार 240 रुपये देकर आप अपना क्रेडिट कार्ड बंद करा सकते हैं। उन्होंने रुपये दिए और पेपर पर बैंक की मोहर के साथ पर्ची भी ली। इसके बाद विकास संधू ने कार्ड को तोड़कर फेंक दिया और उनसे कहा कि कार्ड बंद हो गया है। इसके बाद वह निश्चिंत हो गए।

उन्होंने बताया कि कुछ समय बाद उनका ट्रांसफर रूद्रपुर हो गया। यहां आने के बाद 2016-17 में उनके पास क्रेडिट कार्ड के 3 लाख 88 हजार 967 रुपये के बिल के भुगतान के लिए कई बार कॉल आने लगी। तब वह लगातार कार्ड बंद होने की बात कॉल करने वाले को कहते रहे। जब इस तरह की कॉल लगातार आने लगी, तो उन्होंने अपना सिविल स्कोर व कार्ड का स्टेटस बैंक से चेक कराया। इस दौरान उन्हें पता चला कि कार्ड दोबारा से उनके नाम पर इशू है और कई बार में इस राशि का यूज किया गया है। भुवनेश का आरोप है कि सेल्स मैनेजर विकास ने अपना नंबर लगाकर भुवनेश के नाम से वह कार्ड दोबारा इशू करा लिया था। उसी ने सभी ट्रांजेक्शन की हैं। ठगी का पता चलने पर उन्होंने रूद्रपुर में दिसंबर 2018 में मामले की शिकायत की थी, जिसे बाद में गाजियाबाद ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में शनिवार रात केस दर्ज हो गया।

भुवनेश ने बताया कि इस ठगी ने मेरा सिविल स्कोर खराब कर दिया है। एक बैंक अधिकारी के रूप में मेरे लिए यह अजीब स्थिति है। उन्होंने बैंक जाकर कार्ड बंद किया था, इसलिए उन्हें इस पर शक नहीं हुआ। सिविल खराब होने के कारण उन्हें किसी प्रकार का लोन नहीं मिल सकता है।

 

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