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मुलायम अखिलेश केस पर बोली सुप्रीम कोर्ट – सीबीआई बताए क्यों नहीं दर्ज की FIR ?

सर्वोच्च न्यायालय ने आज समाजवादी पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई को जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिका की टाइमिंग पर कहा कि हमें कोई मतलब नहीं है। पीठ ने कहा कि जब सीबीआई ने 2007 में कहा- प्रथम दृष्ट्या केस बनता है तो एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार राजनीतिक कार्यकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी की नयी याचिका में कहा था कि कोर्ट सीबीआई को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह या तो सुप्रीम कोर्ट या फिर एक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष आय से अधिक संपत्ति मामले की रिपोर्ट पेश करे।

चतुर्वेदी ने 2005 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर सीबीआई को यह निर्देश देने की मांग की थी वह मुलायम सिंह यादव, अखिलेश, उनकी पत्नी डिंपल यादव और मुलायम के एक अन्य बेटे प्रतीक यादव के खिलाफ सत्ता का दुरुपयोग कर कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति अर्जित करने पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत उचित कार्रवाई करे।

सुप्रीम कोर्ट ने एक मार्च 2007 के अपने फैसले में सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह आरोपों की जांच करे और यह पता लगाए कि समाजवादी पार्टी के नेताओं की आय से अधिक संपत्ति के संदर्भ में लगाए गए आरोप “सही है या नहीं।”

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