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जलियांवाला बाग हत्याकांड की 100वीं बरसी पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, जानें क्या हुआ था उस दिन

अमृतसर के जलियांवाला बाग के नरसंहार कांड के आज यानी शनिवार को 100 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर वहां एक खास कार्यक्रम होने वाला है, जिसमें शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पंजाब के राज्यपाल शहीदों को श्रदांजलि देंगे।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कोविंद ने ट्वीट किया, “आज से 100 साल पहले, हमारे प्यारे स्वतंत्रता सेनानियों को जलियांवाला बाग में शहीद कर दिया गया था। एक भयावह नरसंहार, सभ्यता पर एक दाग, बलिदान का वह दिन भारत कभी नहीं भूल सकता।”

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है जो उस दुभार्ग्यपूर्ण दिन शहीद हुए थे। उनकी वीरता और बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। उनकी स्मृति हमें भारत के निमार्ण के लिए और भी अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है, जिस पर उन्हें गर्व होगा।”

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शनिवार सुबह अमृतसर पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी उनके साथ रहे।

जानिये क्या है जलियांवाला बाग हत्याकांड :-

सौ साल पहले 13 अप्रैल 1819 की बात है, उस दिन बैसाखी थी। एक बाग़ में करीब 15 से बीस हज़ार हिंदुस्तानी इकट्ठा थे। सब बेहद शांति के साथ सभा कर रहे थे। ये सभा पंजाब के दो लोकप्रिय नेताओं की गिरफ्तारी और रोलेट एक्ट के विरोध में रखी गई थी, पर इससे दो दिन पहले अमृतसर और पंजाब में ऐसा कुछ हुआ था, जिससे ब्रिटिश सरकार गुस्से में थी।

इसी गुस्से में ब्रिटिश सरकार ने अपने जल्लाद अफसर जनरल डायर को अमृतसर भेज दिया। जनरल डायर 90 सैनिकों को लेकर शाम करीब चार बजे जलियांवाला बाग पहुंचता है। डायर ने सभा कर रहे लोगों पर गोली चलवा दी।

बताते हैं कि 120 लाशें तो सिर्फ उस कुएं से बाहर निकाली गई थी जिस कुएं में लोग जान बचाने के लिए कूदे थे। कहते ये भी हैं कि करीब दस मिनट में 1650 राउंड गोलियां चलाने के बाद जनरल डायर इसलिए रुक गया था क्योंकि उसके सैनिकों की गोलियां खत्म हो गई थीं। अंग्रेजों के आंकड़े बताते हैं कि जलियांवाला बाग कांड में 379 लोग मारे गए थे।

जबकि हकीकत ये है कि उस दिन एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे और करीब दो हजार गोलियों से जख्मी हुए थे। इस नरसंहार के बाद पूरे देश में ऐसा गुस्सा फूटा कि ब्रिटिश हुकूमत की जड़े हिल गईं, लेकिन इतना सब होने के बाद भी ब्रिटिश हुकूमत ने आजतक इस नरसंहार के लिए माफी नहीं मांगी है।

 

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