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वित्तीय संकट के कारण जेट एयरवेज की सभी उड़ानें बंद, कर्मचारियों ने सरकार से मांगी मदद

पिछले एक दशक में किंगफिशर एयरलाइन के बाद कामकाज बंद करने वाली जेट एयरवेज दूसरी बड़ी कंपनी बन गई है। 26 साल से अपनी सेवाएं दे रही जेट एयरवेज ने अपनी उड़ाने अस्थायी तौर पर बंद कर दी है। कभी एक दिन में सैंकड़ों की संख्या में फ्लाइट्स उड़ाने वाली जेट की आज यह हालत है कि वह अपना कर्ज नहीं चुका पाई। हालांकि अभी भी जेट के फिर से उड़ान भरने की उम्मीदें खत्म नहीं हुई है। बैंक उसे बचाए रखने के लिए बोली प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। वहीं, जेट कर्मचारी यूनियन ने केंद्र सरकार से भी गुहार लगाई है।

बता दें, 26 बरसों से सेवाएं दे रही जेट एयरवेज का ऑपरेशन बुधवार से रोक दिया गया है। यह पिछले पांच साल में बंद होने वाली सातवीं एयरलाइन कंपनी है। बैंकों ने कर्ज में डूबी कंपनी को और मदद देने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को कंपनी के ढेरों कर्मचारियों ने जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया, जिसे साइलेंट अपील का नाम दिया गया। एयरलाइंस में नौकरी पाना एक समय ड्रीम पूरा होने के बराबर माना जाता था। लेकिन यह चार्म खत्म होता नजर आ रहा है। वहीं, कंपनी के इस फैसले के साथ ही जेट में काम करने वाले कर्मचारियों पर जैसे मुसीबतों पर पहाड़ टूट पड़ा है।

बता दें, जेट की फ्लाइट्स दोबारा तभी उड़ान भर पाएंगी जब कंपनी को एक नया खरीददार मिले जाएगा। जो इसे नए सिरे से शुरू कर सके। जेट ने बुधवार रात अस्थाई तौर पर अपनी सेवाएं बंद करने का एलान करते हुए बीएसई की फाइलिंग में लिखा कि बैंकों या किसी अन्य माध्यम से कोई इमरजेंसी फंडिंग नहीं आ रही है। हमारे पास कामकाज जारी रखने के लिए तेल खरीदने या किसी अन्य सेवा के लिए भुगतान करने लायक पैसा भी नहीं है। इसलिए जेट तुरंत अपनी सारी इंटरनेशनल और डोमेस्टिक फ्लाइट्स बंद करने पर मजबूर हो गई है।

वहीं, जेट कर्मचारी यूनियन ने केंद्र सरकार से गुहार लगाते हुए कहा कि इस पूरे मामले सरकार आगे आए और 1500 करोड़ की आरंभिक मदद से जेट एयरवेज को डूबने से बचाए, जिससे कंपनी के तमाम कर्मचारियों को पिछले तीन महीने की सैलरी मिल सके। जेट के निम्न स्तर के कर्मचारी की सैलरी भी लाखों रुपये सालाना होती है, जबकि पायलट और इंजीनियर की लाखों रुपये महीना है।

 

 

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