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आरआरटीएस के स्टेशन के लिए हिंडन मोटल की लीज को GDA ने किया निरस्त

गाज़ियाबाद नया बस अड्डा के पास आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) का स्टेशन बनाया जाएगा। इसके लिए आरआरटीएस ने जीडीए से जमीन की डिमांड की है। इस डिमांड के क्रम में जीडीए ने हिंडन मोटल की जमीन को चिह्नित किया है। यह जमीन जीडीए ने पर्यटन विभाग को लीज पर दे रखी थी। कुछ दिन पहले ही पर्यटन विभाग को लीज कैंसल करके इस जमीन को वापस मांगा गया है। लेकिन अभी तक जीडीए की टीम को इस पर कब्जा नहीं मिला है। जिसकी वजह से यहां का काम प्रभावित चल रहा है।

जीडीए के चीफ इंजीनियर वीएन सिंह ने बताया कि पर्यटन विभाग से इस जमीन पर कब्जा हासिल करने के लिए एक बार फिर पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही कब्जा मिल जाएगा। जिससे हम इस जमीन को आरआरटीएस को हैंडओवर कर सकें। वहीं दूसरी तरफ से वसुंधरा के पास आरआरटीएस को कॉस्टिंग यार्ड बनाए जाने के लिए करीब साढ़े 8 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा चाहिए। लेकिन एलिवेटेड रोड बनाने वाली कंपनी अभी यहां पर कब्जा बनाए हुए है। अब जीडीए ने कंपनी को 15 दिन के भीतर इस जमीन को कब्जा दिए जाने का निर्देश जारी किया।

कमिश्नर मेरठ अनिता के मेश्राम की अध्यक्षता में 17 अप्रैल को कई विभागों के साथ हुई मीटिंग में इस प्रॉजेक्ट के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं पर चर्चा की गई। जिसमें गाजियाबाद में हिंडन मोटल और कास्टिंग यार्ड की जगह का पेच सामने आया था। जिसके बाद कमिश्नर ने जीडीए की टीम को निर्देश दिया था कि जल्द ही दोनों जगह को खाली करवाकर एनसीआरटीसी को हैंडओवर किया जाए। अब 29 अप्रैल को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस मामले को लेकर मीटिंग होगी।

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ हाईस्पीड ट्रेन प्रॉजेक्ट की लागत करीब 30 हजार करोड़ रुपये है। इसे मार्च 2024 तक तैयार करने की डेडलाइन तय की गई है। एनसीआरटीसी के अधिकारियों का कहना है कि गाजियाबाद स्ट्रेच को 2023 तक तैयार कर दिया जाएगा। मालूम हो कि इस प्रॉजेक्ट में साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर और दुहाई स्टेशन होंगे।

 

 

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