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यशोदा अस्पताल में फिर हुआ कोक्लियर इंप्लांट का सफल ऑपरेशन, 12 वर्षीय यथार्थ की बदल गई दुनिया

डॉक्टर नृपेन विश्नोई द्वारा यशोदा अस्पताल में फिर एक बार कोक्लियर इम्प्लांट का सफल ऑपरेशन किया गया। डॉक्टर नृपेन विश्नोई ने बताया कि यथार्थ चौधरी जिसकी उम्र लगभग 12 साल की है उसको दो साल की उम्र में सुनने की क्षमता में कमी आ गई थी। इसके बाद माता पिता ने बच्चे की कानों की जाँच करवा कर कानों की सुनने की मशीन लगवाई। जिससे बच्चे की बोलने की क्षमता विकसित हो सके। जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती गई वैसे-वैसे सुनने की क्षमता में कमी भी बढ़ती गई और कुछ समय पश्चात कान की मशीन से भी फ़ायदा कम होने लगा।

फिर माता पिता ने यशोदा अस्पताल में कान नाक गले की वरिष्ठ सर्जन नृपेन विश्नोई से संपर्क किया। साथ ही साथ उन्होंने आर डी सी स्थित फोनिक्स स्पीच एंड हियरिंग क्लीनिक में डॉक्टर लवनीत मल्होत्रा एवं डॉक्टर स्नेहा बंसल से भी संपर्क किया और कोक्लियर इम्प्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी ली। वहाँ पर उन्होंने कई ऐसे बच्चों से एवं अन्य माता पिता से मुलाक़ात की जिन्होंने भी अपने बच्चों का इंप्लांट करवाया था। पूरी संतुष्टि करने के बाद यथार्थ के माता पिता ने भी यशोदा अस्पताल में डॉक्टर नृपेन विश्नोई से कोकलीयर इंप्लांट कराने का फ़ैसला करा। दिनांक 15 अप्रैल 2019 को यह जटिल ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन में डॉक्टर नृपेन विश्नोई के साथ बेहोशी के वरिष्ठ डॉक्टर विकास चोपड़ा, डॉक्टर स्नेहा बंसल ऑडियो लॉजिस्टिक, डॉक्टर लवनीत मल्होत्रा ऐ. वी. टी स्पेशलिस्ट, डॉक्टर पंकज अग्रवाल रेडियोलॉजिस्ट, OT असिस्टेंट मिथेश चौहान एवं भूषण त्यागी शामिल थे।

इस ऑपरेशन में ऑस्ट्रेलियन कंपनी का एडवांस इम्प्लांट इस्तेमाल किया गया है जिसकी क़ीमत 15,75,000 रुपये हैं। इस इंप्लांट को 1 मई 2019 को डॉक्टर् स्नेहा बंसल द्वारा एन 7 प्रोसेसर के साथ चालू किया जाएगा। इस प्रोसेसर की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए डॉक्टर बंसल द्वारा समय समय पर इसको मैपिंग करा जाएगा। डॉक्टर लवनीत का कहना है कि इस इंप्लांट के बाद बच्चे की बोली एवं भाषा में काफ़ी सुधार आएगा। वह ख़ुद यथार्थ को थेरेपी देंगे और उसकी भाषा विकास पर ध्यान देंगे।

डॉक्टर विश्नोई ने बताया कि कोक्लियर इम्प्लांट के लिए अगर मरीज़ का सही समय पर ऑपरेशन किया जाए तो वह एक वरदान साबित होता है। इसके अलावा प्रमाणिक तौर पर नसों की कमज़ोरी का कोई और उपचार भी नहीं है। उनका यह भी कहना है कि कुछ लोग नसों की कमज़ोरी से बहरेपन का सस्ते में इलाज करने का दावा करते हैं लेकिन उसका कोई ठोस तथ्य यह प्रमाण नहीं है। डॉक्टर विश्नोई ने बताया कि भविष्य में ऐसे और भी ऑपरेशन निर्धारित है। यह ऑपरेशन इस क्षेत्र का दूसरा और सफल ऑपरेशन है।

डॉक्टर विश्नोई ने बताया कि भविष्य में ऐसे और भी ऑपरेशन निर्धारित है। यह ऑपरेशन इस क्षेत्र का दूसरा और सफल ऑपरेशन है। हाल ही में उन्हीं के द्वारा 15 महीने की बच्ची का दोनों कानों का ऑपरेशन कर के कोक्लियर इम्प्लांट डाला गया था।

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