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चिंताजनक – राजनगर एक्सटेंशन के निवासियों को पानी देने के लिए जीडीए ने किया इन्कार

गाज़ियाबाद के राज नगर एक्सटेंशन में लगभग 60 हज़ार से भी ज्यादा लोग रहते हैं। यहाँ रहने वाले लोग पीने के पानी के लिए बोरवेल पर ही निर्भर रहते हैं और ज़्यादातर सोसायटियों में बोरवेल का पानी बहुत ही खारा तथा पीने योग्य नहीं है। गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए)यहाँ लोगों से विकास शुल्क के नाम पर मोटी रकम तो वसूल रहा है मगर उन्हें पीने के लिए पानी देने के लिए जीडीए की कोई योजना नहीं है।

राजनगर एक्सटेंशन में पानी की समस्या के समाधान के लिए लिखे गए पत्र के जवाब में जीडीए ने स्पष्ट कर दिया है कि यह क्षेत्र उनकी योजना का हिस्सा नहीं है। साथ ही यहां पानी की पाइप लाइन बिछाने को लेकर उनकी कोई योजना भी नहीं है। जीडीए के इस जवाब के बाद स्थानीय लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि बिल्डर व जीडीए की लड़ाई में स्थानीय लोगों को पिसना पड़ रहा है।

जीडीए को पानी की सप्लाइ के लिए पत्र लिखने वाले अजनारा इंटिग्रिटी की एओए के अध्यक्ष नितिन त्यागी का कहना है कि राजनगर एक्सटेंशन में 35 से अधिक सोसायटी में 60 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। इसके बाद भी जीडीए भेदभाव पूर्ण व्यवहार कर रहा है। इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली में पानी की सप्लाइ की जाती है। विकास शुल्क देने के बाद भी हमें अब तक पानी की सप्लाइ नहीं मिली है।

त्यागी ने बताया कि उन्होंने जीडीए को 5 अप्रैल को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने राजनगर एक्सटेंशन में ग्राउंड वॉटर लेवल गिरने की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि पहले जहां 70 फुट पर बोरवेल होता था, वह अब 200 फुट तक पहुंच गया है। वहीं, पानी में टीडीएस की मात्रा भी 300 से बढ़कर 650 हो गई है। ऐसे में यहां रहने वाले लोग बिना आरओ के पानी नहीं पी सकते। पानी में अशुद्धियां काफी बढ़ गई हैं। इसी वजह से उन्होंने पानी की सप्लाई की डिमांड करते हुए जीडीए को पत्र लिखा था। करीब एक महीने बाद आए जवाब में जीडीए यह कार्य बिल्डर का बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया है।

दोहन जारी रहा तो जल्द होगी पानी की किल्लत

एओए के महासचिव संजीव शर्मा ने बताया कि पानी की सप्लाई राजनगर एक्सटेंशन के लोगों की जरूरत के साथ-साथ गिरते ग्राउंड वॉटर लेवल को बेहतर करने के लिए भी जरूरी है। यहां छोटी-बड़ी करीब 35 सोसायटी हैं। हर सोसायटी में 1 से 8 लाख लीटर ग्राउंड वॉटर रोजाना इस्तेमाल होता है। करीब 7 सालों से स्थानीय लोग सबमर्सिबल से पानी निकाल रहे हैं। इस मामले में पर्यावरणविद विक्रांत शर्मा का कहना है कि यहां हर परिवार औसतन एक दिन में एक हजार लीटर पानी यूज करता है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही भू-जल स्तर कंट्रोल से भी नीचे चला जाएगा। अगर सरकारी एजेंसी पानी सप्लाई करेगी तो भू-जल के दोहन पर रोक लग सकती है।

नितिन ने बताया कि जीडीए के इस जवाब से उन्हें बेहद निराशा हुई है। वह अब राजनगर एक्सटेंशन की विभिन्न सोसायटियों में रहने वाले लोगों से इस संबंध में बात करेंगे। जिसके बाद सीएम और डीएम से एक्सटेंशन में पानी की सप्लाई किए जाने की मांग की जाएगी। इसके बाद भी अगर इस समस्या का कोई हल नहीं निकलता है तो यहां की सभी सोसायटियों के लोग एकजुट होकर पानी के लिए आंदोलन करेंगे।
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