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भीषण गर्मी के बीच बिहार में दिमागी बुखार का प्रलय, अब तक 56 बच्चों की मौत

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सोमवार, 10 जून तक घातक दिमागी बुखार (चमकी बुखार) से 25 बच्चों की मौत हो गई। वहीं, एक हफ्ते में इस बीमारी ने 56 बच्चों की जान ले ली है। बुखार से पीड़ित 100 बच्चे जिले के एसकेएमसीएच अस्पताल में भर्ती हैं। बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। समोवार को अस्पताल में इलाज के दौरान ही 20 बच्चों की जान चली गई। बुखार से पीड़ित बच्चों की उम्र 4 से 15  साल के बीच बताई जा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का प्रकोप उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी और वैशाली में है। अस्पताल पहुंचने वाले पीड़ित बच्चे इन्हीं जिलों से हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि बुखार से बच्चों की मौत का मामला गंभीर है। साथ ही स्वास्थ्य सचिव भी नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी डॉक्टरों को अलर्ट कर दिया गया है।
एईएस (एक्टूड इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) और जेई (जापानी इंसेफलाइटिस) को उत्तरी बिहार में चमकी बुखार के नाम से जाना जाता है। इससे पीड़ित बच्चों को तेज बुखार आता है और शरीर में ऐंठन होती है। इसके बाद बच्चे बेहोश हो जाते हैं। मरीज को उलटी आने और चिड़चिड़ेपन की शिकायत भी रहती है।इस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बीमारी बढ़ने के लक्षण :
  • बिना किसी बात के भ्रम उत्पन्न होना।
  • दिमाग संतुलित न रहना।
  • पैरालाइज हो जाना।
  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • बोलने और सुनने में समस्या
  • बेहोशी आना।

 

 

 

 

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