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महिलाओं को गुजाराभत्ता से वंचित रखना गैरकानूनी : हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुजाराभत्ता से महिला को वंचित किए जाने के सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट के मुताबिक, कमाने की योग्यता रखने पर भी महिलाओं को गुजाराभत्ता से वंचित नहीं किया जा सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, “कानून में कमाने की योग्यता जैसे किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। ऐसे में महिला को गुजाराभत्ता से वंचित रखना गैरकानूनी है।”

दरअसल, पति से विवाद होने पर अपने माता-पिता के साथ रह रही एक महिला ने पति के खिलाफ अदालत में अर्जी दाखिल कर गुजाराभत्ता की मांग की थी। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने पिछले साल अगस्त में महिला की याचिका को स्वीकार करते हुए उसके पति को हर माह 16500 रुपये गुजाराभत्ता देने का आदेश दिया। इसके खिलाफ महिला के पति की अपील पर सत्र न्यायालय ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि महिला कमाने की योग्यता रखती है, इसलिए वह गुजाराभत्ता पाने की हकदार नहीं है। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट में उसके पक्ष में फैसला आया।

जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि मौजूदा मामले में इस बात का कोई साक्ष्य नहीं मिला कि महिला कमा रही है। वास्तव में आय अर्जित करना और योग्यता व कमाने में सक्षम होना दोनों अगल-अलग बातें हैं। उन्होंने महिला की ओर से सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया। हाईकोर्ट ने महिला के पति को हर माह उसे 16500 रुपये गुजाराभत्ता देने को कहा है।

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