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कवि को वाल्मीकि जैसा संवेदनशील और निर्भीक होना चाहिए

गाज़ियाबाद। लेखन से कविता की वाचिक परम्परा अधिक श्रेष्ठ रही है। वाचिक परम्परा के जरिये कवि आम जनमानस के हृदय में सीधे पहुंचता है। पुरातन समय की कविताओं ने जो स्थान लोगों के हृदय में आज तक बनाया हुआ है, वह सब वाचिक परम्परा की ही देन है। वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार विजय किशोर मानव ने यह बात अखिल भारतीय साहित्य परिषद् ट्रांस हिन्डन इकाई की ओर से वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस में ‘हमारी साहित्य परंपरा’ विषय पर आयोजित विचार संगोष्ठी और भव्य काव्य गोष्ठी में कही। अपने वक्तव्य में उन्होंने साहित्य की वाचिक परंपरा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कविता की भाषा संवाद की सरल भाषा होनी चाहिए और कवि को वाल्मीकि जैसा संवेदनशील और निर्भीक होना चाहिए।

उन्होंने साहित्य की निस्वार्थ, सतत् और अथक सेवा के लिए अखिल भारतीय साहित्य परिषद् मेरठ प्रांत की सराहना की। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् मेरठ प्रांत के अध्यक्ष देवेंद्र देव मिर्जापुरी, मेवाड़ इंस्टीट्यूट की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल, मेरठ प्रांत के संयुक्त महासचिव डॉ. चेतन आनंद और अखिल भारतीय साहित्य परिषद् गाज़ियाबाद इकाई के अध्यक्ष बीएल बत्रा ‘अमित्र’ ने सभागार में मौजूद लोगों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रांस हिंडन इकाई के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार बीके वर्मा ‘शैदी’ ने की। दीप प्रज्ज्वलन के बाद वंदना कुँवर रायजादा ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

इस अवसर पर डॉ. चेतन आनंद ने कहा कि साहित्य का उद्देश्य हमें दक्षिणायन से उत्तरायण अर्थात उजाले की ओर ले जाना होना चाहिए। बीके वर्मा ‘शैदी’ ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया कि हमारी साहित्य परंपरा विभिन्न संस्कृतियों के मेलजोल से विकसित हुई है। इसपर सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों का भी प्रभाव पड़ता रहा है। देवेंद्र देव मिर्जापुरी ने ट्रांस हिंडन की नवगठित इकाई के अध्यक्ष बीके वर्मा ‘शैदी’, सचिव पीयूष कांति, कोषाध्यक्ष वंदना कुंवर रायजादा, संयुक्त सचिव डॉ. मनोज कामदेव, उपाध्यक्ष जगदीश मीणा, मयंक राजेश, शोभा सचान, संस्कृति सचिव ममता लडीवाल, संगठन सचिव नीरजा चतुर्वेदी, सह-सचिव ज्योति राठौर, मीडिया प्रभारी पराग कौशिक समेत समस्त कार्यकारिणी का लोगों से परिचय कराया। नीरजा चतुर्वेदी ने विचार गोष्ठी सत्र का सुंदर संचालन किया।

कार्यक्रम का दूसरा सत्र काव्य गोष्ठी के रूप में था। इसमें नामचीन कवियों और शायरों व युवा लेखकों ने शिरकत की। मयंक राजेश, बीएल बत्रा ‘अमित्र’, पीयूष कांति, श्वेता बाहेती तायल, कुमार मुनीश अक्स, डॉ. मनोज कामदेव, जगदीश मीणा, नीरजा चतुर्वेदी, वंदना कुंवर रायजादा, शोभा सचान, क्षितिज, तारा गुप्ता, प्रीति गोयल, नरेश शर्मा, मधु श्रीवास्तव, निर्देश पाबला, सूर्य प्रकाश सोनी, दिलीप चौरसिया, प्रेमचंद अग्रवाल, कृष्णा माल्या, गोपाल गुप्ता, संजीव सक्सेना, मुक्ता वार्ष्णेय, नीरज गुप्ता, मुस्कान शर्मा आदि समेत लगभग 30 कवियों ने अपना काव्य पाठ किया।

सुपिरचित कवयित्री ममता लड़ीवाल ने काव्य गोष्ठी सत्र का कुशल संचालन किया। बीके वर्मा ‘शैदी’, विजय किशोर मानव, देवेंद्र देव मिर्जापुरी, डॉ. अलका अग्रवाल, डॉ. चेतन आनंद जैसे वरिष्ठ कवियों ने जब काव्य पाठ किया तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। पूरा सभाकक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

 

 

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