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अर्थला झील : कार्रवाई का हवाला देकर दलितों पर अत्याचार, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लगाई मदद की गुहार

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद की अर्थला झील के किनारे कथित तौर पर अवैध रूप से बसे क़रीब 500 घरों को तोड़ने का आदेश दिया है। अर्थाला वासियों का आरोप है कि जब भूमाफिया अवैध रूप से ज़मीन बेच रहे थे तब प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन अब कार्रवाई का हवाला देकर दलितों पर अत्याचार किया जा रहा है।

मकानों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को टालने के लिए पीड़ित वासियों ने अब सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर मदद की गुहार लगाई है। पत्र में लिखा गया है कि तालाब पर बने मकानों को तोड़ने से रोका जाए और दूसरे जगह तालाब खुदवाए जाएं। लोगों का कहना है कि यदि एनजीटी के आदेश पर अगर मकान तोड़े तो इससे पहले निवासियों के पुनर्वास का इंतजाम प्रशासन करे। लोगों का यह भी कहना है कि यहां रह रहे सभी एससी-एसटी और ओबीसी श्रेणी में आते हैं और मई 2009 में जारी हुए शासनादेश के तहत लाभ पाने के पात्र हैं।

बता दें, अर्थाला में 550 परिवार करीब 50 साल से रह रहे हैं। इससे पहले भी जमीन को खाली करने के लिए निगम द्वारा नोटिस दी जा चुकी है। नगर निगम और जिला प्रशासन ने बीते 26 मई को सभी 500 मकानों पर लाल निशान लगा दिए और फिर 29 मई को कार्रवाई करते हुए करीब 15-20 मकानों को ध्वस्त कर दिया। जिसमें कई लोग सडकों पर आ गये।

पार्षद और कॉलोनी के लोगों का कहना है कि वर्तमान में भी अर्थला झील मौजूद हैं और आबादी से दूर हैं। ऐसे में यहां बसे लोगों को हटाया जाना गलत है। उनका कहना है कि बिना पुनर्वास नीति के जिला प्रशासन या नगर निगम ने मकान तोड़ने की कार्रवाई की तो उग्र आंदोलन करेंगे। लोग सड़कों पर उतरेंगे।

 

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