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सड़क सुरक्षा : यातायात नियमों से न करें खिलवाड़, थोड़ी सी लापरवाही ले सकती है जान

चाहे पैदल यात्री हों या वाहन चालक, सड़क संबंधी नियमों का पालन सभी के लिए बेहद ज़रूरी है, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके। ऐसे में ज़रूरी है कि आप न स़िर्फ रोड सेफ्टी रूल्स के बारे में जानें, बल्कि इनका पालन भी करें। भारत का नाम दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिनका सड़क सुरक्षा के मामले में बेहद खराब रिकार्ड है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इन सब से कैसे बचा जाए?

  • सड़क पर चलते व़क्त हमेशा फुटपाथ का उपयोग करें। जहां फुटपाथ न हों, वहां सड़क के एकदम किनारे पर ही चलें।
  • दो पहिया वाहन के लिए हेलमेट और चार पहिया वाहन चालक सीट बेल्ट का जरुर इस्तेमाल करें।
  • कभी भी धैर्य खोकर जल्दबाज़ी न दिखाएं। सिग्नल तोड़कर या सामने से गाड़ी को आता देख भागकर रोड क्रॉस कभी न करें।
  • सड़क क्रॉस करते व़क्त ज़ेब्रा क्रॉसिंग सिग्नल, सब-वे, फुट ओवर ब्रिज का उपयोग करें। जिन जगहों पर ये सुविधाएं न हों, वहां सुरक्षित जगह देखकर क्रॉस करें।
  • ग्रीन सिग्नल के व़क्त ही रोड क्रॉस करें या फिर यदि वहां ट्रैफिक पुलिस है, तो उसके निर्देशों के अनुसार सड़क क्रॉस करें।
  • जो लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी भागकर बस न पकड़ें।
  • उतरते व़क्त भी बस के पूरी तरह से रुकने पर ही उतरें, चलती बस से कभी न उतरें।
  • सड़क क्रॉस करते व़क्त मोबाइल का इस्तेमाल न करें। यदि बात करनी है, तो एक सुरक्षित जगह देखकर, रुककर बात करें।
  • हेडफोन पर गाने सुनते हुए न चलें, इससे गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ आप सुन नहीं पाएंगे।
  • सड़क क्रॉस करते समय दोनों तरफ़ अच्छी तरह देखकर ही क्रॉस करें।
  •  वन वे में कभी भी रिवर्स या अपोज़िट डायरेक्शन में गाड़ी न चलाएं।
  • अपने वाहन की नियमित सर्विसिंग करवाएं, अपने सभी ज़रूरी कागजात साथ ही रखें, जैसे- ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस और टैक्सेशन के पेपर्स, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन संबंधी आदि।

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल 1,20,000 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं और 12,70,000 लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। हालांकि ये तो सिर्फ आंकड़ों से ही पता चल सका है, जबकि ग्रामीण इलाकों में कई दुर्घटनाओं के बारे में पता तक नहीं चलता, जिसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि सही आंकड़े इससे कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं। यह बात यही पर नहीं ख़त्म हो जाती, दुर्घटना के शिकार व्यक्ति के परिवार पर जो गुज़रती है उसका कोई हिसाब नहीं है। इसलिए खुद सतर्क रहें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।

 

 

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