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जानिए क्या है कीमोथेरेपी, कैसे करती है कैंसर के इलाज में मदद

गाज़ियाबाद में कैंसर के मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। एनसीआर का प्रमुख जिला होने के बावजूद हमारे जिले में अभी भी सरकारी स्तर पर कैंसर के इलाज की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि आसपास के क्षेत्र में रहने वाले कैंसर पीड़ितों को अपने इलाज के लिए दिल्ली के बड़े अस्पतालों में भटकना पड़ता है। निजी अस्पतालों में कैंसर का इलाज तो उपलब्ध है मगर इलाज का खर्चा अच्छे खासे परिवार को सड़क पर ला कर खड़ा कर देता है।

ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एकमात्र धर्मार्थ कैंसर अस्पताल श्री जगन्नाथ धर्मार्थ कैंसर अस्पताल ही गरीब और मध्यम आयवर्गीय परिवारों का एकमात्र सहारा है जहां बहुत कम कीमत पर अत्याधुनिक तकनीक से कैंसर का उपचार संभव है। आइए आज जानते हैं कैंसर उपचार की एक तकनीक कीमोथेरेपी के बारे में।

किमोथेरेपी क्या है ?

श्री जगन्नाथ धर्मार्थ अस्पताल के सीनियर आंकोलाजी सर्जन डॉ. ज्ञानेन्द्र मित्तल ने बताया कि कीमोथेरेपी ड्रग्स वो दवाएं हैं जिनका प्रयोग कैंसर के सेल्स को खत्म करने के लिये किया जाता है, इनसे ट्यूमर सिकुड़ जाते हैं और कैंसर फैलने भी नहीं पाता है। इन ड्रग्स को एण्टी कैंसर ड्रग्स या कीमोथेरेपिक एजेंट भी कहते हैं। आज बाजा़र में लगभग 80 एंटी कैंसर ड्रग्स हैं और इनमें से बहुतों पर शोध किया जा चुका है। हर प्रकार का ड्रग्स‍ दूसरे से थोड़े अलग तरीके से काम करता है। सामान्यत: सभी ड्रग्स कैंसर के सेल्स को खत्म करने का काम करते हैं या कैंसर के सेल्स को बढ़ने से रोकते है। कैंसर के सेल्स को खत्म करने के लिए कीमोथेरेपी भी एक अच्छा तरीका है। कीमोथेरेपी कैंसर के सेल्स को शरीर के दूसरे भाग में नहीं फैलने देता जैसे कि हड्डियों में, लीवर में या दिमाग में।

एंटी कैंसर ड्रग्स बहुत से अलग–अलग कॉम्बिनेशन के साथ आते हैं और आनकोलाजिस्ट नामक विशेषज्ञ इनसे अलग–अलग तरीके से चिकित्सा करते हैं। कैंसर के सेल्स अलग–अलग तरीके से बढ़ते हैं, इसलिए कीमोथेरेपी के अलग–अलग कॉम्बिनेशन कैंसर के सेल्स को बढ़ने से रोकने में प्रभावी होते हैं। हर व्यक्ति में कैंसर ठीक होने व फैलना मरीज के स्थिति पर निर्भर करता है।

कीमोथेरेपी सामान्यत: वेन्स के द्वारा दिये गये ड्रग्स के लिए की जाती है क्योंकि अधिकतर लोग इन्ट्रावेनस इन्फ्यूजन की प्रक्रिया के द्वारा एंटी कैंसर ड्रग्स लेते हैं। एक बैग जिसमें कि तरल ड्रग्स /दवा भरी होती है उसे एक ट्यूब से जोड़ देते हैं जिसे फिर वेन्स से जोड़ा जाता है। यह ड्रग्स धीरे–धीरे मरीज के शरीर में फैल जाता है।

एंटी कैंसर ड्रग्स को इंजेक्शन या दवाइयों के रूप में भी लिया जा सकता है। कीमोथेरेपी के ड्रग्स शरीर के सभी भाग में फैल जाते हैं। इस प्रक्रिया को सिस्टमिक थेरेपी कहते हैं, क्योंकि कीमोथेरेपी से सूक्ष्म कैंसर के सेल्स भी निकल जाते हैं जो कि एक्स–रे या दूसरे प्रकार की जांच से भी नहीं दिखते।
डॉ. मित्तल ने बताया कि कीमोथेरेपी को वेन्स के द्वारा दिये जाने पर कैंसर के उन सेल्स को खत्म करने में आसानी होती है जो कि कैंसर के मूल स्थान से फैल चुके होते हैं।

दिमाग की बनावट के कारण ऐसा जरूरी नहीं है कि कीमोथेरेपी सभी टिश्यूज तक पहुंच जाये। जल्दी इस्तेमाल किये गये चिकित्सा के कार्यक्रम के लिए कैंसर के सेल्स को खत्म करने की प्रक्रिया में दो जगह का खास ख्याल रखना होता है, टेस्टिस और दिमाग क्योंकि इन पर कीमोथेरेपी ड्रग्स बहुत कम स्तर पर प्रभावित होता है। इन जगहों पर कैंसर की चिकित्सा के लिए दूसरी तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत होती है।

दुर्भाग्यवश कैंसर कीमोथेरेपी के एजेंट्स कैंसर के सेल्स के लिए निश्चित नहीं होते हैं। इसका अर्थ है कि एण्टी कैंसर ड्रग्स एक कैंसर सेल्स से ज्यादा सेल्स को प्रभावित करते हैं। इससे सामान्य स्वस्थ सेल्स की भी क्षति होती है। मुख्यत: वो सेल्स‍ जो कि मुंह की लाइनिंग बनाते हैं, पाचन तंत्र के किनारे बनाते हैं, बोन मैरो के अंदर रक्त के सेल्स बनाते हैं और बालों के फालिकल्स को भी प्रभावित करते हैं।

इसी कारण से जिन मरीजों की कीमोथेरेपी की जाती है उनके मुंह में घाव, पेट में परेशानी, बालों का झड़ना और कमज़ोरी जैसी समस्या होती है। कीमोथेरेपी का एक सामान्य अतिरिक्त प्रभाव है किसी भी प्रकार के संक्रमण से जल्दी प्रभावित होना क्योंकि कीमोथेरेपी से बोन मैरो में रक्त के सेल्स का बनना कम हो जाता है।

जब व्हाइट ब्लड सेल्स की गिनती कम हो जाती है तो शरीर बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता खो देता है। यह संक्रमण बहुत गंभीर भी हो सकते हैं। संक्रमण का खतरा तब कम होता है जब व्हाइट ब्लड सेल्स की मात्रा सामान्य हो जाती है।

हमारे शरीर का बोन मैरो (ब्लड क्लाटिंग) रक्त के जमने के लिए भी विशेष सेल बनाता है। कीमोथेरेपी इन सेल्स को भी प्रभावित कर सकता है जिससे रक्त के बहने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इस्तेमाल किये जाने वाले सेल्स को प्लेटलेट्स कहते हैं। जैसे–जैसे कीमोथेरेपी का प्रभाव बोन मैरो पर कम होता जाता है रक्त के बहने का खतरा भी कम होता जाता है।

कैंसर चेरिटेबल सोसायटी द्वारा संचालित श्री जगन्नाथ धर्मार्थ कैंसर अस्पताल के कोषाध्यक्ष एमसी गर्ग ने बताया कि धर्मार्थ चिकित्सालय होने के कारण हमारे यहाँ कीमोथेरेपी और रेडियोग्राफी समेत कैंसर के इलाज की अधिकतर सुविधाएं बहुत कम दामों पर उपलब्ध हैं। उन्होंने हमारा गाज़ियाबाद के पाठकों से अनुरोध किया कि वे अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में अधिक से अधिक लोगों को बताएं ताकि क्षेत्र के सभी कैंसर पीड़ित हमारी सुविधाओं का लाभ ले सकें।

यदि आप किसी ऐसे परिवार को जानते हैं जिसका सदस्य कैंसर पीड़ित है तो आप से अनुरोध है कि यह खबर उस तक अवश्य पहुंचाए। आपका यह छोटा सा प्रयास शायद किसी परिवार के दुख कम करने में महत्वपूर्ण साबित हो! धन्यवाद।

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