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मंदी ने रोकी विकास रथ की रफ्तार, 5% पर पहुंची हिंदुस्तान की जीडीपी

मंदी के चलते देश की विकास दर में गिरावट देखने को मिली है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी 5.8 फीसदी से घटकर के पांच फीसदी रह गई है। वित्त मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने इन आंकड़ों को जारी किया है। पिछले साल यह इसी दौरान आठ फीसदी के पार थी। वहीं पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में यह 5.8 फीसदी थी।

वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर की पिछले साढ़े छह सालों में सबसे ज्यादा सुस्त रफ्तार देखने को मिली। जिन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली उनमें उत्पादन या फिर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 12.1 फीसदी के मुकाबले 0.6 फीसदी ग्रोथ देखने को मिली।

  • कृषि क्षेत्र में ग्रोथ 5.1 फीसदी से घटकर के दो फीसदी रह गई है।
  • खनन क्षेत्र में ग्रोथ 0.4 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली थी, जो अब बढ़कर के 2.7 फीसदी हो गई है।
  • कंस्ट्रक्शन सेक्टर में पिछले साल की पहली तिमाही में ग्रोथ 9.6 फीसदी थी जो अब घटकर के 5.7 फीसदी रह गई है।
  • होटल, ट्रांस्पोर्ट और ट्रेड सेक्टर में ग्रोथ 7.8 फीसदी से घटकर के 7.1 फीसदी रह गई है।
  • वित्तीय, रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ 6.5 फीसदी से घटकर के 5.9 फीसदी रह गई है।

कार्वी स्टॉक ब्रॉकिंग के सीईओ राजीव सिंह ने बताया कि महंगाई दर के कम होने से सरकार अब भी कई क्षेत्रों जैसे कि ऑटो उद्योग, घरेलू आयात, हवाई यातायात में कमी देखने को मिल रही है। अब आरबीआई से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल सरकार इन सेक्टर में कर सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिल सके। अगर सरकार ने इस 1.76 लाख करोड़ राशि का इस्तेमाल इसके लिए नहीं किया तो फिर यह संकट और गहरा सकता है।
फिच इंडिया रेटिंग ने इस साल जीडीपी के 6.7 फीसदी रहने की संभावना जताई है। पिछली बार यह अनुमान 7.3 फीसदी था। इसके साथ ही एजेंसी ने कहा है कि सरकार द्वारा मरहमपट्टी वाले तरीकों से अर्थव्यवस्था को किसी तरह का कोई लाभ नहीं पहुंचेगा। हालांकि एजेंसी को उम्मीद है कि चालू खाता घाटा 3.3 फीसदी रहेगा। एजेंसी का यह भी कहना सरकार को मंदी से उबरने के लिए आरबीआई से मिलने 1.76 लाख करोड़ रुपये के पैकेज से ज्यादा लाभ नहीं मिलेगा।

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