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अंधेरे में डूबा वसुंधरा फ्लाईओवर, तीन विभागों में तालमेल न होने की वजह से हजारों की जान खतरे में

ट्रांस हिंडन क्षेत्र में बने वसुंधरा फ्लाईओवर को शुरू हुए 3 महीने बीत गए हैं, इसके बावजूद यहां लाइट की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में रात के घुप्प अंधेरे में लोग अपनी जान हथेली में रखकर सफर कर रहे हैं। यहां लगे 54 स्ट्रीट पोल कब तक लाइट से रोशन होंगे, इसका संतोषजनक जवाब किसी के पास नहीं है। यह मामला राजकीय सेतु निगम, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) और बिजली निगम के बीच फंसा है। तीनों विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन इस कारण लोगों की जान खतरे में है। सवाल यही है कि अगर यहां हादसे में किसी की जान जाएगी तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

बीते 6 जून को केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग राज्यमंत्री वी.के. सिंह ने 6 लेन वसुंधरा फ्लाईओवर का उद‌्घाटन किया था। “हमारा गाज़ियाबाद” ने तब भी ने फ्लाईओवर पर स्ट्रीट लाइट नहीं लगने का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद अधिकारियों ने टेंडर में देरी होने का हवाला दिया और कहा कि हफ्ते भर में काम शुरू कर दिया जाएगा। अब 54 स्ट्रीट लाइटें लगा दी गई हैं, लेकिन कनेक्शन मिलने में हो रही देरी के चलते यहां अंधेरा पसरा रहता है। इसे लेकर स्थानीय लोग भी सवाल उठा रहे हैं। हाल ही में फेडरेशन ऑफ एओए ने भी विभागों के बीच तालमेल की कमी पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए जीडीए को पत्र लिखा।

इस फ्लाईओवर का निर्माण राजकीय सेतु निगम को दिया गया था। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि जीडीए को बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करना है। अभी तक सेतु निगम की इलेक्ट्रिकल विंग जीडीए को 5 बार रिमाइंडर भेज चुकी है। इसके बावजूद देरी हो रही है। वहीं, जीडीए अधिकारियों का कहना है कि कनेक्शन के लिए बिजली निगम में 16 दिन पहले आवेदन दिया जा चुका है। मंजूरी मिलने का इंतजार है। उधर, बिजली निगम के एक अफसर ने बताया कि जीडीए का आवेदन मिला है। कनेक्शन फीस जमा कराते ही मंजूरी दे दी जाएगी।

जेनरेटर से चालू हुई थी सप्लाई
अधिकारियों ने बताया कि कांवड़ यात्रा के समय जेनरेटर की मदद से कुछ दिनों के लिए वैकल्पिक इंतजाम करते हुए फ्लाईओवर की स्ट्रीट लाइट को रोशन कराया गया था, लेकिन लंबे समय तक इसका खर्च उठा पाना संभव नहीं हो पाया। उस दौरान इस पर रोजाना 40 लीटर डीजल खर्च हो रहा था।

राजकीय सेतु निगम की इलैक्ट्रिकल विंग में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में कार्यरत एके सिंह का कहना है कि स्ट्रीट लाइट कनेक्शन की जिम्मेदारी जीडीए की है। अभी तक 5 बार रिमाइंडर दे चुके हैं। देरी किस स्तर पर हो रही है, इसकी जानकारी जीडीए के अफसर ही दे सकते हैं।

वहीं जीडीए के चीफ इंजीनियर वी एन सिंह का कहा है कि विभाग की तरफ से 16 दिन पहले बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर दिया गया था। अब कुछ दिनों की बात है। कनेक्शन की अनुमति मिलते ही स्ट्रीट पोल में सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।

जबकि विद्युत विभाग के एग्जिक्युटिव इंजीनियर अभिषेक सिंह का कहना है कि जीडीए की तरफ से आए आवेदन पर 10 किलोवॉट का कनेक्शन दिया जा रहा है। कनेक्शन फीस जमा होते ही लाइन जोड़ दी जाएगी। फीस जमा कराने के लिए पत्र भेज दिया गया है।

राजनगर एक्सटेंशन फ्लाईओवर भी डूबा अंधेरे में
कुछ ऐसा हाल मेरठ रोड पर राज नगर एक्सटेंशन चौराहे पर बने फ्लाईओवर का भी है। बार-बार बढ़ाई गई समय सीमा के बाद आधे-अधूरे रूप में खुले इस फ्लाईओवर पर भी शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। इतना ही नहीं इस फ्लाईओवर के बराबर से गुजरने वाली पुरानी मेरठ रोड पर लगी स्ट्रीट लाइटें भी बंद पड़ी हैं।

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