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उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियम) अधिनियम, 2019 – नए नियम बनाने में उद्यमियों की भी होगी सहभागिता

उत्तर प्रदेश के जलशक्ति विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियम) अधिनियम, 2019 से संबंधित एक बैठक राजधानी लखनऊ स्थित योजना भवन में आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता जलशक्ति विभाग मंत्री महेंद्र कुमार सिंह ने की।

चर्चा के दौरान गाज़ियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के प्रतिनिधि केशरी कुमार मिश्र ने जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद में औद्योगिक संगठनों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने तथा न्यूनतम औपचारिकता के आधार पर बोरवेल्स का ऑन लाईन पंजीकरण कराने सुझाव दिया। जलशक्ति मंत्री महेंद्र कुमार सिंह ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अधिनियम बनाने की प्रक्रिया में उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करें।

वहीं, अगले सुझाव के रूप में मिश्र ने कहा कि बोरवेल्स के रजिस्ट्रेशन और इसमें किसी प्रकार के परिवर्तन के लिए जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद को ही अधिकृत किया जाए। जिस पर उत्तर प्रदेश शासन की प्रमुख सचिव अनीता सिंह ने बताया कि क्रिटिकल जोन को छोड़ कर अन्य सभी क्षेत्रों के लिए जिला स्तरीय परिषद पहले से ही अधिकृत है। केवल क्रिटिकल जोन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के बोरवेल्स के रजिस्ट्रेशन और इसमें किसी प्रकार के परिवर्तन के लिए राज्य स्तर की ऑथोरिटी से अनुमति लेनी होगी। आपको बता दें कि गाज़ियाबाद समेत एनसीआर का पूरा इलाका क्रिटिकल ज़ोन में आता है।

बैठक के दौरान अनीता सिंह ने कहा कि प्रदेश में स्थापित सभी बोरवेल्स इस अधिनियम के तहत न सिर्फ पंजीकृत होंगे, बल्कि बोरवेल्स द्वारा निकले गए भूजल के नापने के लिए उनमें मीटर भी लगाया जाएगा। वहीं, केंद्रीय भूजल बोर्ड से प्राप्त एनओसी को अगले एक वर्ष के लिए विधिमान्य किया गया है। इस बैठक में गाज़ियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन, फिक्की, आईआईए, लघु उद्योग भारती व लखनऊ व्यापार मंडल समेत विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

आपको बता दें कि इसी संबंध में गाज़ियाबाद इंडस्ट्रीज़ फ़ैडरेशन के महासचिव अनिल कुमार गुप्ता ने केंद्र व राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर मांग की है कि कृषि क्षेत्र में सिंचाई की ड्रिप इरिगेशन जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को विशेष सबसिडी दी जाए, क्योंकि भूजल के गिरने का सबसे बड़ा कारण किसानों द्वारा किए जाने वाला भूजल दोहन है। उन्होंने बताया कि भारत में कुल निकाले जाने वाले भूजल का 90% दोहन किसानों द्वारा होता है, इसलिए उद्योगों व अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों पर लगाम कसने से वांछित परिणाम नहीं मिलेंगे।

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