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जननी सुरक्षा योजना में पिछड़ा हमारा गाजियाबाद, 6% कम हुआ टीकाकरण

जननी सुरक्षा योजना और टीकाकरण में गाज़ियाबाद जिले का स्वास्थ्य विभाग लगातार पिछड़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अगस्त माह के दौरान जिले में जननी सुरक्षा योजना के तहत केवल 82 प्रतिशत लाभार्थियों को भुगतान और टीकाकरण में विभाग 81 प्रतिशत लक्ष्य ही प्राप्त कर सका है। इस दौरान संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल और मोदीनगर सीएचसी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है।

आपको बता दें कि केंद्र और प्रदेश सरकारें अपनी ओर से जननी सुरक्षा योजना को लेकर खासी सख्ती बरत रही हैं। लेकिन गाज़ियाबाद जिले का स्वास्थ्य विभाग पिछले लंबे समय से जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) में शत प्रतिशत लाभार्थियों को भुगतान नहीं कर पा रहा है। अगस्त माह में जेएसवाई के तहत 82 प्रतिशत लाभार्थियों को ही भुगतान किया जा सका है, जबकि जुलाई माह में 88 प्रतिशत लाभार्थियों को भुगतान किया गया था। 6 प्रतिशत कम भुगतान होने को लेकर शासन स्तर से जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई है।

इसके अलावा टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग का प्रदर्शन पिछले माह से खराब रहा है। जुलाई माह में जिले में 87 प्रतिशत टीकाकरण हुआ था और डीपीटी टीकाकरण में जिला प्रदेश में पहले स्थान पर आया था। अगस्त में 81 प्रतिशत टीकाकरण ही हो सका और पेंटा वैलेंट वैक्सीनेशन के मामले में जिला प्रदेश में सबसे निचले पायदानों में है। इसके अलावा प्रसव के आधे घंटे में नवजात को ब्रेस्ट फीडिग और प्रसव बाद महिला और बच्चे की जांच के मामले में भी सूबे में सबसे निचले पायदान पर है।

लाभार्थियों ने भुगतान लेने से किया इनकार
अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि जेएसवाई योजना के तहत कई लाभार्थियों ने लंबी कागजी कार्रवाई के चलते योजना में पंजीकरण करने और भुगतान लेने से ही इंकार कर दिया। संस्थागत प्रसव में आशा और एएनएम की अहम भूमिका होती है। आशा और एएनएम ही लाभार्थी का फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी करती हैं। हालांकि जो महिलाएं प्रसव के लिए बिना आशा या एएनएम के जरिए अस्पताल पहुंचती हैं उनके परिजनों को योजना में आवेदन करने के लिए खासी मशक्कत करनी होती है। इससे परेशान होकर लाभार्थी योजना का लाभ लेने से ही इंकार कर देते हैं।

जिले के सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता का कहना है कि जेएसवाई में संयुक्त अस्पताल में महज 66 फीसद लाभार्थियों को ही भुगतान किया जा सका है। जबकि मोदीनगर में 68 फीसद लाभार्थियों को भुगतान किया गया है। भुगतान न होने के पीछे लाभार्थियों का बैंक खाता नहीं होने की बात बताई जा रही है। दोनों अस्पतालों प्रभारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं।

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