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डीएलएफ़ स्कूल जमीन घोटाला – कैसे हुआ नक्शा पास? किस आधार पर दी गई एनओसी?

गाज़ियाबाद के राजेन्द्र नगर 2 डीएलएफ स्कूल मामले में अब कई नए प्रश्न खड़े हो गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि स्कूल प्रबंधकों ने गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों से मिलकर सभी नियमों को ताक पर रख दिया और अधिकारियों ने प्रबंधकों की मनमर्जी के अनुसार प्रमाणपत्र आदि जारी कर दिए।

हालांकि अब पॉलीटेक्निक कॉलेज की जमीन पर बने सेक्टर-2 राजेंद्रनगर डीएलएफ पब्लिक स्कूल मामले में जीडीए ने दोषी अधिकारियों पर जांच बैठा दी है। जीडीए उपाध्यक्ष ने जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। प्राधिकरण की जांच से अब मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले प्रवर्तन और नक्शा पास करने वाले नियोजन अनुभाग के अधिकारी रडार पर हैं।

मगर जीडीए की कार्यवाही अभी भी गलत ट्रैक पर ही चल रही है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में जीडीए ने डीएलएफ़ स्कूल प्रबन्धकों को नोटिस भेजा है, जबकि जीडीए के रेकॉर्ड के अनुसार यह जमीन सेठ जय प्रकाश मुकुंदलाल संस्थान को पॉलीटेक्निक कॉलेज बनाने के लिए दी गई थी। ऐसे में प्रश्न खड़ा होता है कि जब जीडीए के रिकॉर्ड में यह जमीन मुकुंदलाल संस्थान के नाम एलाट थी, तो नोटिस डीएफ़एल स्कूल को क्यों भेजा गया? दूसरा प्रश्न यह है कि आखिर किस आधार पर जीडीए के अधिकारियों ने डीएलएफ़ स्कूल के नाम से नक्शा पास कर दिया?

आपको बता दें कि सचिन सोनी द्वारा दायर जन सुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत की जांच में गड़बड़ी सामने आने पर जीडीए उपाध्यक्ष के आदेश पर बीते बृहस्पतिवार को डीएलएफ स्कूल के भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया गया था। शुक्रवार को जांच में अधिकारियों की संलिप्तता का आभाष होने पर जीडीए उपाध्यक्ष ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जीडीए उपाध्यक्ष के मुताबिक अप्रैल 1989 में हुई बोर्ड बैठक में पॉलीटेक्निक कॉलेज के लिए सेठ जय प्रकाश मुकुंदलाल संस्थान को 20924 वर्ग मीटर भूखंड का आवंटन किया गया था।
फिर सेठ जयप्रकाश मुकुंदलाल संस्थान की जगह दरबारी लाल फाउंडेशन ने डीएलएफ स्कूल को नक्शा जमा कराया, जिसे जीडीए नियोजन अनुभाग ने पास कर दिया। नक्शे के पास होने और कंपाउंडिंग किस आधार पर हुई, यह सवालों के घेरे में है। दूसरी ओर जीडीए प्रवर्तन जोन सात के स्कूल बिल्डिंग निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं करने से संदेह खड़ा होता है। दस्तावेजों की सही से जांच नहीं करना और निर्माण के जारी रहने को सीधी लापरवाही मानते हुए जीडीए उपाध्यक्ष ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्य रूप से प्रवर्तन जोन सात में तैनात अधिकारियों व कर्मियों के साथ नक्शा पास करने वाले नियोजन अनुभाग के अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।


सीबीएसई से मान्यता से पहले जीडीए ने कैसे दी एनओसी

राजेंद्रनगर में डीएलएफ स्कूल की बिल्डिंग के निर्माण के बाद मान्यता के लिए प्रबंधन ने सीबीएसई में आवेदन किया था। बोर्ड की शर्तों के अनुसार भूखंड को लेकर स्कूल प्रबंधन को जीडीए से एनओसी लेकर जमा करनी थी। ऐसे में भूखंड का स्वरूप पॉलीटेक्निक कॉलेज का होने से स्कूल के नाम कैसे एनओसी जारी हो गई इस पर सवाल उठ रहे हैं।

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