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यूपी में पोषाहार घोटाले में 28 कर्मचारियों पर गिरी गाज, मचा हडकंप

यूपी। रायबरेली और कन्नौज में हुए पुष्टाहार घोटाले में सरकार ने 28 कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। दरअसल रायबरेली के सलोन ब्लॉक में पशु आहार की दुकान में पोषाहार मिलने के बाद हड़कंप मच गया था। इस मामले को निदेशालय ने जांच के लिए आगे बढ़ाया था।

इस मामले में 17 आंगनबाड़ी वर्कर को मामला सामने आते ही बर्खास्त कर दिया गया था। वहीं पोषाहार की ढुलाई करने वाले एक व्यक्ति को जेल भी भेजा गया है। इसके अलावा 4 सुपरवाइजर, मुख्य सेविकाओं को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है। दूसरी तरफ कन्नौज में पोषाहार वितरण में गड़बड़ी पर चार मुख्य सेविकाओं को सस्पेंड करने और दो के खिलाफ आरोप पत्र दिया गया है। प्रतापगढ़ के डीपीओ पवन यादव को लापरवाही बरतने के आरोप में आरोप पत्र देकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

पिछले दिनों रायबरेली के सलोन ब्लॉक में एक व्यक्ति के पशु आहार के गोदाम में करीब 155 बोरे पोषाहार मिले थे। ये पोषाहार बच्चों को खिलाए जाने के लिए सरकार की तरफ से दिया जाता है। तौलने पर इसकी मात्रा 9300 किलो निकली। उस वक्त विभाग ने सलोन कोतवाली में इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाई थी और जांच चल रही थी। इस मामले में गोदाम संचालकों को जेल भी भेजा गया था। जांच में पाया गया कि पोषाहार प्रतापगढ़ के रामपुर खास और अन्य इलाकों के आंगनबाड़ी केंद्रों में बांटे जाने के लिए दिया गया था लेकिन उसकी बजाय गोदामों में रख दिया गया और अवैध तरीके से प्राइवेट लोगों को बेच दिया गया।

शुरुआती जांच में 17 आंगनबाड़ी वर्कर को इसमें संलिप्त पाया गया जिन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। अब इनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। वहीं 4 सुपरवाइजर और मुख्य सेविकाओं को निलंबित किया गया है। कन्नौज में पोषाहार वितरण में गड़बड़ी के सामने आने के बाद एक प्रधान लिपिक और तत्कालीन डीपीओ जो कि आजमगढ़ में तैनात हैं, के खिलाफ भी आरोप पत्र देकर शासन से कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

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