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मिसाल : कभी दाने-दाने को थीं मोहताज, आज 100 महिलाओं को रोजगार दे रहीं श्यामा

देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून स्थित विकासनगर ब्लॉक के ग्राम फतेहपुर निवासी श्यामा चौहान का जीवन समाज के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। श्यामा का संपन्न परिवार था, घर-मकान था और पति त्रिलोक सिंह की भी ऑटो स्पेयर पाट्र्स की दुकान थी। सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक एक दिन परिचित ने ही धोखाधड़ी से मकान बिकवा दिया।

पति का कारोबार भी चौपट हो गया और परिवार दाने-दाने के लिए मोहताज हो गया। उस पर विडंबना देखिए कि क्षेत्र में घूंघट प्रथा होने के कारण एक महिला के लिए घर से बाहर निकलना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके बावजूद श्यामा ने हालात का मजबूती से मुकाबला करते हुए न केवल सामाजिक बंदिशों को तोड़ा, बल्कि खुद सफलता का मुकाम छूने के साथ ही आज 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं। श्यामा की इस कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि आज उनके पास सारी सुख-सुविधाएं मौजूद हैं।

ऐसे बदली श्यामा की जिंदगी
श्यामा ने मार्च 2012 में महिला जागृति स्वयं सहायता समूह का गठन किया था, लेकिन परिवार पर आई विपत्ति ने दो महीने बाद उसे खत्म करने को मजबूर कर दिया। इसके लिए श्यामा ब्लॉक मुख्यालय विकासनगर गईं, जहां अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के बारे में जानकारी देते हुए समूह को खत्म करने के बजाय नए सिरे से संगठित करने की सलाह दी। इसके बाद श्यामा ने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से जूट बैग और फाइल फोल्डर बनाने का प्रशिक्षण लिया। फिर स्वयं सहायता समूह में छह महिलाओं को जोड़कर इस दिशा में काम शुरू किया। इसके लिए उन्होंने 25 हजार रुपये का लोन भी लिया। धीरे-धीरे महिलाएं समूह से जुड़ने लगीं और कारवां बढ़ता गया। आज यह समूह जूट बैग, फाइल फोल्डर, नो प्लास्टिक बैग, टेक होम राशन आदि से 15 लाख रुपये महीने का कारोबार कर रहा है।

पांच से 15 हजार रुपये कमा रहीं महिलाएं
वर्तमान में महिला जागृति स्वयं सहायता समूह से फतेहपुर, जस्सोवाला, ढकरानी, शेरपुर, भुड्डी आदि गांवों की 100 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं को हर महीने पांच हजार से लेकर 15 हजार रुपये तक की आय हो रही है।

‘गुलाब गैंग’ की तरह महिलाओं को सशक्त बनाना ध्येय
श्यामा चौहान को फिल्म ‘गुलाब गैंग’ में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के अभिनय ने खासा प्रभावित किया। लिहाजा, ‘गुलाब गैंग’ की तर्ज पर ही अपने संगठन को सशक्त बनाना चाहती हैं। यही वजह है कि संगठन की सभी महिलाएं गुलाबी रंग की ड्रेस पहनते हैं। श्यामा उन्हें आर्थिक के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्तर पर सशक्त होने के लिए प्रेरित करती हैं।

जब छूट गई थी बड़ी बेटी की पढ़ाई
एक दौर में श्यामा चौहान का फतेहपुर गांव में स्थित मकान बिक गया था। बाद में श्यामा ने इसी गांव में दोबारा मकान बनाया और यूनिट भी लगाई। बकौल श्यामा, ‘उस समय पैसे नहीं होने के कारण मेरी बड़ी बेटी शिल्पा की पढ़ाई छूट गई थी, लेकिन जब हालात सही हुए तो उसे होटल मैनेजमेंट का कोर्स कराया। आज वह चंडीगढ़ में नौकरी कर रही है, जबकि छोटी बेटी शिखा एमबीए और बेटा आयुष लॉ का छात्र है। पति त्रिलोक सिंह समूह में अकाउंट का काम संभालते हैं।’

दूर तक होती है सप्लाई
एनआरएलएम देहरादून के जिला प्रबंधक विक्रम सिंह बताते हैं कि महिला जागृति स्वयं सहायता समूह वर्तमान में जूट के बैग, फाइल फोल्डर, नो प्लास्टिक बैग, अचार, जूस, एलोवेरा जैल, टेक होम राशन जैसे उत्पाद तैयार कर रहा है। इन उत्पादों की रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और देहरादून जिलों में सप्लाई होती है। बताते हैं कि मिशन के तहत अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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