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जिला सहकारी बैंकों के अफसरों पर कसा शिकंजा, ऋणों की होगी जांच

गाज़ियाबाद। जिला सहकारी बैंकों द्वारा ऋणों की वसूली में बेहद लापरवाही बरती जा रही है। इतना ही नहीं बार-बार समीक्षा बैठक में मांगे जाने पर भी ऋण संबंधी पत्रावली संबंधित अफसरों को नहीं दी जा रही है। इस पर आयुक्त एवं निबन्धक सहकारिता द्वारा कड़ी नाराजगी जाहिर की गई है। आयुक्त के आदेश पर सहायक आयुक्त एवं सहायक निबन्धक सहकारिता गाज़ियाबाद ने जिला सहकारी बैंक के सचिव एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी को नोटिस जारी कर निर्देश दिए है कि वे ऋण वसूली में तेजी लाएं।

नोटिस पत्रांक संख्या-३८०७ पर गौर करें तो लिखा है कि बैंक के एनपीए से वसूली समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने वसूली में लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति के निर्देश दिये गये थे। एआर कॉपरेटिव द्वारा इसी क्रम में शाखा प्रबंधकों, सहायक विकास अधिकारी एवं अपर जिला सहकारी अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वसूली में लक्ष्यों के सापेक्ष पूर्ति हेतु बैंक स्तर से उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम १९६५ व नियमावली १९६८ के प्रावधानों के अनुरूप धारा-९५ क, धारा-९१ के अन्तर्गत कार्यवाही की जाये।

परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी स्तर से वसूली हेतु उक्तानुसार कार्यवाही किये जाने सम्बन्धी पत्रावली अथवा सूचना प्रेषित नही की गई है,जिससे वसूली में आशातीत प्रगति नही हो पा रही है। नोटिस में लिखा है कि आयुक्त एवं निबन्धक द्वारा पत्र भेजकर निर्देश दिए गए है कि एनपीए ऋणों की जांच भी करायी जाये। ताकि अनियमित तरीके से ऋण वितरण हेतु दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारण करते हुए वैधानिक कार्यवाही की जा सकें।
बता दें कि जिला सहकारी बैंकों से हर साल करोडों रूपए के ऋण जारी किए जाते है। डिफॉल्टर खाता धारकों से वसूली की प्रक्रिया धीमी ही होती है। ऐसे में नॉन परफार्मेंस एकाउंट का ग्राफ बढ जाता है। यदि जांच हुई तो डूबने वाले ऋण को लेकर कई अफसर एवं कर्मचारी फंस सकते हैं।

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