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प्रधानमंत्री आवास योजना : जितनी मांग होगी उतने ही बनाए जाएंगे फ्लैट

गाज़ियाबाद। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैटों का निर्माण करने से पहले जीडीए को आवेदन मांगने होंगे। शासन ने निर्देश जारी कर कहा है कि जितनी मांग हो, उतने ही फ्लैटों का निर्माण कराया जाए। आवेदनों से स्पष्ट हो जाएगा कि लोग प्रस्तावित स्थान पर फ्लैट लेना चाहते हैं या नहीं।

बरेली के प्रकरण को देखते हुए शासन को इस दिशा में सोचना पड़ा। सरकारी धन का दुरुपयोग होने से रोकने के लिए नया प्रावधान किया गया है। साथ ही यह निर्देश दिए गए हैं कि प्राधिकरण अपनी वित्तीय स्थिति के अनुरूप ही इस योजना के तहत निर्माण कार्य कराए। वित्तीय स्थिति ठीक न होने पर निर्माण कराने की जरूरत नहीं है। इन निर्देशों के मिलते ही जीडीए ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मसूरी, निवाड़ी, कोयल एंक्लेव, प्रताप विहार समेत कई अन्य स्थानों पर फ्लैटों का निर्माण शुरू कराने पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।

जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने बताया कि बीते सोमवार को शासन में मासिक प्रगति रिपोर्ट (एमपीआर) पर चर्चा हुई थी। उसमें प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित बरेली के प्रकरण सामने आया। बताया गया कि बरेली में इस योजना के तहत फ्लैट बनकर तैयार हैं, लेकिन लोग आवेदन ही नहीं कर रहे हैं। यह भी सामने आया कि शासन से निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए आउटर में फ्लैट का निर्माण किया गया। जिसकी वजह से लोग वहां नहीं जाना चाहते।

इसे गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव आवास की तरफ से निर्देश जारी किया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट का निर्माण मांग के अनुरूप किया जाए। निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए फ्लैटों का निर्माण करने के पीछे न भागा जाए। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा है कि मांग अनुरूप निर्माण करने से लोगों को फायदा होगा। सरकारी धन की हानि भी नहीं होगी। यह निर्देश भी दिए हैं कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले स्कीम निकाल कर आवेदन मांगे जाएं। जितने आवेदन आएं, उतने ही फ्लैट बनाए जाएं। आवेदन न आने पर निर्माण न कराया जाए।

शासन ने वित्तीय स्थिति कमजोर होने पर फ्लैट निर्माण न कराने का निर्देश दिया है। जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने बताया कि यह निर्देश मिलने के बाद मसूरी, निवाड़ी और प्रताप विहार में टेंडर होने के बावजूद फ्लैट का निर्माण शुरू न कराने का निर्णय लिया गया है। अन्य स्थानों पर निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया रोक दी गई है।

शासन ने जीडीए को 2022 तक 36 हजार फ्लैट बनाने का लक्ष्य दे रखा है। उसे पूरा करने के लिए जीडीए अपने 14154 और निजी बिल्डरों के 8049 फ्लैट की डीपीआर मंजूर करा चुका है। इनमें से मधुबन-बापूधाम में 856 और डासना में 432 फ्लैट का निर्माण कार्य चल रहा है।

 

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