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विश्व विकलांगता दिवस : 10 प्रसिद्ध भारतीय, जिन्‍होंने विकलांगता को बनाया अपनी ताकत

नई दिल्ली। हर साल 3 दिसंबर को दुनियाभर में विश्व विकलांगता दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मुख्य रूप से दिव्यागों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करने के लिए मनाया जाता है। 1992 के बाद से ही दुनियाभर में विश्व विकलांग दिवस मनाया जा रहा है। विकलांग दिवस, विकलांग व्यक्तियों के प्रति करुणा, आत्म-सम्मान और उनके जीवन को बेहतर बनाने के समर्थन के उद्देश्य से मनाया जाता है।

फिजिकल डिसेबिलिटी इंसान को काफी मजबूत बनाती है। कहा भी जाता है कि डिसेबिलिटी तो सिर्फ स्‍टेट ऑफ माइंड है। इस वाक्‍य को कई प्रसिद्द भारतीय ने सही साबित किया है। आज जब पूरी दुनिया विश्‍व विकलांगता दिवस मना रही है। तो ऐसे मौके पर सलाम करते हैं उन भारतीयों को जिन्‍होंने अपनी डिसेबिलिटी को पीछे छोड़ अलग पहचान बनाई।

    1. अरुणिमा सिन्हा ने अपनी जिंदगी में कई मुश्किलों का समाना किया। अरुणिमा को चलती ट्रेन से डाकुओं ने नीचे फेंक दिया था। जिससे उन्हें अपना एक पैर खोना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपने जज्बे में कोई कमी नहीं आने दी और दो साल पहले ही माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली अरुणिमा पहली विकलांग महिला बनीं।
    2. भारतीय सिनेमा के मशहूर गीतकार-संगीतकार रविंद्र जैन ने अपनी काबिलियत के दम पर बॉलीवुड को कई बेहतरीन गानें दिए। रविंद्र जन्म से ही अंधे थे लेकिन उन्होंने अपनी लगन और मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ी। और बाद में एक बेहतरीन संगीतकार कहलाए। रविंद्र जैन का 9 अक्टूबर को देहांत हो गया था।
    3. गिरीश शर्मा बैडमिंटन चैंपियन रह चुके हैं। हालांकि बचपन में ट्रेन एक्सीडेंट में उन्होंने अपनी एक टांग खो दी थी। इसके बावजूद वह कभी पीछे नहीं हटे और बेहतरीन प्लेयर बनकर सामने आए।
    4. भारत की तरफ से खेलते हुए शेखर नाइक ने टी-20 ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड चैंपियन का खिताब जीता। उन्होंने इस टूर्नामेंट में 32 शतक लगाए थे।
    5. रामाकृष्णन कम उम्र में ही पोलिया का शिकार हो गए। जिसके चलते उनके दोनों पैर खराब हो गए। शुरुआत में उन्हें कई स्कूलों ने अपाहिज के चलते एडमीशन देने से मना कर दिया था। लेकिन रामाकृष्णन ने कभी हार नहीं मानी और अपनी जिंदगी को बेहतर ढंग से जिया। उन्होंने 40 साल तक जर्नलिस्ट के तौर पर कम किया। और फिलहाल वह एसएस म्यूजिक टेलिविजन चैनल के सीईओ हैं।
    6. प्रभु 4 साल की उम्र में ही पैरालिसिस का शिकार हो गए। लेकिन उनकी यह डिसेबिलिटी कभी भी उनके लक्ष्य के सामने नहीं आई। प्रभु ने स्कूल शिक्षा पूरी करके टेनिस को अपना करियर बनाया। और आखिरकार वह सबसे बड़े quadriplegic wheelchair tennis player बनकर उभरे।
    7. सुधा चंद्रन इंडियन एक्ट्रेस और क्लॉसिकल डांसर हैं। सुधा का जन्म केरल में हुआ था। वह जब 16 साल की थीं, तब एक दुर्घटना का शिकार हो गईं थी। डॉक्टर्स ने पैर का ऑपरेशन किया लेकिन घाव पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाए। जो बाद में इंफेक्शन का कारण बना और सुधा को अपना एक पैर खोना पड़ा। सुधा ने इसे अपनी कमजोरी नहीं माना और नकली पैर की बदौलत एक बेहतरीन डांसर बनकर उभरीं।
    8. 8 साल की उम्र में राजेंद्र सिंह राहेलु पोलियो का शिकार बन गए थे। वह चल नहीं सकते लेकिन यह कमजोरी उनके सपनों को पूरा होने से नहीं रोक पाई। कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में राजेंद्र ने पॉवरलिफ्टिंग में सिलवर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था।
    9. सुरेश अडवाणी एक कैंसर के प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। लेकिन वह 8 साल की उम्र में पोलिया का शिकार बन गए। 2002 में पद्मश्री और 2012 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
    10. मलाठी इंटरनेशनल पैरा एथलीट हैं। पैरा ओलिंपिक की 200मी रेस में वह गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।

 

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