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अब बेसहारा सास-ससुर की भी करनी होगी देखभाल, सरकार ला रही नया कानून

नई दिल्ली। मोदी सरकार देश में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़ा बिल संसद में लाने जा रही है।कैबिनेट ने बुधवार को मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन अमेंडमेट बिल 2019 को मंजूरी दे दी है और जल्द ही बिल संसद में पेश किया जाएगा। यह बिल वरिष्ठ नागरिकों को बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगा।

करनी होगी सास-ससुर की देखभाल

बिल में कहा गया है कि बुजुर्गों की देखभाल का जिम्मा सिर्फ उनको बच्चों पर नहीं होगा बल्कि बेटा-बेटी, नाती-नातिन और पोता-पोती भी देखभाल के लिए कानून तौर पर बाध्य होंगे। वरिष्ठ नागरिकों और परिजनों की कल्याण से जुड़े 2007 के बिल भी यह संशोधन किए जा रहे हैं। इसके मुताबिक परिवार में बच्चे अब सिर्फ अपने माता-पिता ही नहीं बल्कि सास-ससुर के देखभाल को भी जिम्मेदार होंगे, भले ही वह वरिष्ठ नागरिकों की श्रेणी में नहीं आते हों।

कानून का उल्लंघन करने वालों की जेल की सजा बढ़ाने का प्रावधान भी इस बिल में शामिल है जिसे तीन से बढ़ाकर छह माह किया गया है। यहां देखभाल शब्द को भी परिभाषित किया गया है जिसमें रहने का इंतजाम और सुरक्षा देने को शामिल किया गया है। रखरखाव की राशि को वरिष्ठ नागरिक, परिजन, बच्चे और रिश्तेदारों की कमाई के आधार पर तय किया जाएगा।

मामलों का जल्द निपटान

नए बिल में रखरखाव के लिए दी जाने वाली दस हजार की राशि की सीमा को अब हटा दिया जाएगा। साथ ही किसी भी अपील को ट्रिब्यूनल में जाने के 90 दिन के भीतर निपटाने की व्यवस्था की गई है। अगर वरिष्ठ नागरिक की उम्र 80 साल से ज्यादा है तो उस स्थिति में ऐसे आवेदन को 60 दिन में निपटाना जरूरी होगा।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा बनाए रखना इस बिल का मुख्य उद्देश्य है। साथ ही इस बिल में गोद लिए गए बच्चों और सौतेले बेटे-बेटियों को भी शामिल किया गया है। इस बिल में ‘वरिष्ठ नागरिक केयर होम’ का गठन कर उसमें रजिस्ट्रेशन कराने का प्रस्ताव भी शामिल है केंद्र सरकार जिसके मानक और कामकाज तय करेगी। इस एजेंसी का काम वरिष्ठ नागरिकों तक अपनी पहुंच बढ़ाना होगा साथ ही हर पुलिस स्टेशन को इसके लिए नोडल अफसर की नियुक्ति करनी होगी।

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