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गाज़ियाबाद नगर निगम पर नहीं असर सरकारी आदेश का, राष्ट्रीय शोक के बावजूद नहीं झुकाया झण्डा

गाज़ियाबाद नगर निगम के अधिकारियों पर अकसर सरकारी नियम और क़ानूनों की अवहेलना कर मनमानी करने के आरोप लगते रहे हैं। मगर इस बार निगम अधिकारियों ने एक ऐसी गलती की है जिसका सीधा असर भारत की विदेश नीति पर पड़ सकता है।

दरअसल आज पूरे देश में ओमान के सुल्तान के निधन के कारण एक दिवसीय राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय शोक के कारण आज समस्त भारत में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन के अनु सचिव उमेश यादव ने केंरीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का हवाला देते हुए 12 जनवरी को एक पत्र जारी कर सभी विभाग अध्यक्षों को आदेश दिया था कि आज दिनांक 13 जनवरी को प्रदेश में लगे समस्त राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे। इसके साथ ही 13 जनवरी को सभी सरकारी कार्यालय यथावत काम करेंगे लेकिन किसी भी प्रकार के शासकीय समारोह पर पाबंदी है। इस सरकारी आदेश के बारे में जिलाधिकारी डॉ. अजय कुमार ने रविवार शाम को ही जिले के समस्त अधिकारियों को सूचित कर दिया था।

इस महत्वपूर्ण आदेश के बावजूद गाज़ियाबाद के बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क में लगा झण्डा पूरी ऊंचाई पर लहरा रहा है। इस पार्क और झंडे के रखरखाव की ज़िम्मेदारी गाज़ियाबाद नगर निगम पर है। हमारा गाज़ियाबाद की टीम ने जब नगर निगम की कविनगर ज़ोन के टैक्स सुप्रीटेंडेंट और कार्यवाहक ज़ोनल अधिकारी हरी किशन गुप्ता से बात की तो वे इस शासनादेश के बारे में अनभिज्ञ नज़र आए। उन्होंने कहा कि झंडे की ज़िम्मेदारी निगम के चीफ इंजीनियर की है और वे चीफ इंजीनियर से बात कर यथोचित कार्यवाही करेंगे।

शासनादेशों और नियम क़ानूनों की लगातार अवहेलना
ऐसा पहली बार नहीं है जब गाज़ियाबाद नगर निगम के अधिकारी केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी शासनादेशों की अवहेलना कर रहे हैं। नगर निगम के अधिकारियों की सुस्ती का ही परिणाम है कि गाज़ियाबाद में अभी तक उत्तर प्रदेश पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) नियमावली लागू नहीं हो पाई है जिसकी वजह से गाज़ियाबाद के हजारों पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) को हर दिन नगर निगम, पुलिस और जीडीए के उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है।

गाज़ियाबाद नगर निगम उत्तर प्रदेश संपत्ति कर नियमावली 2013 के अनुपालन में भी नाकाम रहा है। इस नियम के पूर्णता में लागू न होने के कारण निगम के अधिकारी मनमाने तरीके से संपत्ति कर वसूल रहे है। इस मुद्दे पर महापौर आशा शर्मा, पार्षद राजेन्द्र त्यागी और हिमांशु मित्तल ने कई पत्र लिखे हैं मगर निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की ऊंची पहुँच के कारण अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। हर पत्र के बाद नगर आयुक्त औपचारिकता वश एक जांच बैठा देते हैं और चूंकि जांच करने वाली टीम में खुद नगर निगम के ही अधिकारी होते हैं इसलिए हर बार भ्रष्टाचार के खिलाफ निगम के अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो जाते हैं।

उत्तर प्रदेश म्युनिसिपल कार्पोरेशन (वार्ड कमेटी) रूल 2014

इसे निगम के अधिकारियों की नियमों के प्रति उदासीनता कहें या फिर उनकी मनमानी मगर यह सत्य है कि गाज़ियाबाद नगर निगम अभी तक शहर में उत्तर प्रदेश म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (वार्ड कमेटी) रूल को लागू करने में भी असफल रहा है।

आने वाले दिनों में गाज़ियाबाद नगर निगम की कारगुजारियों का पर्दाफाश करने के लिए हमारा गाज़ियाबाद की टीम ऐसे बहुत से निगम और कानूनों के बारे में बताएगी जिनके कारण गाज़ियाबाद की जनता का तो लाभ होगा मगर निगम के बहुत से ऐसे भ्रष्ट और नाकारा कर्मचारियों पर गाज़ गिर सकती है जो अपनी पहुँच और पैसे के बल पर वर्षों से एक ही पद पर बैठे हैं। इनमें से बहुत से कर्मचारी तो ऐसे हैं जो वरीयता में काफी नीचे होने के बावजूद कतिपय कारणों से महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान हैं।

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