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निर्भया केस – फांसी से बचने के लिए वकीलों का नया पैतरा, दोषी विनय शर्मा को बताया मानसिक रोगी

अपनी फांसी की सजा माफ कराने के लिए निर्भया गैंगरेप और मर्डर के दोषी लगातार नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं। दोषी विनय शर्मा ने अब राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कोर्ट में दलील दी कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। दोषी विनय ने अपनी इस दलील के साथ ही कोर्ट से फांसी की सजा माफ करने की भी मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज करने के खिलाफ दोषी विनय शर्मा की याचिका पर फैसला शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया है।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जब दोषी विनय शर्मा की याचिका पर सुनवाई की जा रही थी तभी दोषी के वकील एपी सिंह ने कोर्ट को बताया कि विनय की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वकील ने कहा कि मानसिक रूप से प्रताड़ित होने की वजह से विनय मेंटल ट्रोमा से गुजर रहा है, इसलिए उसको फांसी नहीं दी जा सकती है। वकील ने बताया कि मेरे क्लाइंट को पहले ही कई बार जेल प्रशासन की ओर से मानसिक अस्पताल में भेजा जा चुका है और उसे दवाइयां दी गई हैं।

वकील ने कोर्ट से कहा कि किसी भी व्यक्ति को मानसिक अस्पताल तभी भेजा जाता है जब उसकी मानसिक स्थिति ठीक न हो. ऐसे में मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को फांसी नहीं दी जा सकती। एपी सिंह ने कहा यह विनय शर्मा के जीने के अधिकार आर्टिकल 21 का हनन है।

सुनवाई के दौरान वकील एनपी सिंह ने राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘मैं अन्याय रोकना चाहता हूं।’ एपी सिंह ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल की दया याचिका खारिज करने में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सामाजिक जांच रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट और अपराध में उसकी सीमित भूमिका को ध्यान में रखे बगैर राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका खारिज की गई।

एपी सिंह ने कोर्ट में कहा कि विनय शर्मा का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वो कोई आदतन अपराधी नहीं है। वो खेती-बाड़ी करने वाले परिवार से है। मेरी दलीलें कोर्ट के लैंडमार्क जजमेंट पर आधारित हैं। इस पर जस्टिस अशोक भूषण ने उनसे कहा कि आप ये सब बताने की बजाय सीधे-सीधे अपनी अन्य दलीलें और ग्राउंड बताएं। वकील ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री और उपराज्यपाल (एलजी) के दस्तखत नहीं हैं। इसपर सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को दस्तखत वाले दस्तावेज दिखाए जिसके बाद कोर्ट ने एपी सिंह से दूसरे मुद्दे पर दलील देने को कहा।

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