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दिल्ली दंगों में अब तक 8 लोगों की मौत, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में कल अलग-अलग होगी सुनवाई

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट जिले के कई इलाकों में हिंसक प्रदर्शन में अब तक करीब 8 लोगों की मौत हो चुकी है। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में सोमवार को हुई हिंसा में करीब 50 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें पुलिसकर्मी से लेकर आम नागरिक तक शामिल हैं। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के मौजपुर, जाफराबाद इलाकों में हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें एसआईटी गठन की मांग की गई है। इस याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रूख किया और संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में जारी हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार किये जाने का अनुरोध किया। इस याचिका का उल्लेख उच्च न्यायालय के समक्ष किये जाने की संभावना है। याचिका में घटना की जांच के लिए एसआईटी का गठन किये जाने और हिंसा में मारे गये तथा घायल हुए लोगों को मुआवजा दिये जाने की मांग की गई है।

नजीओ ‘ह्यूमन राइट्स लीगल नेटवर्क’ (एचआरएलएन) की याचिका में हिंसा की जांच एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की भी मांग की गई है। याचिका में राष्ट्रीय राजधानी और ऐसे क्षेत्र में जहां ”लोगों पर सांप्रदायिक हमले अधिक हो रहे हैं, कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए केन्द्र को सेना की तैनाती करने के निर्देश दिये जाने का अनुरोध भी किया गया है।’ सीएए को लेकर सोमवार को हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल रतन लाल समेत सात लोगों की मौत हो गई।

प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर बुधवार को SC में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर हाल ही में हुई हिंसा के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग करने वाली पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) वजाहत हबीबुल्ला और अन्य की याचिका पर सुनवाई करने पर मंगलवार को तैयार हो गया। न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसफ की एक पीठ के समक्ष याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। पीठ बुधवार को इस पर सुनवाई करने को तैयार हो गया। हबीबुल्ला, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और सामाजिक कार्यकर्ता बहादुर अब्बास नकवी ने यह याचिका दायर की है।

इसमें सीएए को लेकर शाहीन बाग और राष्ट्रीय राजधानी के अन्य हिस्सों में जारी धरनों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग भी की गई है। शीर्ष अदालत को शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाये जाने की मांग वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई करनी है। अपनी नई याचिका में हबीबुल्ला, आजाद और नकवी ने आरोप लगाया कि, ‘कपिल मिश्रा, जो भीड़ को हिंसा और तोड़फोड़ के वास्ते उकसाने वाले बयान देने के लिए जाने जाते है, ने मौजपुर-बदरपुर मेट्रो स्टेशन के निकट सीएए के समर्थन में एक रैली निकाली थी। इसी मेट्रो स्टेशन से दो किलोमीटर दूर जाफराबाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहे थे।’

मीडिया रिपोर्टों का जिक्र करते हुए याचिका में आरोप लगाया गया है कि मिश्रा लोगों को उकसाने के बाद वहां से चले गये जिसके बाद जाफराबाद में हिंसा हुई और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा के लिए भागने को मजबूर होना पड़ा। इसमें आरोप लगाया गया है कि 23 फरवरी के हमले में घायल हुए लोगों ने पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसमें 23 फरवरी की शाम शुरू हुए हमलों और 24 फरवरी को दिनभर चलने वाले इन हमलों के संबंध में की गई शिकायतों पर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की गई है।


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