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लोकसभा – हँगामा करने के कारण कांग्रेस के 7 सांसद निलंबित, नहीं शामिल हो सकेंगे बजट सत्र में

लोकसभा में हंगामा करने के कारण कांग्रेस के सात सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। इन सांसदों को सदन में दिल्ली हिंसा को लेकर चर्चा के लिए हंगामा करने के चलते निलंबित किया गया है। कांग्रेस के सात लोकसभा सदस्यों को सदन का अपमान करने और ‘घोर कदाचार’ के चलते मौजूदा संसद सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।

आपको बता दें कि दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर हंगामे के कारण निचले सदन में पिछले चार दिनों से कोई खास कामकाज नहीं हो नहीं सका है। इसके कारण गुरुवार को भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सका।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के गौरव गोगोई, टी एन प्रतापन, डीन कुरियाकोस, राजमोहन उन्नीथन, बैनी बहनान, मणिकम टेगोर और गुरजीत सिंह औजला को सत्र की शेष अवधि के लिये निलंबित करने का प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूर किया। इससे पहले मीनाक्षी लेखी ने संसदीय प्रक्रिया नियमों के नियम 374 के तहत उक्त सदस्यों को नामित किया। इसके बाद पीठासीन सभापति मीनाक्षी लेखी ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिये स्थगित कर दी।

कांग्रेस ने इस कदम को बताया बदले की भावना
कांग्रेस ने अपने सात लोकसभा सदस्यों के मौजूदा संसद सत्र की शेष अवधि से निलंबित किए जाने को बदले की भावना से उठाया गया कदम करार दिया और दावा किया कि “यह फैसला लोकसभा अध्यक्ष का नहीं, बल्कि सरकार का है।” लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने यह भी कहा कि सरकार के इस ‘तानाशाही वाले निर्णय’ से पार्टी के सदस्य झुकने वाले नहीं हैं और वे दिल्ली हिंसा पर तत्काल चर्चा की मांग उठाते रहेंगे।

चौधरी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, “आज जो हुआ है वो संसदीय लोकतंत्र के लिए शर्मिंदगी की दास्तान है। हम दो मार्च से मांग करते आ रहे हैं कि दिल्ली हिंसा पर चर्चा शुरू कराई जाए। हिंसा से देश की छवि धूमिल हो रही है, लोगों की जान जा रही है और मजहबी दरार बढ़ती जा रही है। इसलिए हम देश की खातिर चर्चा चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “राहुल गांधी के नेतृत्व में हमने प्रभावित इलाकों का दौरा किया। हमने आज भी कहा कि हम सभी चीजों पर सहयोग करेंगे, लेकिन दिल्ली हिंसा पर चर्चा होना चाहिए।”

‘सरकार का तानाशाहीपूर्ण फैसला’

कांग्रेस नेता ने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष ने सुबह बुलाकर हमसे कहा कि सरकार कोरोना वायरस पर बयान देना चाहती है जिस पर हमने सहमति जताई। सरकार ने कोरोना वायरस पर बयान दिया और उसके बाद हमने फिर से दिल्ली हिंसा पर चर्चा की मांग उठाई।” उन्होंने कहा, “सदन में बदले की भावना देखने को मिली। सभापति के जरिए हमारे सात सांसदों को निलंबित कराया गया ताकि हमारी आवाज को रोका जा सके। यह सरकार ने तानाशाहीपूर्ण निर्णय लिया।”


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