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मानवता अभी जिंदा है, गाज़ियाबाद में मजबूरों की मदद के लिए सामने आ रहे हैं दर्जनों लोग

कोरोना संक्रमण के दौर में सरकार की ओर से निर्देश हैं कि लोग अपने घरों में रहें। इस दौरान ऐसे हजारों लोग हैं जिनकी जिनते सिर पर न घरों की छत है और न ही उसके परिवार वाले उनके पास हैं। ऐसे लोग अपने परिवार वालों के पास पहुंचने की आस लेकर सड़कों पर निकल पड़े हैं। किसी को हरदोई जाना है तो किसी को बरेली अपने परिवार वालों के पास पहुंचना है। ऐसे में पुलिस से लेकर आम आदमी तक मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं।

कलक्ट्रेट के सामने आज सुबह पैदल ही बरेली जा रहे कलुवा को पुलिसकर्मी खाने का पैकेट दे गए तो उसकी जान में जान आई। हरदोई जा रहे कन्हैया लाल को एक व्यक्ति ने खाने को केले दिए तो उसकी आंखों से आंसू छलक आए। सड़क पर ऐसे दृष्य देखकर ये कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि मानवता मरी नहीं है..यही कारण है कि लोग जिंदा रहने का जज्बा दिलों में लिए हुए पैदल ही अपने घरों की ओर कूच करते हुए नजर आ रहे हैं।
भारत में लॉकडाउन का आज तीसरा दिन है, इस दौरान लोगों को अपने घरों में रहने के निर्देश खुद देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिए हैं। ज्यादातर लोग लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। जो लोग पालन नहीं कर रहे हैं पुलिस उनके साथ कुछ सख्ती भी कर रही है। लॉकडाउन का असर सामान्य जनमानस की जनजीवन पर भी पड़ा है। कोरोना संक्रमण के दौर में हजारों लोग ऐसे भी हैं जो रोजगार के लिए अपना घर छोड़कर गाजियाबाद, दिल्ली और हरियाणा में काम कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान ऐसे लोगों के प्रतिष्ठान बंद हुए तो मालिकों ने भी कर्मचारियों की हथेली पर उनका वेतन रख दिया।

ऐसे हजारों लोग सार्वजनिक वाहनों की कमी होने के चलते अब पैदल ही अपने परिवार वालों से मिलने की आस में सड़कों पर पैदल ही सफर कर रहे हैं। खुले आसमान के नीचे सड़कों पर सफर कर रहे ऐसे लोगों के लिए उनकी मदद करने वाले भगवान से कम नहीं हैं। कलूआ और लालू रेवाड़ी में एक फैक्ट्री में काम किया करते थे। लॉकडाउन होने के बाद से फैक्ट्री में तालाबंदी हो गई। फैक्ट्री मालिक ने वहां पर ही इन्हें सिर छिपाने की जगह भी दी हुई थी। सिर से छत चली गई तो ये लोग भी अपने घरों की ओर पैदल ही निकल लिए। दोनों ने बताया कि उन्हें वे सुबह इस बजे रेवाड़ी से निकले हुए हैं। कलेक्ट्रेट के पास दोनों को पुलिसकर्मियों ने खाने के पैकेट दिए तो इनकी जान में जान आई। दोनों ने खाना खाया और हैंडपंप पर पानी पीकर पुलिस का धन्यवाद किया। उसके बाद वे अपने सफर की डगर पर निकल पड़े, दोनों को अपने परिवार केपास बरेली पहुंचना है।
कन्हैया लाल हरदोई के हैं और परिवार के साथ दिल्ली में मजदूरी कर रहे थे। ये भी लॉकडाउन होन के कारण बच्चों के साथ अपने गांव की लिए रवाना हुए हैं। घर पर बुजुर्ग माता-पिता हैं, उनसे जल्द से जल्द मिलने की आस में ये हरदोई के लिए रवाना हुए हैं। रास्ते में इन्हें एक व्यक्ति ने कार रोककर केले खिलाए। पेट में कुछ जाने के बाद इनकी जान में जान आई और ये अपने राह पर चल निकले। ऐसे हजारों लोग आज सड़कों पर पैदल ही सफर कर रहे हैं। दिलों में अपनों से मिलने की आस इनका हौसला बांधे हुए है। बेशक, सफर लंबा है लेकिन रास्ते में मिलने वाले लोग मानवता की मिसालें भी पेश कर रहे हैं। ऐसे लोग इनके लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। शायद, ऐसे लोगों से मिला हौंसला और सहायता इनके घर पहुंचने में सबसे बड़ी मददगार साबित होगी। सड़क पर अपने घरों की राह पर निकले ये लोग सहायता करने वालों को दिल से दुआ भी दे रहे हैं।


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