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हाथरस में गैंगरेप पीड़ित की मौत का मामला:पुलिस ने लाश घर भी नहीं ले जाने दी, परिजन की मर्जी के खिलाफ रात में ही शव जला दिया

  • पीड़ित के भाई ने कहा- प्रशासन दबाव डाल रहा, परिवार को सुरक्षा दी जाए
  • सरकार ने 3 सदस्यों की एसआईटी बनाकर 7 दिन में रिपोर्ट देने को कहा

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 19 साल की दलित लड़की से गैंगरेप और हैवानियत हुई, पीड़ित ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस मंगलवार रात 12:50 बजे शव को पैतृक गांव लाई, लेकिन घरवालों को लाश नहीं सौंपी। आखिरी बार बेटी का चेहरा देखने के लिए माता-पिता और भाई तड़प उठे, लेकिन परिवार वालों की एक नहीं सुनी गई और रात 2:40 बजे लाश जला दी। पुलिस पर आरोप है कि अंतिम संस्कार के दौरान पीड़ित परिवार के एक भी सदस्य को मौजूद नहीं रहने दिया, बल्कि पुलिस ने खुद ही लाश जला दी। इस मामले को लेकर गांव में तनाव है।

प्रियंका गांधी की मांग- मुख्यमंत्री इस्तीफा दें

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि “रात को 2.30 बजे परिजन गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन हाथरस की पीड़िता के शरीर प्रशासन ने जबरन जला दिया। जब वह जीवित थी, तब सरकार ने उसे सुरक्षा नहीं दी। जब उस पर हमला हुआ तो सरकार ने समय पर इलाज नहीं दिया। योगी आदित्यनाथ इस्तीफा दें।”

..अधिकार छीना और मृतका को सम्मान तक नहीं दिया।

घोर अमानवीयता। आपने अपराध रोका नहीं बल्कि अपराधियों की तरह व्यवहार किया। अत्याचार रोका नहीं, एक मासूम बच्ची और उसके परिवार पर दुगना अत्याचार किया।@myogiadityanath इस्तीफा दो। आपके शासन में न्याय नहीं, सिर्फ अन्याय का बोलबाला है।

— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) September 30, 2020
अपडेट्स

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 सदस्यों की एसआईटी बनाकर 7 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। एसआईटी के अध्यक्ष गृह सचिव भगवान स्वरूप बनाए गए हैं। डीआईजी चंद्रप्रकाश और आगरा पीएससी की सेनानायक पूनम भी इसमें शामिल हैं। पूनम खुद भी एससी वर्ग से हैं।

मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी द्वारा हाथरस की घटना पर जांच हेतु तीन सदस्यीय SIT गठित की गई है जिसमें अध्यक्ष सचिव गृह श्री भगवान स्वरूप एवं श्री चंद्रप्रकाश, पुलिस उपमहानिरीक्षक व श्रीमती पूनम, सेनानायक पीएसी आगरा सदस्य होंगे।

SIT अपनी रिपोर्ट 7 दिन में प्रस्तुत करेगी।                                                                                          CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) September 30, 2020

  • दुष्कर्म की शिकार हुई लड़की के भाई का कहना है कि परिवार को सुरक्षा दी जाए। प्रशासन दबाव डाल रहा है। लोकल पुलिस पर भरोसा नहीं है, न्यायिक जांच होनी चाहिए। दोषियों को फांसी दी जाए।परिवार वालों ग्रामीण और पुलिस के बीच हुई झड़प
    रात को जब पीड़ित का शव एंबुलेंस से गांव लाया गया तो परिवार वालों ने हंगामा शुरू कर दिया। वे शव सौंपने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन अंतिम संस्कार की जल्दबाजी में था। परिवार वाले एंबुलेंस के सामने भी लेट गए। इस दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच झड़प भी हुई। आरोप है कि एडीएम ने परिवार वालों से बदसलूकी की। परिवार वाले रात में अंतिम संस्कार नहीं करना चाहते थे, लेकिन शव को जबरन जला दिया गया। इस दौरान मीडिया को भी दूर रखा गया। लाश जलाने में पेट्रोल का इस्तेमाल करने की आशंका जताई जा रही है।

परिजन का सवाल- एम्स की बजाय सफदरजंग क्यों ले गए?
पीड़ित के भाई ने कहा, “बहन को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज से दिल्ली एम्स रैफर किया गया था, लेकिन उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया। अगर सही वक्त पर इलाज मिल गया होता तो बहन जिंदा होती।”

पूरा मामला क्या है?
आरोपों के मुताबिक हाथरस जिले के थाना चंदपा इलाके के एक गांव में 14 सितंबर को चार लोगों ने 19 साल की दलित युवती से दुष्कर्म किया था। वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़ित की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और उसकी जीभ काट दी। दिल्ली में इलाज के दौरान पीड़ित की मौत हो गई। चारों आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि गैंगरेप और जीभ काटने के आरोप गलत हैं।

साभार-दैनिक भास्कर

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