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साइबर क्राइमः ‘शर्म अपराधी को आनी चाहिए या लड़की को ?

“वो मेरा स्कूल में बॉयफ़्रेंड था। जब मैंने उससे रिश्ता तोड़ना चाहा तो उसने मुझे धमकी देनी शुरू कर दी। उसने मुझे मोबाइल फ़ोन कॉल और मैसेज के ज़रिए धमकाना शुरू किया कि वो मेरी तस्वीरें मॉर्फ़ करके पोस्ट कर देगा, मेरी तस्वीरों के पोस्टर बनवा कर मोहल्ले में चिपका देगा।”

“उसने मेरे नाम से फ़ेसबुक पर फ़र्ज़ी अकाउंट भी बनाए और लोगों को फ़्रेंड रिक्वेस्ट भेजनी शुरू कर दी। मैं उस समय दसवीं कक्षा में पढ़ रही थी। मैं काफ़ी डर गई थी। इस मामले में मैं ही पीड़ित थी लेकिन मुझे शर्म आ रही थी, ग्लानि हो रही थी।”

“मुझे लग रहा था कि सब मेरी ही ग़लती है कि मैंने क्यों उससे प्यार किया, बॉयफ़्रेंड बनाया. मुझे उसके लिए भी दुख होता था। मुझे लग रहा था कि जैसे मैंने अपनी पवित्रता को खो दिया है। मैं उस समय बिल्कुल अकेला महसूस कर रही थी। मैं भावनात्मक तौर पर टूट चुकी थी. मैंने ख़ुद को नुक़सान पहुँचाया, आत्महत्या करने की भी कोशिश की. ऐसा तीन साल तक चला।”

ये चेन्नई की सबरीता की कहानी है. इन घटनाओं के बाद सबरीता ने अपना घर छोड़ दिया और रिश्तेदारों के घर जाकर 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की।

उसने स्पोर्टस में भी अपना दिल लगाया. दसवीं में अच्छे अंक नहीं मिले थे तो इससे उबरने के लिए मेहनत की और 12वीं में अच्छे अंक भी आए।

सबरीता बताती हैं कि “मैं कॉलेज के फ़स्ट ईयर में थी। जब मैंने अपनी कज़न बहनों से ये साझा किया तो उन्होंने मेरे अंकल को इस बारे में जानकारी दी। अंकल ने अपने वकील के ज़रिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के फ़ैसला किया।”

सबरीता बताती हैं, “मैं पुलिसवालों के सवाल का सामना नहीं कर पा रही थी। उनके सवाल काफ़ी सख़्त थे। मेरे रिश्तेदार और पुलिस इस पूरे मामले में ऐसे पेश आने लगे थे जैसे मेरी ही पूरी ग़लती हो। उनका कहना था कि एक भले घर की लड़की ऐसे काम नहीं करती है। इसके बाद मैंने कहा कि मैं शिकायत दर्ज नहीं कराना चाहती. मैंने लड़के को भी फ़ोन किया कि मैं तुम्हारे ख़िलाफ़ शिकायत नहीं करवा रही हूं और प्लीज़ तुम भी मेरा पीछा छोड़ दो। और मेरे फ़ेक अकाउंट के ज़रिए मुझे अपमानित और बदनाम करना बंद कर दो, लेकिन वो नहीं रुका।”

“इसके बाद मैंने ही ख़ुद को हिम्मत बंधाई और सारी ग़लती ख़ुद पर मढ़ने के भाव से अपने आप को निकाला. मैंने ख़ुद को समझाया कि मेरी इज़्ज़त बरक़रार है और उसका कोई नुक़सान नहीं हुआ है बल्कि अगर किसी को ग़लती या गिल्ट का एहसास होना चाहिए वो अब्यूज़र को होना चाहिए न कि मुझे।”

सबरीता अब 24 साल की हैं। तमिलनाडु की रहने वाली सबरीता जब चार साल की थीं तो उनकी माँ ने आत्महत्या कर ली थी। मां के गुज़रने के बाद पिता ने भी घर छोड़ दिया. वे अपनी पड़नानी के साथ रहने लगी थीं।

वो बताती हैं कि इस तरह के अब्यूज़ उन्होंने बचपन से ही झेले हैं। स्कूल का एक और वाक़या साझा करते हुए वो बताती हैं कि एक लड़के ने उन्हें अश्लील मैसेज भेजा था जिसका उन्हें अर्थ तक नहीं पता था और वो यही सोचती रही कि उस लड़के ने उसे ये मैसेज क्यों भेजा। ये लड़का उन्हीं की कक्षा में पढ़ता था।

वे कहती हैं, “ऐसे अब्यूज़र हमें डराते हैं कि वो हमारी यानी महिलाओं की तस्वीरों को मॉर्फ़ करके उसका ग़लत इस्तेमाल करेंगे ताकि हम शर्म और ग्लानि की भावना से भर जाएं। समाज भी एक महिला की इज़्ज़त को उसके शरीर से ही जोड़कर देखता है। और अगर कोई किसी महिला की तस्वीरों का ग़लत इस्तेमाल करता है तो महिलाएं इसे जीवनभर के लिए आत्म-सम्मान का प्रश्न बना लेती हैं. लोगों से मिलना-जुलना छोड़ देती हैं. लेकिन मैं इसी स्टिरियोटाइप को तोड़ना चाहती थी।”

सबरीता साइबर जंजाल में फँसे होने के दर्द से निकलना चाह रही थीं. सबरीता ने ऐसे ही अपराध का सामना कर चुकीं महिलाओं से चर्चा की और उनकी भावनाओं ,अनुभवों के बारे में जाना। ज़्यादातर महिलाओं ने परेशान होकर मैसेज डिलीट कर दिए थे। साफ़ था कि साइबर स्पेस में वायलंस या हिंसा झेलने वाली सबरीता अकेली नहीं थीं।

उन्होंने इस मसले पर अपनी फ़ोटो सीरीज़ का विषय ‘इन्फ़ेक्टेड नेट’ चुना और इसकी शुरुआत ख़ुद के सेमी न्यूड सेल्फ़ पोट्रट से की।

वो कहती हैं, “मैं चाहती हूँ कि जो महिलाएं ऐसे अपराध या साइबर हमलों का शिकार हुई हैं उन्हें बाहर निकलना चाहिए, अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। जो हमें चोट पहुँचाते हैं वो सोचते हैं कि पवित्रता हमारे शरीर से ही जुड़ी हुई है और वो अगर हमारा अपमान करेंगे तो इससे हमारी पवित्रता हम खो देंगे. मैं अपनी सेमी न्यूड तस्वीरों के ज़रिए बताना चाहती हूँ कि जब महिला पर कोई भी हमला, एसिड से या उसकी तस्वीरों का ग़लत इस्तेमाल करके होता है तो उसे कैसे चोट पहुँचती है. मैं इन अर्धनग्न तस्वीरों के ज़रिए ये सवाल उठाती हूँ कि क्या शरीर इतना पवित्र है? जो लड़की के ख़िलाफ़ अपराध करता है उसे शर्म आनी चाहिए या लड़की को?”

सबरीता के अनुसार, “मैं अपने शरीर को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती हूँ. ये शरीर सिर्फ़ शरीर है और आप इसे किसी संस्कृति या नियमों के नाम पर दरकिनार नहीं कर सकते यानि वो पवित्रता का पैमाना नहीं हो सकता।”

कई नामीगिरामी फ़िल्मकार, कवि, रचनाकार ने उनके काम की तारीफ़ की है. वो इसके ज़रिए महिलओं को भी आगे आने को कह रही हैं।

सबरीता अपने और अन्य महिलाओं के अनुभवों के ज़रिए एक अलग तरीक़े से समाज को जागरुक कर रही हैं लेकिन यहां ये समझने की भी ज़रूरत है कि जब कोई लड़की या महिला के ख़िलाफ़ साइबर अपराध होता है तो क़ानून का सहारा कैसे लिया जा सकता है?

जब अपराध इंटरनेट के ज़रिए फ़ोन या कंप्यूटर का सहारा लेकर किया जाता है तो वो साइबर अपराध माना जाता है।

वकील सोनाली करवासरा जून कहती हैं कि ऐसे मामले सीधे-सीधे एक महिला की मॉडेस्टी या शील भंग करने से जुड़े होते हैं। साधारण शब्दों में समझा जाए तो फ़ोन या कंप्यूटर के सहारे ऐसा अश्लील हमला जिससे महिला की गरिमा को ठेस पहुँची हो। ऐसे अपराधों को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, धारा 509 और 292(ए) में डाला जा सकता है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 354 कहती है कि अगर किसी महिला की लज्जा भंग करने के लिए उस पर हमला या आपराधिक बल का इस्तमाल किया जाए तो इस धारा के तहत मामला आता है। ऐसे मामलों में अपराधी को कम से कम एक साल से पाँच साल की सज़ा और आर्थिक दंड का भी प्रावधान है।

वहीं धारा 509 के अनुसार अगर कोई शब्द, इशारा, ध्वनि या किसी वस्तु को इस आशय से दिखाया जाए। जिससे किसी स्त्री की लज्जा का अनादर होता है या जिससे उसकी निजता का अतिक्रमण करता है तो ऐसी स्थिति में उसे तीन साल तक जेल या आर्थिक दंड या दोनों ही सज़ा दी सकती है।

गृह मंत्रालय की तरफ़ से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भी बनाया गया है जिसमें विस्तार से बताया गया है कि ऑनलाइन कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। इस पोर्टल पर बच्चों और महिलाओं के साथ हो रहे साइबर अपराध की शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरों के मुताबिक़ साल 2018 में महिलाओं के ख़िलाफ़ हुए साइबर अपराध के मामले सबसे ज़्यादा जिन राज्यों से सामने आए हैं उनमें कर्नाटक(1374), महाराष्ट्र(1262) असम (670) और उत्तरप्रदेश (340) शामिल हैं। इन मामलों में साइबर ब्लैकमेलिंग, धमकाना, स्टॉकिंग, फ़ेक प्रोफ़ाइल, डेफ़ेमेशन आदि शामिल हैं।

वकील साहब क्या कहते हैं –
वकील पुनित भसीन बताती हैं कि लड़कियों की फ़ोटो का ग़लत इस्तमाल कई तरीक़ों से किया जाता है। जैसे सोशल मीडिया पर फ़ेक आईडी बना कर दूसरों से बात की जा सके, उस पर गंदी या अश्लील पोस्ट डालकर बदनामी की जा सके।

वे बताती हैं कि रिवेंज पोर्न के भी मामले आते हैं जिसमें ब्रेकअप होने के बाद पुरुष अपनी पार्टनर के साथ ली गई निजी फ़ोटो का इस्तमाल करता है और डाइवोर्स मामले में पति भी अपने हित में और केस का जल्द सेटलमेंट करवाने के लिए इसका इस्तमाल करते हैं।

ऐसे में ये सारे मामले साइबर अपराध में आते हैं। साइबर पोर्नोग्राफ़ी के मामले आईपीसी के सेक्शन 292 के तहत आते हैं जिसमें साइबर स्पेस का इस्तेमाल किसी भी तरह के पोर्नोग्राफ़िक मेटेरियल को सर्कुलेट करने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में दो साल तक की सज़ा या 2000 रुपए का जुर्माना लग सकता है या दोनों सज़ा मिल सकती है और वहीं आईटी एक्ट, 2000 के कई सेक्शन में अलग-अलग सज़ा का प्रावधान है।

वैसे ही स्टॉकिंग यानी पीछा, फ़िज़िकल या साइबर स्पेस में हो सकता है। फ़िज़िकल में जहां व्यक्ति आपका पीछा करके आपके बारे में ख़बर रखता है वहीं साइबर स्टॉकिंग में व्यक्ति आपको ऑनलाइन स्टॉक या आपका पीछा करता है ये स्टॉकिंग वाट्सअप, ट्विटर या किसी भी सोशल मीडिया पर फ़ॉलो करके की जाती है।

साइबर स्टॉकिंग में किसी मैसेज, मेल, लिंक या वाट्सअप फ़ोटो के ज़रिए मैलवेयर इन्सटॉल कर दिया जाता है पीड़ित के फ़ोन या लैपटॉप के ज़रिए उस लड़की की लोकेशन या सब चीज़ो का ट्रैक रखा जा सकता है। कई मामलों में लड़कियां डरी हुई होती हैं और आत्मविश्वास खो देती हैं. ऐसे मामलो में आईपीसी के अंतर्गत आने वाली धारा 354(डी) में सज़ा का प्रावधान है।

वकील पुनीत भसीन मानती हैं कि ज़्यादातर मामलों में देखा गया है कि लड़कियाँ शिकायत दर्ज नहीं करातीं। रिवेंज पोर्न मामले में वो डर जाती हैं कि पुलिस को भी उन्हें वो तस्वीरें या वीडियो दिखाने पड़ेंगी और फिर लोग भी देख सकेंगे। वहीं स्टॉकिंग मामले में भी वो आगे आकर शिकायत नहीं करवातीं. लेकिन उन्हें आगे आना चाहिए क्योंकि क़ानून कहता है कि ‘क्राइम टू बॉडी इज़ गिवन प्रीफ़रेस टू क्राइम ओवर मनी’।

क्योंकि ये ‘क्राइम टू बॉडी’ कहलाता है तो पुलिस भी तुरंत शिकायत दर्ज करती है। इसलिए वो सलाह देती है कि अगर कोई लड़की के साथ ऐसी कोई भी घटना होती है तो उसे अपने नज़दीकी थाने में जाकर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। ऐसे मामले साइबर सेल में जाते हैं और वहां ऐसे मामलों की पूरी तहक़ीकात होती है।
साभार – https://www.bbc.com/hindi 

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