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मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से होते हैं ये फायदे, सर्दियों में डॉक्टर से भी मिलेगा छुटकारा

आमतौर पर घरों में एल्युमीनियम, स्टील या नॉनस्टिक बर्तनों का यूज किया जाता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से मिट्टी के बर्तनों में पकाया और खाया जाने वाला भोजन बहुत लाभकारी होता है। इसके फायदों के बारे में जानिए।

एक समय था, जब घरों में लोग भोजन पकाने और परोसने के लिए मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल किया करते थे। लेकिन आगे चलकर वह परंपरा बस दही की हांडी और मटकों तक सीमित रह गई, लेकिन अब यह ट्रेंड फिर से दिखाई दे रहा है। लोगों का रुझान मिट्टी के बने बर्तनों की ओर बढ़ रहा है। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी फायदेमंद होता है।

मिट्टी में कई गुण पाए जाते हैं। अधिकांश धातुएं मिट्टी में ही पाई जाती हैं। जब हम मिट्टी के बर्तन में खाना खाते हैं तो अनेक पोषक तत्व जैसे जिंक, मैग्नीशियम, आयरन हमारे शरीर में आते हैं।

दो प्रकार के बर्तन-
इस समय मिट्टी के बर्तन दो तरह से बन रहे हैं। पहला तो परंपरागत चाक पर जैसा कुम्हार बनाते हैं। दूसरा मिट्टी के बर्तन अब फैक्ट्री में डाई से यानी खांचे द्वारा भी बनाए जा रहे हैं। दोनों तरह के मिट्टी के बर्तन मजबूत होते हैं लेकिन जो हाथ से बने होते हैं, वे ज्यादा मजबूत होते हैं क्योंकि उन्हें ज्यादा अच्छे तरीके से भट्टी में पकाया जाता है। कुम्हार एक-एक बर्तन पर खास ध्यान देते हैं।

सफाई है आसान –
अकसर लोगों को मिट्टी के बर्तन कैसे धोने हैं, इस बात को लेकर भी भ्रम रहता है। कई लोग जानकारी के अभाव में इन्हें खरीदते ही नहीं हैं। मिट्टी के बर्तनों को धोना बहुत ही आसान है। इसके लिए आपको कोई केमिकल युक्त साबुन, पाउडर या लिक्विड का इस्तेमाल नहीं करना।

आप बर्तनों को केवल गरम पानी से धो सकते हैं। चिकनाई वाले बर्तनों में ज्यादा से ज्यादा आप पानी में नीबू निचोड़ कर डाल दें तो बर्तन बिल्कुल साफ हो जाते हैं। अगर रगड़कर साफ करना चाहते हैं तो नारियल की बाहरी छाल यानी नारियल के जूट से बर्तन साफ कर लें।

सुविधाजनक इस्तेमाल-
कुछ लोगों को लगता है कि पहले तो चूल्हा इस्तेमाल होता था, इसलिए मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल होता था। लेकिन गैस पर क्या मिट्टी के बर्तनों को चढ़ाया जा सकता है? इसका जवाब है हां। आप गैस पर मिट्टी के बर्तनों में खाना बना सकते हैं।

आयुर्वेद में कहा गया है कि जिस बर्तन में आप खाना पका रहे हैं, वह अच्छा होना चाहिए। बस इस बात का ख्याल रखें कि जब आप मिट्टी के बर्तन को गैस पर चढ़ाते हैं तो उसकी फ्लेम यानी आंच मध्यम रखें। तेज आंच पर खाना न बनाएं।

वैसे भी कोई भी बर्तन हो तेज आंच पर खाना नहीं पकाना चाहिए क्योंकि इससे भोजन की पौष्टिकता नष्ट हो जाती है। हालांकि मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने में सामान्य बर्तनों की अपेक्षा थोड़ा सा ज्यादा समय लगता है। लेकिन सेहत के लिए सबसे बढ़िया मिट्टी के बर्तन ही होते हैं।

कई तरह से फायदेमंद-

  • अपच और गैस की समस्या दूर होती है।
  • पौष्टकता के साथ भोजन का बढ़ता है स्वाद।
  • कब्ज की समस्या से मिलती है निजात।
  • भोजन में मौजूद पोषक तत्व नष्ट नहीं होते हैं।
  • भोजन का पीएच वैल्यू मेंटेन रहता है, इससे कई बीमारियों से बचाव होता है।
    रखें ध्यान
    मिट्टी के बर्तन यूज करने से पहले ध्यान रखें कि जो बर्तन कुकिंग में इस्तेमाल होने हैं, उन्हें पहली बार यूज करने से पहले लगभग 12 घंटे पानी में भिगोकर रखें। यानी रात भर इन बर्तनों को पानी में रखें और सुबह सुखाने के लिए रख दें।

    जब सूख जाएं तब इस्तेमाल करें। बड़े बर्तनों को बस पहली बार ही 12 घंटों के लिए भिगोना है और छोटे बर्तनों को जैसे गिलास, कटोरी, दही जमाने की हांडी चम्मच, कप आदि को 6 घंटे भिगोना काफी है। उसके बाद मध्यम आंच पर रखें और इसमें पके पौष्टिक भोजन का आनंद लें।साभार-हरिभूमि

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