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IAS Success Story: बिना कोचिंग के घर पर रहकर की तैयारी, सर्जना ने ऐसे UPSC परीक्षा में बाजी मारी

सर्जना यादव ने साल 2019 की यूपीएससी सीएसई परीक्षा में टॉप किया और आईएएस बनने का अपना सपना पूरा किया. आज जानते हैं उनसे बिना कोचिंग के कैसे करें इस परीक्षा की तैयारी.

सर्जना यादव ने साल 2019 की यूपीएससी परीक्षा पास करके आईएएस बनने का अपना सपना पूरा किया. यह उनका तीसरा प्रयास था जिसके लिए वे मानती हैं कि वास्तव में यह ही उनका पहला सीरियस प्रयास था. इसके पहले के दो प्रयासों में उनकी तैयारी ठीक से नहीं हो पाई थी. साथ ही वे उस समय जॉब भी कर रही थी तो डेडिकेटली एग्जाम के लिए प्रिपेयर नहीं कर पाईं. साल 2018 में जॉब क्विट करने के बाद उन्होंने फुल फ्लेज्ड तैयारी की और सफल भी हुईं. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में सर्जना ने परीक्षा पास करने की स्ट्रेटजी के साथ ही इस एग्जाम को लेकर कैंडिडेट्स के कॉमन सवालों के जवाब देने की भी कोशिश की.

कोचिंग को नहीं मानती आवश्यक –

सर्जना कहती हैं कि अक्सर कैंडिडेट्स कोचिंग ज्वॉइन करने को लेकर संशय में रहते हैं. इस बारे में उनका मानना है कि यह हर इंडिविजुअल की च्वॉइस होती है कि वह कोचिंग करना चाहता है या नहीं. अगर आपको क्लासरूम स्टडी और लगातार गाइडेंस की जरूरत पड़ती है तो आप बेशक कोचिंग ज्वॉइन कर सकते हैं. हालांकि सर्जना ने कभी कोचिंग नहीं की और हमेशा घर पर रहकर ही तैयारी की. उनका मानना है कि कोचिंग वाले आपकी प्रिपरेशन को स्ट्रीमलाइंड कर देते हैं. इससे आप एक ही (सिखाए गए) तरीके से सोचते हैं और आपका खुद का इनोवेशन, क्रिएटीविटी और परसेप्सन खत्म हो जाता है. इस वजह से सर्जना को कोचिंग नहीं समझ आती हालांकि अगर आपको जरूरत लगती है तो जरूर इसे ज्वॉइन करें.

देखें  सर्जना यादव द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

सीमित किताबें चुनें, कुछ कम पड़े तो गूगल कर लें –

कोचिंग के बाद सर्जना अगले अहम बिंदु पर आती हैं कि तैयारी के लिए कितनी किताबें चुननी चाहिए. वे कहती हैं कि सीमित किताबें ही रखें और उन्हीं से बार-बार पढ़ें बजाय इसके की बहुत सारी किताबें रखें लेकिन उनको रिवाइज एक या दो बार ही कर पाएं. अगर इन सीमित किताबों में कभी कोई विषय न मिले या न समझ आए तो उसके लिए एक नयी किताब अरेंज करने के चक्कर में न पड़ें. बजाय इसके वह विषय गूगल कर लें. एक क्लिक पर आपको इतने वीडियो, इतने ट्यूटोरियल मिल जाएंगे कि उन्हें देखने के बाद आपके मन में एक भी डाउट नहीं बचेगा. इंटरनेट पर बहुत मैटीरियल है आप जो चाहें वह विषय यहां से पा सकते हैं.

कितने घंटे करें पढ़ाई –

इस सवाल के जवाब में वे कहती हैं कि कितने घंटे पढ़ें से ज्यादा जरूरी है कि जितने घंटे भी पढ़ें, ठीक से पढ़ें. यहां क्वांटिटी की जगह क्वालिटी महत्व रखती है. एक बात और कि हर स्टूडेंट की क्षमताएं अलग होती हैं. किसी को वही कांसेप्ट जल्दी समझ आ जाता है तो किसी को उसी में घंटो लगते हैं तो यह आप अपने हिसाब से तय करें. एक कॉमन बात जो सबके साथ होती है, वह यह है कि जब आप तैयारी शुरू करते हैं तो आपको चीजों पर होल्ड लाने के लिए ज्यादा समय लगता है. उसके बाद जैस-जैसे रिवीजन करते जाते हैं वही समय कम होता जाता है. इसी प्रकार जब एग्जाम पास आ जाते हैं तो फिर कैंडिडेट ज्यादा देर पढ़ने लगता है. तो यह सब नेचुरल है जिसे हर कोई फेस करता है. बेहतर होगा स्टडी टाइम को आप अपनी नीड और पेस के हिसाब से एडजस्ट करें.

नोट्स बनाएं या नहीं –

सर्जना कहती हैं कि हर विषय के नोट्स बनाना प्रैक्टिकली पॉसिबल नहीं है क्योंकि परीक्षा की तैयारी के दौरान और भी बहुत सी चीजों पर ध्यान देना होता है. जैसे मॉक टेस्ट अटेम्पट करने होते हैं, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस करनी होती है वगैरह. इसलिए जिन विषयों में चीजें पहले ही शॉर्ट फॉर्म में दी हों, उनके नोट्स बनाना स्किप करें और जिन विषयों में हर चीज पैराग्राफ में कॉम्प्रीहेंसिवली दी हुई है उनके नोट्स अपनी जरूरत के मुताबिक बना सकते हैं. अंत में यह रिवाइज करने में हेल्प करते हैं पर आपको इस बात का ध्यान भी रखना है कि केवल नोट्स बनाने में ही सारा समय खर्च नहीं कर सकते.

सर्जना की सलाह –

अंत में सर्जना कैंडिडेट्स के डाउट क्लियर करते हुए कहती हैं कि इस पूरे डिस्कशन के बाद दो विषय और हैं जो बचते हैं. एक तो यह कि कितने टेस्ट दें और न्यूज पेपर कैसे मैनेज करें. इसके जवाब में वे कहती हैं कि बहुत सारी टेस्ट सीरीज देना मदद नहीं करता. अपनी जरूरत के मुताबिक तय करें और अगर एक या दो टेस्ट सीरीज में आपका सारा कुछ कवर हो जाता है तो किसी की देखा-देखी ज्यादा टेस्ट सीरीज ज्वॉइन न करें. उससे बेहतर होगा कि उन टेस्ट्स का जो आफ्टर टेस्ट एनालिसेस मिलता है उसे रिवाइज कर लें. रही बात न्यूज पेपर की तो वे कहती हैं कि शुरू-शुरू में हर किसी को इसमें समस्या भी आती है और बहुत समय भी लगता है पर इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है. धीरे-धीरे आप समझ जाएंगे की पेपर का कौन सा हिस्सा आपके लिए जरूरी है और धीरे-धीरे आपकी स्पीड भी बन जाएगी. चाहें तो मंथली मैग्जीन्स भी करेंट अफेयर्स के लिए कंसीडर कर सकते हैं.साभार-एबीपी न्यूज़

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