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गाजियाबाद नगर निगम,दो लाख की आबादी और एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं

गाजियाबाद। देश भर के शहरों को स्वच्छता के मानकों पर परखने के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 शुरू हो गया है। शहर में राजनगर एक्सटेंशन एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी आबादी दो लाख से ज्यादा है, लेकिन यहां एक भी सार्वजनिक या सामुदायिक शौचालय नहीं है। जल्द ही क्यूसीआई (क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया) की टीम शहर का निरीक्षण करने वाली है। वह शौचालयों की स्थिति भी देखेगी। यदि यह टीम राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में निरीक्षण के लिए पहुंची तो सरकारी व्यवस्था की पोल खुलनी तय है।

करीब डेढ़ दशक पूर्व राजनगर एक्सटेंशन को बसाना शुरू किया गया था। जीडीए के माध्यम से प्राइवेट बिल्डरों ने इस क्षेत्र में बहुमंजिला इमारतों को खड़ा किया। मौजूदा समय में राजनगर एक्सटेंशन की विभिन्न सोसायटियों में करीब 50 हजार परिवार रह रहे हैं। इनके अलावा कई व्यावसायिक क्षेत्र बन जाने के कारण यहां दूसरे क्षेत्रों के लोगों का भी आवागमन होता है।

राजनगर एक्सटेंशन के लोगों का कहना है कि यहां सार्वजनिक सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। करीब दो लाख की आबादी के बीच एक भी सामुदायिक शौचालय तक नहीं बनाया गया है। कूड़ा कलेक्शन के लिए न कोई ढलाबघर है न ही ट्रांसफर स्टेशन। व्यावसायिक क्षेत्रों और कॉलोनियों का कचरा खाली प्लाटों में डाला जा रहा है। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने के दावे फर्जी साबित हो रहे हैं। बीते साल भी गाजियाबाद नगर निगम की रैंक गिरी थी।

नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ
फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन राजनगर एक्सटेंशन के अध्यक्ष व अधिवक्ता गजेंद्र आर्य का कहना है कि केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से गाजियाबाद के विकास के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। स्वच्छ भारत मिशन, अवस्थापना निधि से शहर के अन्य हिस्सों में कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन राजनगर एक्सटेंशन को अलग कर दिया गया है। इस क्षेत्र के लोगों से नगर निगम, जीडीए और जिला प्रशासन सौतेला व्यवहार कर रहा है।

तीन विभागों में चक्कर काट रही फेडरेशन की आरटीआई
फेडरेशन ऑफ एओए राजनगर एक्सटेंशन की ओर से अध्यक्ष गजेंद्र आर्य ने 23 सितंबर को कलक्ट्रेट में जिला प्रशासन कार्यालय में आरटीआई दाखिल की थी। उन्होंने जानकारी मांगी थी कि राजनगर एक्सटेंशन में जिला प्रशासन गाजियाबाद द्वारा कोई विकास कार्य क्यों नहीं कराया गया। अगर राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र प्राइवेट बिल्डरों द्वारा बसाया गया है तो निवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है या नहीं। इसके अलावा दो अन्य सवालों की भी जानकारी मांगी गई थी।

जिला प्रशासन ने इसका जवाब देने की बजाय 28 सितंबर को यह आरटीआई नगर निगम को फॉरवर्ड कर दी। नगर निगम ने इसका जवाब देने की बजाय 14 अक्तूबर को इस आरटीआई को जीडीए के पास भेज दिया। जीडीए ने भी अभी तक इसका जवाब नहीं दिया है। तीन विभागों के बीच यह आरटीआई चक्कर काट रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर बताएंगे कि स्वच्छता के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं को जीडीए और नगर निगम किस तरह से कागजों में लागू कर रहे हैं। दो लाख की आबादी के बीच एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं बनाया गया है। इसकी सूचना क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया को भी भेजेंगे, ताकि स्वच्छ सर्वेक्षण में इस क्षेत्र का भी निरीक्षण कराया जाए।

गजेंद्र आर्य, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ एओए राजनगर एक्सटेंशन
यह महत्वपूर्ण नहीं है कि जिम्मेदारी किसकी है। अगर राजनगर एक्सटेंशन में सार्वजनिक शौचालय की जरूरत है और अभी तक नहीं बना है तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह शौचालय बने। भले ही इसके लिए जीडीए से वार्ता करनी पड़े। जल्द ही राजनगर एक्सटेंशन का सर्वे कराएंगे। – महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त-साभार-अमर उजाला

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