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गुनहगार तक पहुंचने के लिए नौकरी छोड़ 40 दिन तक छानी खाक

इसी वाहन से हुई दुर्घटना..

यह कहानी एक ऐसे युवक की है, इंसाफ की तलाश में जिसने 40 दिनों तक सड़क की खाक छानी। जिद उसकी अपने चाचा के हत्यारे को सलाखों के पीछे पहुंचाने की थी। अंधेरे में हाथ-पांव मारता अकेले वह दर-दर की ठोकरें खाता रहा। इस बीच उसकी मल्टीनेशल कंपनी की इंजीनियरिंग की नौकरी भी चली गई। बीते दिनों गुनहगार को सजा दिलाने के बाद ही उसने चैन की सांस ली।

मामला मंगोलपुरी की एक सड़क दुर्घटना का है। नवंबर महीने में अपने चाचा की मौत का किशन कुमार पर गहरा सदमा लगा। किशन ने एनआईटी, जालंधर से इंजीनियरिंग की थी और उस वक्त एक मल्टीनेशन कंपनी में काम करता था। कोरोना काल में किसी तरह उसकी नौकरी बच पाई थी। यह जानते हुए कि हिट एंड रन के ज्यादातर मामले अनसुलझे रहते हैं, इंसाफ के लिए किशन ने आरोपी तक पहुंचने की ठानी।

अपनी इस कोशिश में उसको पहली दिक्कत यह थी कि वाहन का आधा-अधूरा नंबर उसके पास था। पुलिस से भी उसे ज्यादा मदद नहीं मिल रही थी। दो-चार दिन तक वह सड़क पर घूमता रहा, लेकिन एकदम ब्लाइंड केस की तह तक जाना आसान नहीं था। इसी बीच उस पर नौकरी पर जाने का दबाव भी आया। अब उसने नौकरी की जगह इंसाफ की अपनी जंग को प्राथमकिता दी। नौकरी छोड़कर वह आधी-अधूरी जानकारी के सा?थ 40 दिनों तक सड़कों पर खाक छानता रहा। आखिर में उसे कामयाबी मिली और चाचा का हत्यारा सलाखों के पीछे पहुंच गया है।

घटनाक्रम:
मामला 11 नवंबर की सुबह दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके का है। एक्स ब्लॉक निवासी कैलाश अपने बेटे महेश के साथ मादीपुर स्थित कार्यालय जा रहे थे। पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर एक टेंपो ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। कैलाश सड़क पर गिर गये, जबकि उनका बेटा पटरी पर गिर गया। कैलाश की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर फरार हो गया। हालांकि, इस दौरान एक बाइक चालक ने ड्राइवर की साइड शीशे पर हेलमेट मारकर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया। सड़क पर पड़े पिता का क्षत-विक्षत शव देखकर गंभीर रूप से घायल महेश सन्न था। बावजूद उसने ड्राइवर का चेहरा, गाड़ी का हुलिया आधा-अधूरा नंबर नोट कर लिया। घटना के बाद पुलिस ने हिट एंड रन का मामला दर्ज कर लिया। उधर, हादसा होने के बाद कैलाश के घर में कोहराम मच गया।

गुनहगार तक इस तरह पहुंचा किशन
अपनी जांच शुरू करने से पहले किशन ने घायल भाई महेश से लंबी बात की। महेश ने बताया था कि टेंपो अंडे का सप्लाई करता है। टेंपो में तिरपाल लगा है और उसका नंबर 4603 है। साथ ही हेलमेट मारे जाने से ड्राइवर की तरफ से शीशा चटका हुआ है। इसके बाद किशन रोज सुबह चार बजे से टेंपो की तलाश में जुट गया। उसने कई अंडा सप्लायर और डीलर से टेंपो के बारे में पूछताछ की। घटनास्थल के आस-पास के कई सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी जुटाया। इसके बाद उस रास्ते से गुजरने वाले ऐसे सैकड़ों टेंपो में से आरोपी को ढूढने लगा। हर दिन सुबह चार बजे वह पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर पहुंचा जाता। करीब 40 दिन बाद किशन को 4603 नंबर एक टेंपो दिखा। इसके बाद उसने टेंपो पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। जांच में पता चला कि टेंपो पानीपत के एक प्रॉटरी फार्म का है। टेंपो को दूसरा चालक चला रहा था। पुलिस ने उसके मालिक गिरीधारी लाल को तलब किया। पुलिस ने मालिक को गिरफ्तार कर लिया।

सड़क हादसे की बात से अनजान था मालिक
गिरीधारी लाल ने पुलिस को बताया कि उसे उसकी गाड़ी से सड़क हादसा होने की जानकारी नहीं थी। घटना के दिन जब गाड़ी के चटके शीशे को देखकर ड्राइवर से पूछा था तो उसने झगड़ा होने की बात कही थी। उसके बाद से वह छुट्टी लेकर चला गया था। मालिक ने पुलिस को बताया कि वह हादसा को अंजाम देने वाले चालक को पेश करेगा। कुछ दिन बाद मालिक ने हादसा को अंजाम देने वाले चालक सुरेंद्र कुमार उर्फ छोटू को पेश किया। जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी चालक की किशन के भाई महेश ने भी पहचान कर ली।

सहयोग करने वालों की सराहना करती है पुलिस
किसी भी मामले को सुलझाने के लिए मदद करने वालों की दिल्ली पुलिस सराहना करती है। जिला पुलिस उपायुक्त समय समय पर ऐसे लोगों को सम्मानित व पुरस्कृत भी करते हैं। पुलिस और पब्लिक के सहयोग से कई मामलों को सुलझाने में कामयाबी मिली है।साभार-अमर उजाला
अनिल मित्तल, अतिरिक्त जनसंपर्क अधिकारी, दिल्ली पुलिस

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