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गाजियाबाद,’बच्चे पापा के आने की राह में रोते-रोते सो जाते हैं’, मुरादनगर हादसे में जान गंवाने वाले शख्स के परिवार का दर्द

घर में 8 साल का एक मासूम अपने पिता की तस्वीर लेकर घूमता रहता है। वह अपनी दादी और मां से पूछता रहता है कि पापा घर कब आएंगे, उसके सवाल को सुनकर दोनों रोने लगती हैं।

गाजियाबाद। मुरादनगर स्थित गंगा विहार कॉलोनी स्थित एक घर में 3 जनवरी से मातम पसरा है। घर में 8 साल का एक मासूम अपने पिता की तस्वीर लेकर घूमता रहता है। वह अपनी दादी और मां से पूछता रहता है कि पापा घर कब आएंगे, उसके सवाल को सुनकर दोनों रोने लगती हैं। सबको रोते देख बच्चा भी रोने लगता है। यह नितिन का घर है, जिनकी मुरादनगर श्मशान घाट हादसे में मौत हो गई थी।

नितिन के बूढ़े पिता इकबाल सिंह बताते हैं कि 3 जनवरी को संगम विहार में रहने वाले उनके रिश्तेदार जयराम का अंतिम संस्कार था। इसमें शामिल होने के लिए मुझे जाना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण नितिन ने मुझे नहीं जाने दिया और वहां खुद चला गया। मैंने एक दो बार उसे मना भी किया, लेकिन बारिश की बात कहकर वह खुद निकल गया। अगर मुझे पता होता कि ऐसी अनहोनी होने वाली है तो उसे कभी नहीं जाने देता। वहीं नितिन की पत्नी नीलम का भी हादसे के बाद से रो-रोकर बुरा हाल है।

नितिन प्रिंटिंग प्रेस में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। उनके दो बेटे हैं, जिनके बीच रहकर वह अपने परिवार के साथ खुशी से रहते थे, लेकिन उनके जाने के बाद से पूरे घर में मातम पसरा रहता है। पत्नी कहती हैं कि अब परिवार के सामने अंधकार छाया हुआ है। घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। परिवार के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। पिता इकबाल सिंह बताते हैं कि नितिन की मजदूरी से ही घर का चूल्हा जलता था। अब उसके चले जाने के बाद उन्हें दो वक्त की रोटी भी मिलने में मुश्किल होगी।

सरकार ने परिवार की आर्थिक मदद के लिए 10 लाख रुपये का चेक और बच्चों की निशुल्क पढ़ाई के लिए प्रमाण पत्र तो दे दिए हैं, लेकिन बेहतर भविष्य के लिए नितिन की पत्नी नीलम को सरकारी नौकरी मिलना जरूरी है। ताकि वह अपने बच्चों का पालन पोषण सुचारू रूप से कर सके। पत्नी नीलम का कहना है कि नितिन की मौत के बाद उनके दोनों बेटे देव (10) जो कक्षा 3 का छात्र है। राज (8) कक्षा 1 का छात्र है, अकेले पड़ गए हैं।

दोनों बच्चे शाम होते ही उनसे अपने पिता के बारे में पूछते हैं कि मम्मी पापा कब आएंगे और देर रात तक अपने पापा की आने की राह देखते रहते हैं और रोते-रोते सो जाते हैं। इकबाल सिंह भी बेटे की याद में रोते सिसकते रहते हैं। नीलम का कहना है कि शमशान घाट में लेंटर में घटिया सामग्री लगाने वाले भ्रष्टाचार में लिप्त सभी आरोपितों को सख्त सजा मिले तभी उनके पति की आत्मा को शांति मिलेगी।साभार-नवभारत टाइम्स

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