ताज़ा खबर :
prev next

प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों को घेरकर लाठियां बरसाईं, बचने के लिए पुलिसकर्मी 15 फीट ऊंची दीवार से कूदे

दिल्ली में मंगलवार को ट्रैक्टर परेड निकाल रहे किसानों की भीड़ पुलिस की ओर से तय किए गए रूट से बाहर निकलकर लाल किले तक पहुंच गई। ये किसान सिंघु बॉर्डर से आए थे। हिंसक भीड़ ने यहां तैनात पुलिसवालों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। जान बचाने के चक्कर में कई जवान 15 फीट ऊंची दीवार से गिर गए। तो कईयों को हमलावरों से बचने के लिए कूदना पड़ा। इसका एक वीडियो सामने आया है। इस घटना में 41 पुलिसवाले घायल हो गए। वहीं, दिल्ली में मंगलवार की हिंसा में कुल 86 पुलिसकर्मी घायल हुए।

दोपहर करीब 2 बजे हजारों किसान मेन गेट से लाल किले के अंदर घुस गए। उन्होंने अंदर तोड़फोड़ तो की ही, किले की प्राचीर पर चढ़कर धार्मिक ध्वज निशान साहिब और किसानों का झंडा लगा दिया। हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री इसी जगह तिरंगा फहराते हैं। यह हंगामा करीब 90 मिनट तक चलता रहा। इसके बाद पुलिस ने उपद्रव कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज किया और उन्हें खदेड़कर बाहर निकाल दिया।

गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल 300 आर्टिस्ट फंसे, पुलिस ने निकाला

किसानों की हिंसा के बीच लाल किले के पास लगभग 300 आर्टिस्ट फंस गए। इनमें बच्चे भी शामिल थे। ये सभी गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल हुए थे। कई घंटे फंसे रहने के बाद पुलिस ने उन्हें रेस्क्यू किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें दरियागंज मेस भेज दिया।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की तस्वीरें दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र से मेल खा रही हैं। जिस तरह लाल किले पर आंदोलनकारियों ने उपद्रव किया, ठीक उसी तरह अमेरिका में 6 जनवरी को ट्रम्प समर्थकों ने हंगामा किया था।

हजारों की संख्या में ट्रम्प समर्थक अमेरिकी संसद कैपिटल हिल में घुस गए। यहां तोड़फोड़ की, सीनेटरों को बाहर किया और उनके ऑफिसों पर कब्जा कर लिया था। बाद में सुरक्षाबलों ने इन्हें बाहर निकाला। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी।

8 फोटोज में देखिए, अमेरिकी संसद और लाल किले में हुआ उपद्रव कैसे एक सा है…

1. पहली तस्वीर अमेरिका की है, जहां 6 जनवरी को ट्रम्प समर्थकों ने संसद पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने कई घंटे तक उपद्रव मचाया था। दूसरी फोटो लाल किले की है, जहां मंगलवार को हजारों किसान आंदोलनकारी दाखिल हो गए।

2. 6 जनवरी को ट्रम्प समर्थकों ने अमेरिकी संसद के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से पर कब्जा कर लिया था। ऊंची दीवारों पर बिना किसी सहारे के चढ़ रही भीड़ की यह तस्वीर उपद्रव की प्रतीक बन गई। इसी तरह की तस्वीर लाल किले से आई है। यहां एक नौजवान ने खालसा पंथ और किसान संगठन का झंडा फहरा दिया। इसी पोल पर प्रधानमंत्री हर साल 15 अगस्त पर ध्वजारोहण करते हैं।

3. उस दिन डोनाल्ड ट्रम्प ने वॉशिंगटन डीसी में एक रैली की थी। इसमें शामिल हुए लोग रैली के बाद US कैपिटल की ओर बढ़ गए। उन्होंने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया और अंदर घुस गए। इनकी संख्या इतनी ज्यादा थी कि पुलिस कम पड़ गई। इस वजह से उन्हें रोका नहीं जा सका। ऐसा ही मंगलवार को लाल किले में हुआ। किसान दिल्ली आए थे ट्रैक्टर परेड निकालने, लेकिन पहुंच गए लाल किला।

4. US कैपिटल में उस वक्त अमेरिकी कांग्रेस इलेक्टोरल कॉलेज पर बहस कर रही थी। इस वजह से सुरक्षा भी कड़ी थी। इसके बावजूद उपद्रवियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए। हिंसा की चेतावनी दिए जाने के बाद भी पुलिस उन्हें नहीं रोक पाई। ट्रम्प समर्थक कैपिटल बिल्डिंग में दाखिल हो गए। मंगलवार को किसानों ने भी यही किया। उन्होंने लाल किले के बाहर बैरिकेडिंग तोड़ दी। पुलिस भी उनका कुछ नहीं कर पाई।

5. ट्रम्प के समर्थक हजारों की तादाद में बिल्डिंग के भीतर घुसते जा रहे थे। वे सीनेटर हॉल तक पहुंच गए। ऐसे में वहां तैनात सिक्योरिटी ऑफिसर्स ने उन पर बंदूकें तान दीं, ताकि हालात बिगड़ने पर उन्हें काबू किया जा सके। हालांकि, लाल किले के बाहर ऐसी नौबत नहीं आई। पुलिस अफसरों ने सभी किसानों से माइक पर शांति की अपील की। इसके बाद भी वे नहीं माने तो लाठीचार्ज किया गया।

6. अमेरिकी संसद के बाहर बनाया गया सुरक्षा घेरा तोड़ने के बाद अंदर पहुंचे ट्रम्प समर्थकों से पुलिस ने शांत रहने की अपील की। हिंसा पर उतारू ट्रम्प समर्थकों ने उनकी बात अनसुनी कर दी। तब पुलिस को उन्हें रोकने के लिए ताकत का इस्तेमाल करना पड़ा। हिंसक भीड़ पर टियर गैस का इस्तेमाल किया गया। लाल किले के बाहर भी दिल्ली पुलिस ने किसान आंदोलनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे।

7. ट्रम्प के समर्थक बिल्डिंग के बीच में बने गुंबद वाले हॉल तक चले गए। इनमें से कुछ ने वहां लगी मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया। ज्यादातर गुस्से के बजाय मस्ती के मूड में दिख रहे थे। उनमें पुलिस का कोई डर नहीं था। एक उपद्रवी वहां रखा पोडियम उठाकर ले जाते वक्त हंसता दिखाई दिया। लाल किले के बाहर भी कंबल ओढ़कर सोए कुछ बुजुर्ग किसानों ने हंसते हुए फोटो खिंचाई।

8. ट्रम्प के समर्थक उनकी रैली में शामिल होने आए थे। लिहाजा सभी के पास ट्रम्प की जीत का दावा करने वाले झंडे थे। यही झंडे लहराते हुए वे उपद्रव करते रहे। लाल किले के बाहर जुटे किसान भी ट्रैक्टर रैली की तैयारी से आए थे। उनके हाथों में तिरंगा था। पूरे समय वे तिरंगा लहराते रहे। फोटो लेते रहे। पुलिस समझती रही कि सब कुछ शांति से होता रहेगा, लेकिन किसान अचानक उपद्रव करने लगे।साभार-दैनिक भास्कर

आपका साथ – इन खबरों के बारे आपकी क्या राय है। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें।हमारा न्यूज़ चैनल सबस्क्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
Follow us on Facebook http://facebook.com/HamaraGhaziabad
Follow us on Twitter http://twitter.com/HamaraGhaziabad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *