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किसान आंदोलनः 82 साल के बुजुर्ग ने कहा- सर्दी देख ली, हक नहीं मिला तो गर्मी भी यहीं काटेंगे

टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन के पहले दिन से ही गांव जुलाना, जींद निवासी 82 वर्षीय किसान जिले सिंह लाठर डटे हुए हैं। बीते 72 दिनों में उन्होंने दिल्ली की सीमा पर सर्दी, पाला और बरसात को सहन किया है, लेकिन उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं है।

दिल्ली की सर्दी कैसी लगी, इस सवाल पर कहा कि यह तो कुछ भी नहीं है, जींद में यहां से ज्यादा सर्दी पड़ती है। खेत में काम करते वक्त हाथ-पांव सुन्न हो जाते हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

उन्होंने कहा, सर्दी व बरसात को सह लिया, हक नहीं मिला तो गर्मी भी यहीं काटकर जाएंगे। जिले सिंह बताते हैं कि वह पढ़ेे-लिखे नहीं हैं, लेकिन जब भी दिल्ली में बड़ा किसान आंदोलन हुआ, वह उसमें जरूर शामिल हुए हैं। यह उनका तीसरा किसान आंदोलन है।

इससे पहले 1988 में वह बाबा महेंन्द्र सिंह टिकैत केे साथ किसान आंदोलन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद साल 2002 में महेन्द्र सिंह टिकैत और घासीराम नैन की अगुवाई में दिल्ली आए। अब वह तीसरी बार दिल्ली आए हैं और यह सबसे लंबा आंदोलन है।

पत्नी ने कहा, 26 को गोली चलेगी आगे ना जाना
जिले सिंह रोजाना घर पर फोन करके हालचाल पूछते हैं। 25 जनवरी को उनकी पत्नी मूर्ति देवी ने कहा कि 26 जनवरी को गोली चलेगी आगे ना जाना। तब उन्होंने कहा, बच्चों को गोली लगेगी, इससे अच्छा है कि मुझे ही गोली लग जाए।

गांव उदयपुर, जींद के ही सत्यपाल पूनिया ने बताया कि जिले सिंह 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में सबसे आगे थे। दिल्ली में बरसात हो रही थी तो चार दिन तक भीगते रहे, लेकिन यहां से घर जाने को तैयार नहीं थे। बाद में उन्होंने टीकरी बॉर्डर पर पिलर नंबर 755 के सामने अपना टेंट लगाया। यहां चुस्ती-फुर्ती के साथ वह डटे हुए हैं।

संगरूर से 230 किमी पैदल दिल्ली पहुंचे 5 किसान
संगरूर के पांच युवा किसान दिल्ली चलो का नारा बुलंद करते 230 किलोमीटर पैदल चलकर शनिवार को दिल्ली पहुंचे। जगबीर सिंह, कुलवीर सिंह, बलविंदर सिंह, गुरदीप सिंह और अमृत पाल सिंह ने अपने कुर्ते पर रोष मार्च का स्टिकर लगाया हुआ था। सभी 30 जनवरी को घर से निकले थे और शनिवार दोपहर टीकरी बॉर्डर पहुंचे। यहां संयुक्त किसान मोर्चा ने इनका फूल मालाओं से स्वागत किया।

जगवीर सिंह ने कहा कि वह पहले भी यहां पर आ चुके थे, लेकिन 26 जनवरी को अपने गांव गोड़ेनव चले गए थे। उन्होंने दिल्ली दोबारा लौटने का निर्णय लिया और रास्ते में जो भी मिला उसे साथ चलने के लिए कहा। कुलवीर सिंह ने कहा कि उनके पास अपनी कार थी, लेकिन लोगों से दिल्ली चलो का आह्वान करते हुए पैदल आने का निर्णय लिया। शनिवार को राजस्थान से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। पिछले दो दिनों की अपेक्षा चक्काजाम के मौके पर पर यहां कम भीड़ नजर आई।साभार-अमर उजाला

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