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वैक्सीन सेंटर पर लोगों का दिल जीत रही हैं ट्रांसजेंडर डॉक्टर अक्सा शेख

Dr. Aqsa Shaikh Story : वो कहती हैं येरुशलम स्थित मस्जिद अल-अक्सा का इतिहास भी उनकी बीती जिंदगी जैसी ही है। अक्सा का मतलब भी दुरूह सपना होता है जो जल्दी पूरा नहीं हो सके। हालांकि, उनके साथ रह रहीं उनकी अम्मी उन्हें अब भी जाकिर कहकर ही बुलाती हैं।

हाइलाइट्स:

  • ट्रांसजेंडर डॉक्टर अक्सा शेख दिल्ली के एक वैक्सीनेशन सेंटर की नोडल ऑफिसर हैं
  • HIMSAR जाकर टीका लगाने वाले लोग अक्सा से खासे प्रभावित हो रहे हैं
  • अक्सा का मकसद भी ट्रांसजेंडर कम्यूनिटी के प्रति लोगों का नजरिया बदलने का है

नई दिल्ली
एक बुजुर्ग कोरोना का टीका लगवाने हमदर्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ऐंड रिसर्च (HIMSAR) पहुंचे। उन्होंने वहां के नोडल ऑफिसर से बात की तो दंग रह गए। उन्होंने एक वॉल्युंटिअर से कहा, “वो (नोडल ऑफिसर) देखने में महिला लग रही हैं, लेकिन उनकी आवाज अलग किस्म की है।” तब उन्हें बताया गया कि वो अक्सा शेख हैं जो इस इंस्टिट्यूट में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग की असोसिएट प्रफेसर हैं। वॉल्युंटियर ने बुजुर्ग को बताया, “वो ट्रांसजेंडर हैं।”

अक्सा शेख ने वैक्सीनेशन सेंटर की नोडल ऑफिसर की जिम्मेदारी बढ़-चढ़कर ली है ताकि उनकी बिरादरी के प्रति लोगों का नजरिया बदला जा सके। इसी वजह से ऑब्जर्वेशन रूम में कई वीडियो और किताबें उपलब्ध हैं जिनसे यही संदेश दिया जा रहा है।

काफी संघर्षपूर्ण रहा है जीवन

38 वर्षी अक्सा को इस पद तक पहुंचना आसान नहीं था। मुंबई के मलाड में अपने परिवार को छोड़कर 2010 में दिल्ली आ बसने तक की उनकी यात्रा काफी संघर्षपूर्ण रही है। वो जाकिर हुसैन थीं जो 2013 में अक्सा शेख हो गईं। उन्होंने बताया, “मैं पैदा तो लड़का हुई थी, लेकिन तीन-चार साल की उम्र से ही मुझे लड़कियों जैसी फीलिंग होने लगी थी। मैं सिर्फ बालकों वाले स्कूल में गया। आप समझ सकते हैं कि मेरा बचपन कितना संघर्षपूर्ण रहा होगा। मैंने केईएम हॉस्पिटल के अंदर सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई की। लेकिन, इस दौरान मैं अपनी पहचान को लेकर उलझन में रहा करती थी। मैं न खुद को हिजड़ा मानती थी और न ही गे।”

तनाव में बढ़ने लगा ब्लड प्रेसर

अक्सा जब कॉलेज के फर्स्ट ईयर में थीं तब उनका ब्लड प्रेसर बढ़ने लगा। एक डॉक्टर ने उन्हें मनोवैज्ञानिक (Psychologist) से मिलने की सलाह दी। अक्सा ने हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि 2003 में उन्होंने मनोचिकित्सक से परामर्श लेना शुरू किया और तब उन्हें अपने ट्रांसजेंडर नेचर का पता चलने लगा। तब तक परिवार ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी। उन्होंने कहा, “परिवार से हर वक्त लड़ते रहना कठिन है।”

दिल्ली आकर बदली जिंदगी
बहरहाल, अक्सा ने सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज से ही एमडी की डिग्री हासिल की। वो HLPF नामक एक एनजीओ की मदद से दिल्ली आईं और 2013 में HIMSAR जॉइन कर लिया। उन्होंने कहा, “यहां मेरे आसपास ऐसे युवक और युवतियां मिले जिनसे में दिल खोलकर बात कर सकती थी। उन्होंने बहुत ज्यादा सपॉर्ट किया।” हालांकि, परिवार से सपॉर्ट के अभाव में उनके मन में खुदकुशी की भावनाएं आने लगीं। तब जाकर उन्होंने अपना लिंग बदलवाने का फैसला किया।
वो बताती हैं, “यह काफी महंगा है, इसलिए मुझे आर्थिक मजबूती की जरूरत थी। इस दौरान हमने सार्वजनिक परिवहन की जगह खुद की कार से यात्रा करने की ठान ली। मेरे परिवार ने मेरा विरोध किया, लेकिन मैंने उनकी एक ना सुनी।”

4 जुलाई, 2019 को वो अक्सा नाम के साथ नई जिंदगी पा ली। वो कहती हैं येरुशलम स्थित मस्जिद अल-अक्सा का इतिहास भी उनकी बीती जिंदगी जैसी ही है। अक्सा का मतलब भी दुरूह सपना होता है जो जल्दी पूरा नहीं हो सके। हालांकि, उनके साथ रह रहीं उनकी अम्मी उन्हें अब भी जाकिर कहकर ही बुलाती हैं।साभार-नवभारत टाइम्स

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