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Types of notices to taxpayers: 7 तरह के होते हैं आयकर विभाग के नोटिस, जानिए क्या होते हैं इनके मतलब!

पढ़िए नवभारत टाइम्स की ये खबर…

Types of notices to taxpayers: आयकर रिटर्न में कुछ भी गड़बड़ होने पर आयकर विभाग की तरफ से नोटिस आता है, लेकिन क्या आपको पता है कि ये नोटिस कई तरह के होते हैं। आइए जानते हैं हर तरह के नोटिस का मतलब कि कब कौन सा नोटिस आता है।

हाइलाइट्स:

  • कम ही लोग जानते हैं कि आयकर विभाग के नोटिस भी कई तरह के होते हैं।
  • अगर आपकी आय और टैक्स में कोई अंतर दिखता है तो भी नोटिस आ सकता है।
  • गलती से कोई चीज गलत रह गई हो तो भी नोटिस आ जाता है।
  • अलग-अलग गलती के लिए अलग-अलग तरह के नोटिस आयकर विभाग की तरफ से भेजे जाते हैं।

नई दिल्ली: Types of notices to taxpayers: ये तो सभी को पता है कि आईटीआर में कोई खामी पाए जाने पर आयकर विभाग की तरफ से नोटिस आ जाता है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि ये नोटिस भी कई तरह के होते हैं। अगर आपकी आय और टैक्स में कोई अंतर दिखता है तो भी नोटिस आ सकता है। गलती से कोई चीज गलत रह गई हो तो भी नोटिस आ जाता है। आइए जानते हैं आयकर विभाग के तमाम नोटिसों के बारे में और ये भी जानते हैं कि वह किस बात के लिए आते हैं।

सेक्शन 131(1ए)
आयकर अधिनियम के Section 131(1A) के तहत एक असेसिंग ऑफिसर को अधिकार है कि वह इस बात पर शक कर सके कि करदाता ने कुछ आय छुपाई है। यानी आपको ये नोटिस आने पर इस बात के सबूत देने होंगे कि आपने कोई इनकम नहीं छुपाई है।

सेक्शन 133ए
Section 133A के तहत अकाउंट्स के सर्वे या स्क्रूटिनी के लिए नोटिस जारी किया जाता है।

सेक्शन 142
Section 142 के तहत दिया जाने वाला नोटिस सबसे कॉमन नोटिस है, जो आयकर रिटर्न फाइल नहीं करने पर दिया जाता है। इसके तहत अकाउंट्स की स्क्रूटिनी के लिए कहा जा सकता है। आयकर रिटर्न भरने पर करदाता की तरफ से दिए गए दस्तावेजों पर कोई संदेह होने की सूरत में भी ये नोटिस आ सकता है

सेक्शन 143(1)
Section 143(1) के तहत आने वाला नोटिस तब आता है जब ये पाया जाता है कि टैक्स रिटर्न फाइल करते हुए कोई गलती हुई है या फिर कोई गलत जानकारी दी गई है। ऐसी सूरत में अतिरिक्त टैक्स डिमांड की जाती है।

सेक्शन 143(2)
Section 143(2) के तहत नोटिस आने का मतलब है कि असेसिंग ऑफिस की तरफ से एक नियमित मूल्यांकन जांच की जाएगी।

सेक्शन 148
Section 148 का नोटिस तब आएगा, जब असेसिंग ऑफिसर को लगेगा कि आपकी कुछ आय का मूल्यांकन नहीं हुआ है, ऐसी सूरत में फिर से मूल्यांकन किया जा सकता है।

सेक्शन 156
अगर करदाता की तरफ से कोई टैक्स, ब्याज, हर्जाना आदि ड्यू रह जाता है तो उसे Section 156 के तहत नोटिस जारी कर के भुगतान करने के लिए कहा जा सकता है।साभार-नवभारत टाइम्स

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