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चाय बागानों में पार्टियों के झंडे लहरा रहे, पर मुन्नार की शेरनी गोमथी 10 हजार महिला टी वर्कर्स के बूते सरकार से पंगा ले रही हैं

पढ़िए दैनिक भास्कर की ये खबर…

  • मुन्नार इडुक्की जिले के देविकुलम विधानसभा सीट में आता है, यहां 80% वोटर्स चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर हैं
  • पिछले साल यहां लैंड स्लाइड में 50 से ज्यादा चाय मजदूरों की मौत हो गई थी, विपक्षी पार्टियां इसी मुद्दे पर सरकार को घेर रहीं

कोच्चि से 125 किमी दूर केरल का अपना कश्मीर है। वैसे इस जगह का नाम मुन्नार है, लेकिन यहां की खूबसूरती के कारण स्थानीय लोग भी इसे केरल का कश्मीर ही कहते हैं। वादियों की हरियाली और टेढ़े-मेढे़ रास्तों वाली यह जगह दुर्गम चोटियों पर है। समुद्र तल से करीब 1100 फीट की ऊंचाई पर। इडुक्की जिले में वेस्टर्न घाट पर स्थित मुन्नार का बॉर्डर तमिलनाडु से लगता है। चाय बागानों से भरे इस इलाके की विधानसभा सीट देवीकुलम है।

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चुनावी माहौल से चाय के बागान भी अछूते नहीं हैं। जगह-जगह चाय बागानों में पार्टियों के झंडे लहरा रहे हैं। इनमें ज्यादातर CPI और कांग्रेस पार्टी के हैं। कोरोना के चलते कई टी फैक्ट्रियों का काम भी प्रभावित है। चाय बागानों में मजदूर काम कर रहे हैं, लेकिन बाहर से आने वालों पर पाबंदी है। कई जगह पत्तियों की कटिंग बहुत तेज गति से हो रही है। इन बागानोंं में काम करने वालों में 90% महिलाएं हैं। इन सबके बीच हमारी मुलाकात गोमथी अगस्टाइन से होती है। गोमथी चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं की लीडर हैं और केरल में अक्सर वे सुर्खियों में रहती हैं। उनकी एक आवाज पर चाय बागान और फैक्ट्रियों में काम बंद हो जाता है।

इडुक्की जिले में वेस्टर्न घाट पर स्थित मुन्नार इलाके में चाय बागानों की भरमार है। इनमें काम करने वालों में ज्यादातर महिला मजदूर ही हैं।

गोमथी मुन्नार की टाउन कॉलोनी में रहती हैं। 10वीं तक पढ़ी हैं, पर अंग्रेजी में थोड़ी-बहुत बात कर लेती हैं। उन्हें फोन करने पर पहले वे बात करती हैं फिर अपनी बहन को फोन दे देती हैं। बहन घर का पता बताती हैं, जिसके सहारे हम कॉलोनी की ओर बढ़ते हैं, लेकिन रास्ता भटक जाते हैं। फिर गोमथी मेरे साथी ड्राइवर माहिन से मलयालम में फोन पर बात करती हैं और खुद रास्ता बताने काॅलोनी के बाहर आ जाती हैं। वहां से हम पैदल ही उनके घर पहुंचते हैं। बातचीत शुरू होती है। वे मिलीजुली हिंदी-अंग्रेजी में जवाब देती हैं, लेकिन बाद में मलयालम बोलने लगती हैं। माहिन उनकी बातों का हिंदी तर्जुमा हमें बताते हैं।

आपने कुछ दिन पहले हड़ताल क्यों की थी? गोमथी कहती हैं कि ‘हां, 9 दिन हड़ताल चली थी, वो तनख्वाह बढ़ाने को लेकर की थी, क्योंकि पुरुषों को ज्यादा और महिलाओं को कम तनख्वाह मिलती थी। और सारा काम महिलाएं करती हैं।’

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इसी बीच जैसे ही मैं गोमथी नाम लेता हूं, बगल मैं बैठे माहिन चौंक जाते हैं, बोलते हैं- अरे आप तो गोमथी हैं। वो तुरंत खड़े होकर गोमथी को हाथ जोड़ कर नमस्कार करते हैं। फिर माहिन कहने लगते हैं, अरे सर आपको पता है, ये यहां की शेरनी हैं। इन्हें तो पूरा केरल जानता है, ये हमेशा ही सरकार से पंगा लेती रहती हैं। नेता इनको अपनी पार्टी में शामिल कराने के लिए हमेशा लगे रहते हैं।

इस पर गोमथी मुस्कुराती हैं। कहती हैं मुझे पार्टी में तो नहीं जाना है, लेकिन मैं तो आदी हो गई हूं, पुलिस उत्पीड़न की। जब भी केरल में कुछ होता है, पुलिस मुझे सबसे पहले गिरफ्तार करके ले जाती है। CAA-NRC में केरल बंद बुलाया गया था, इसमें बंद से पहले ही पुलिस मुझे उठा ले गई थी। मेरे ऊपर विजयन सरकार ने कई केस लाद रखे हैं। मुकदमा चल रहा है।

गोमथी अगस्टाइन टाउन कॉलोनी में रहती हैं। 10वीं तक पढ़ी हैं, पर अंग्रेजी में थोड़ी-बहुत बात कर लेती हैं। गोमथी चाय बागानों में काम करने वाली महिलाओं की लीडर हैं।

42 साल की गोमथी ने पहली स्ट्राइक 2015 में की थी, जब वे काम के दौरान जल गई थीं। तब वे और उनकी साथी महिलाओं ने कन्नन देवन प्लाटेंशन कंपनी के खिलाफ मुआवजे की मांग करते हुए हड़ताल कर दी थी। इसके बाद से ही वे टी वर्कर्स महिलाओं की लीडर बन गईं। उसी साल बाद में गोमथी लोकल बॉडी चुनाव में देवीकुलम पंचायत के लिए चुनाव लड़ीं और जीत भी गईं। 2019 के आम चुनाव में भी वे इडुक्की से निर्दलीय प्रत्याशी थीं। हालांकि इस बार वे हार गईं।

इस बार क्यों नहीं लड़ रहीं चुनाव? इस सवाल पर गोमथी कहती हैं कि मैं किसी पार्टी के टिकट पर लड़ना नहीं चाहती हूं। वैसे भाजपा अध्यक्ष के. सुरेंद्रन का फोन मेरे पास आया था, वे मुझे सपोर्ट करने के लिए कह रहे थे। हालांकि बाद में उनकी पार्टी ने यहां AIADMK को टिकट दे दिया। LDF और UDF पैसे के दम पर मुझे अपनी पार्टी में लेना चाहते हैं, लेकिन मैं नहीं जाने वाली। मेरे साथी वर्कर्स का क्या होगा। वे सब मुझसे नाराज हो जाएंगे। यहां UDF, LDF के अलावा कोई विकल्प नहीं है और दोनों में कोई अंतर नहीं है।

गोमथी यहां पोंबलई ओरुमाई (लेडी वर्कर्स यूनिट) की हेड भी हैं। कहती हैं, इस यूनिट में 10 हजार लेडी वर्कर्स मेरे साथ हैं। यहां के टी प्लाटेंशन फैक्ट्रियों में कुल 15 हजार से ज्यादा वर्कर्स काम करते हैं, उनमें 10 हजार महिलाएं हैं। मैं उन्हीं की आवाज बुलंद करती हूं। अभी बोनस के लिए हड़ताल की तो 66 रुपए सैलरी बढ़ गई है।

चाय बागानों में काम करने वाले ट्रेड यूनियन वर्कर्स की मदद नहीं करते हैं? इस पर गोमथी कहती हैं, वो क्या करेंगे, सब गुंड़े हैं। वे बस कंपनियों को सपोर्ट करते हैं। यहां टाटा, कन्नन देवन, हरिसन बड़ी टी प्लांटेशन कंपनियां हैं। उन्हीं के पास सारे चाय बागान हैं, हम लोकल लोगों के पास कोई जमीन नहीं है। सरकार ने कंपनियों को जितनी जमीन दी थी, अब उन्होंने उससे ज्यादा पर कब्जा कर लिया है। सरकार को किराए के साथ कमीशन भी मिलता है, इसलिए कुछ नहीं बोलती।

यहां के चाय बागान भी चुनावी रंग में रंगे हैं। अलग-अलग पार्टियों ने अपने बैनर-पोस्टर लगाए हैं। इनमें ज्यादातर LDF और UDF के हैं।

टी वर्कर्स किस पार्टी को वोट करते हैं? गोमथी कहती हैं कि ज्यादातर CPI को ही सपोर्ट करते हैं, फिर कांग्रेस को। CPI तो सरकार में शामिल है, फिर क्यों करते हैं उसे वोट? क्या करें मजबूरी है, सीपीआई की मेंबरशिप होने पर यहां ज्यादा लोन मिल जाता है। एकमुश्त 50 हजार रुपए लोन मिल जाता है, फिर बाद में वह धीरे-धीरे सैलरी से कट जाता है।

क्या कभी वोट का बहिष्कार भी किया टी वर्कर्स ने? इस पर गोमथी कहती हैं कि नहीं ऐसा नहीं कर सकते हैं, वोट नहीं करने वालों के नाम पार्टियों के एजेंट नोट कर लेते हैं, बाद में टी वर्कर्स को मारते-पीटते हैं। पोलिंग बूथ पर भी सबके नाम दर्ज किए जाते हैं। इसलिए सब वोट करते हैं। कांग्रेस या CPI को वोट देना मजबूरी है। इसके अलावा वोट से एक दिन पहले हर घर 500 रुपए पार्टियां बांट जाती हैं। इसलिए भी जिससे पैसे मिलते हैं, उसे टी वर्कर्स वोट करते हैं।

दोपहर का वक्त। चाय बागान में काम करने वाली महिलाएं ब्लैक टी पी रही हैं। एक महिला गिलास भरकर चाय बांट रही है, साथ में दूसरे हाथ से मुट्‌ठी भरकर चीनी दे रही है।

देवीकुलम सीट पर करीब 1.60 लाख वोटर्स हैं, इनमें से 1.20 लाख वोटर्स चाय बागानों में काम करने वाले लोग हैं। इनमें से ज्यादातर तमिल मूल के हैं। वर्कर्स के इस बार चुनाव में क्या मुद्दे हैं? गोमथी हंसते हुए कहती हैं एक ही इश्यू है काम के बदले सैलरी कम है। कंपनियां वर्कर्स को क्वार्टर्स भी नहीं दे रही हैं।

बातचीत के बीच ही गोमथी बगल में बैठी अपनी बहन की बेटी रितिका से कहती हैं कि जाओ दो कप चाय ले आओ। बताती हैं ये मेरी बहन की बेटी है। ये मेरी बहन का घर ही है, क्योंकि मेरे पास अपना घर नहीं है। मेरे बच्चे और पति सब फादर के घर पर यहां से 50 किमी दूर रहते हैं। चाय पीने के बीच में ही वो बताती हैं कि मैं अभी 22 मार्च के बाद दिल्ली जाने वाली हूं, वहां NGO की मीटिंग हो रही है, उसमें बुलावा आया है। इसके अलावा कोट्‌टयम जाऊंगी, वहां से कांग्रेस की पूर्व महिला अध्यक्ष लथिका सुभाष ने बुलाया है। वे निर्दलीय लड़ रही हैं। कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया था, इसलिए वहां जाऊंगी। यहां किसी को सपोर्ट नहीं करूंगी। हमारी बातचीत भी चाय के साथ खत्म हो जाती है।

तस्वीर कन्नन देवन प्लांटेशन फैक्ट्री की है। यहां दुनियाभर में सबसे ज्यादा टी वर्कर्स काम करते हैं। कंपनी के 2400 हैक्टेयर से ज्यादा बागान हैं।

गोमथी कहती हैं, जाइए आगे चाय बागान में मजदूर काम करते हुए मिल जाएंगे। फिर हम नमस्कार बोलने के साथ आगे बढ़ जाते हैं। कुछ दूरी पर चाय बागान में कुछ मजदूर काम करते हुए दिखाई देते हैं। दोपहर का वक्त था, सब चाय की झुरमटों के बीच बैठे हैं। सभी को एक महिला गिलास भरकर ब्लैक चाय बांट रही है, साथ में दूसरे हाथ से मुट्‌ठी भरकर चीनी दे रही है। यहां सुपरवाइजर को छोड़कर सभी मजदूर महिला ही हैं। सुपरवाइजर महिला मजदूरों की मंडली से दूर मास्क लगाकर खड़ा है।

नाम बेला है। आप यहीं के लोकल हो? इस पर बेला कहते हैं कि लोकल तो नहीं हम तमिल हैं, लेकिन हम तीन जेनरेशन से यहीं रह रहे हैं, यही वोट भी करते हैं। ये कन्नन देवन प्लाटेंशन का बागान है। कंपनी के पास कितने बागान हैं? इस पर बेला बताते हैं कि हमारी कंपनी के 2400 हैक्टेयर से ज्यादा बागान हैं, इनमें महिला मजदूरों को 8 घंटे के लिए 440 रुपए मिलते हैं। बीच में एक घंटा लंच के लिए भी मिलता है। बेला मजदूरों का वीडियो बनाने से रोकते हैं, कहते हैं कि कंपनी ने ऐसा करने से मना किया हुआ है।

पिछले साल 6 अगस्त को यहीं से कुछ दूरी पर स्थित राजामाला में लैंड स्लाइड हुई थी। इसमें 50 से ज्यादा चाय मजदूरों की मौत हो गई थी। यह भूस्खलन करीब 1.2 किमी इलाके में हुआ था, इसी जगह पर कन्नन देवन प्लांटेशन फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों के क्वार्टर्स थे। जो अभी तक नहीं बन पाए हैं। इस चुनाव में विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को भी उठा रही हैं। यहां मजदूर अभी प्लास्टिक टाट-पट्टियों में रह रहे हैं।

गोमथी ने लैंड स्लाइड के दौरान यहां दौरे पर आए CM विजयन के काफिले का घेराव किया था। हालांकि विजयन ने अब अपने चुनाव कैंपेन में इडुक्की जिले के विकास के लिए 1200 करोड़ रुपए का स्पेशल पैकेज देने का वादा जरूर किया है। मुन्नार में होटल चलाने वाले माइकल बताते हैं कि ये पैकेज सिर्फ नेताओं के काम आता है, हमें क्या मिल रहा है। पूरा कोविड टाइम ऐसे ही गुजर गया। तो ऐसा है केरल का कश्मीर और ऐसी ही बह रही यहां की चुनावी आबोहवा।साभार-दैनिक भास्कर

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