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ड्रैगन फ्रूट और चिया सीड्स की खेती से 3 गुना मुनाफा कमा रहे हैं आर्मी से रिटायर्ड कर्नल, PM मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

पढ़िए दैनिक भास्कर की ये खबर…

उत्तरप्रदेश के अम्बेडकर नगर के रहने वाले हरीश चंद्र सिंह आर्मी में कर्नल थे। 2015 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने एक-दो जगह नौकरी की, लेकिन उनका मन नहीं लगा। इसके बाद वे सुल्तानपुर में जिला सैनिक बोर्ड से जुड़ गए। इसी दौरान उन्हें कुछ नया करने का ख्याल आया। चूंकि वे किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे, इसलिए उन्होंने तय किया कि खेती में ही हाथ आजमाया जाए। तीन साल पहले उन्होंने बाराबंकी में जमीन खरीदी और मल्टीलेयर क्रॉपिंग के साथ फॉरेस्ट गार्डनिंग की शुरुआत की। अभी वे ड्रैगन फ्रूट, एप्पल बेर, सेब, चिया सीड्स और ब्लैक गेहूं की खेती कर रहे हैं। इससे उनकी तीन गुना कमाई हो रही है। अब उनकी गिनती प्रोग्रेसिव फार्मर्स में होती है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम में उनकी तारीफ भी कर चुके हैं।

60 साल के हरीश चंद्र कहते हैं कि मेरे पिता टीचर थे, लेकिन खेती करते थे और वो भी नई तकनीक से। उनके साथ बचपन में ही मैंने प्लांट लगाना और ग्राफ्टिंग करना सीख लिया था। आर्मी में रहने के दौरान भी मैं प्लांटिंग करता रहता था। इसलिए खेती मेरे इंटरेस्ट की फील्ड थी। मेरी तरफ ज्यादातर लोग पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन मेरा फोकस सुपर मार्केट वाले प्लांट पर था। 2018 में मैंने ड्रैगन फ्रूट और एप्पल बेर के साथ खेती की शुरुआत की। तीन एकड़ जमीन पर 2 हजार ड्रैगन फ्रूट और 500 के करीब रेड और ग्रीन एप्पल बेर के पौधे लगाए। ये प्लांट मैं नागपुर और हैदराबाद से लाया था। थोड़े दिनों बाद सेब, आड़ू और आम के भी प्लांट लगा दिए।

हरीश चंद्र बताते हैं कि शुरुआत में यहां के क्लाइमेट को लेकर मन में थोड़ा असमंजस था कि फसल अच्छी होगी या नहीं, लेकिन पहले ही साल अच्छा रिस्पॉन्स मिला। 80% से ज्यादा प्लांट अच्छी तरह डेवलप कर गए। दूसरे साल से एप्पल बेर के फ्रूट निकलने लगे। इसके बाद मैंने चिया सीड्स और ब्लैक गेहूं की भी खेती करनी शुरू की। इससे भी अच्छा मुनाफा हुआ।

हरीश चंद्र की गिनती जिले के प्रगतिशील किसानों में होती है। कई लोग उनसे खेती के गुर सीखने के लिए आते हैं।

हरीश चंद्र को खेती करते अभी ढाई साल ही हुए हैं। इसलिए ज्यादातर प्लांट में फ्रूट लगने बाकी हैं। एप्पल बेर, काला गेहूं और चिया सीड्स के प्रोडक्शन का लाभ वे ले चुके हैं। जबकि ड्रैगन फ्रूट और सेब के फ्रूट इस साल के अंत तक निकलने लगेंगे। तब उन्हें अधिक मुनाफा मिलेगा।

चिया सीड्स की खेती से प्रति एकड़ दो लाख तक कमा सकते हैं

हरीश चंद्र कहते हैं कि चिया सीड्स की खेती करना फायदे का सौदा है। इसमें लागत भी कम होती है और रखरखाव में भी ज्यादा दिक्कत नहीं होती है। इसकी फसल तीन महीने में तैयार हो जाती है। छोटे शहरों में मार्केट को लेकर थोड़ी दिक्कत जरूर है, लेकिन बड़े शहरों में सुपर मार्केट में इसकी अच्छी डिमांड है। प्रति एकड़ इसकी खेती से एक सीजन में 2 लाख तक की कमाई हो सकती है। ऑनलाइन मार्केट में एक किलो चिया सीड्स की कीमत करीब 1500 से 2000 रुपए तक है।

हरीश चंद्र कहते हैं कि हमारे लिए यह शुरुआत थी। इसलिए सिर्फ आधा एकड़ जमीन पर हमने चिया सीड्स की खेती की थी, लेकिन अब हम दायरा बढ़ाएंगे। इस बार 2.5 क्विंटल सीड्स हमने हाथों-हाथ बेचे हैं। अगले साल से हम भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आने का प्लान कर रहे हैं।

चिया सीड्स की डिमांड क्यों है?

चिया सीड्स की गिनती सुपर मार्केट प्रोडक्ट में होती है। बड़े शहरों में भी इसकी मांग अधिक है। खास करके युवाओं के बीच। इसमें फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइट्रेड, फैटी एसिड, जिंक, विटामिन B3, पोटैशियम सहित कई मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह इम्युनिटी बढ़ाता है और हमारी हड्डियों को भी मजबूत बनाता है। ज्यादातर लोग वेट कम करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। यह कैंसर और स्किन एजिंग से भी बचाता है। सामान्य तौर पर दिन में दो बार 20 ग्राम तक की मात्रा में चिया सीड्स लेना चाहिए। इसे पानी या दूध में भिगोकर खाना ज्यादा कारगर होता है।

भारत में अभी एप्पल बेर का मार्केट बढ़िया है। छोटे शहरों में भी इसकी अच्छी डिमांड है। दो साल में इससे फ्रूट निकलने लगते हैं।

एप्पल बेर की खेती से कम लागत में अधिक मुनाफा

हरीश चंद्र के मुताबिक अगर कोई किसान कम लागत में अधिक कमाई करना चाहता है तो उसके लिए एप्पल बेर बढ़िया विकल्प है। इसमें सालभर के भीतर दो से तीन गुना मुनाफा मिल जाता है। इसकी खेती के लिए किसी विशेष प्रकार की जमीन की जरूरत नहीं होती है। बस ध्यान रखने वाली बात ये है कि जहां हम इसकी खेती करें, वहां जलजमाव नहीं होना चाहिए। इसकी ज्यादातर वैरायटी बाहर से लाई जाती है। बाजार में 30 से 40 रुपए में एक बीज मिल जाता है। ड्रिप इरिगेशन विधि से सिंचाई करना इसके लिए सही होता है। दो साल बाद इससे फ्रूट निकलने लगता है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती महंगी, लेकिन कमाई भी बंपर

हरीश चंद्र बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती से किसान बंपर कमाई कर सकते हैं, लेकिन इसकी खेती थोड़ी खर्चीली है। इसके बीज की कीमत भी अधिक होती है और मेंटेनेंस में भी ठीक-ठाक खर्च हो जाता है। साथ ही छोटे शहरों में इसकी मार्केटिंग में भी दिक्कत आती है। हालांकि जिसका मार्केटिंग नेटवर्क अच्छा है, बड़े शहरों और सुपर मार्केट तक पहुंच है, तो फिर इसकी खेती उसके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। मार्केट में एक फ्रूट की कीमत 100 से 300 रुपए तक होती है। एक एकड़ जमीन पर इसकी खेती से सालाना 10 टन फ्रूट का उत्पादन हो सकता है। जिससे प्रति टन 8-10 लाख रुपए की कमाई की जा सकती है।

कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की खेती?

एक एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती से सालाना 10 टन फ्रूट का उत्पादन हो सकता है। जिससे प्रति टन 8-10 लाख रुपए की कमाई की जा सकती है।

ड्रैगन फ्रूट उगाने के लिए बीज अच्छे किस्म का होना चाहिए। ग्राफ्टेड प्लांट हो तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि उसे तैयार होने में समय कम लगता है। इसे मार्च से जुलाई के बीच कभी भी बोया जा सकता है। प्लांटिंग के बाद नियमित रूप से कल्टीवेशन और ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। करीब एक साल में प्लांट तैयार हो जाता है। दूसरे साल में फ्रूट निकलने लगते हैं। हालांकि तीसरे साल से ही अच्छी मात्रा में फल का प्रोडक्शन होता है। इसके लिए टेम्परेचर 10 डिग्री से कम और 40 डिग्री से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उसके बीच में किसी भी टेम्परेचर पर इसे उगाया जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष किस्म की जमीन की जरूरत नहीं होती है। इसके लिए पानी की भी कम जरूरत पड़ती है।

ड्रैगन फ्रूट के फायदे

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए, कोलेस्ट्रॉल लेवल घटाने के लिए, हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए, हृदय रोग के लिए, स्वस्थ बालों के लिए, स्वस्थ चेहरे के लिए, वेट लॉस और कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने में इसका उपयोग होता है। इन दिनों बड़ी-बड़ी कंपनियां ड्रैगन फ्रूट से प्रोसेसिंग के बाद सॉस, जूस, आइसक्रीम सहित कई प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं। साभार-दैनिक भास्कर

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