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सांसों के संकट में उम्मीद की 3 कहानियां:ऑक्सीजन प्लांट्स के लेबर कह रहे- खाना तभी खाएंगे जब काम पूरा हो जाएगा; 90 दिन का काम 11 दिन में कर दिखाया

पढ़िए दैनिक भास्कर की ये खबर…

कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा दिक्कत सांसों की यानी ऑक्सीजन की हो रही है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीज दम तोड़ रहे हैं। केंद्र से लेकर राज्यों तक की सरकारें ऑक्सीजन प्रोडक्शन बढ़ाने में जुटी हैं। ऐसे में देशभर में ऑक्सीजन प्लांट्स के अधिकारी-कर्मचारी और लेबर दिन-रात काम कर जिंदगी की उम्मीद को बरकरार रखने में जुटे हुए हैं। आप भी पढ़िए महामारी के बीच ऐसे वॉरियर्स की 3 कहानियां…

पहली कहानी: मजदूर बोले-अभी 50 टन ऑक्सीजन और बनानी है, तब तक खाना नहीं खाएंगे

झारखंड के बोकारो प्लांट में 8-8 घंटे की तीन शिफ्टों में लगातार ऑक्सीजन प्रोडक्शन चल रहा है।

रविवार दोपहर के 3 बजे हैं और हम खड़े हैं झारखंड में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के आइनॉक्स बोकारो प्लांट में। यहां दिन-रात लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) तैयार की जा रही है। बोकारो स्टील लिमिटेड के कैप्टिव प्लांट में भी ऑक्सीजन तैयार करने वाली मशीनें शोर कर रही हैं। यहां से ऑक्सीजन ले जाने के लिए उत्तर प्रदेश से एक रैक निकल चुका है। रात 10 बजे तक बोकारो पहुंचेगा।

कैप्टिव ऑक्सीजन प्लांट में 90 बीएसएल कर्मी हैं। मेसर्स आइनॉक्स के प्लांट में करीब 80 कर्मी हैं। 8-8 घंटे की तीन शिफ्टों में लगातार प्रोडक्शन चल रहा है। मजदूरों का लंच बॉक्स सामने देख हमने उनसे यूं ही पूछ लिया… खाना खा लिया? मजदूर बोले- हर दिन 150 टन ऑक्सीजन बनानी है। अभी 100 टन भी नहीं बनी। समय कम है। जब तक 50 टन ऑक्सीजन तैयार नहीं कर लेते, खाना नहीं खाएंगे।

स्टील प्लांट के प्रभारी निदेशक अमरेंदु प्रकाश कहते हैं कि मौजूदा स्थिति चुनौती भरी है। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन लेवल कम होने की शिकायत वाले मरीज जैसे-जैसे अस्पतालों में बढ़ते गए, ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ती गई। इससे ज्यादातर शहरों में ऑक्सीजन की कमी हो गई। मरीजों की सांसें रुकने लगीं। ऐसे वक्त में सेल की इस यूनिट ने देश को ऑक्सीजन देने का बीड़ा उठाया है।

दूसरी कहानी: 3 साल से बंद प्लांट 100 लोगों की टीम ने चालू कर दिया

इंदौर के पीथमपुर इलाके के इस प्लांट में मंगलवार से 40 टन ऑक्सीजन रोज मिलने लगेगी।

इंदौर के पीथमपुर में 100 लोगों की टीम ने 11 दिन की कड़ी मेहनत से 90 दिन में तैयार होने वाला ऑक्सीजन प्लांट 11 दिन में तैयार कर दिया। इस प्लांट में रविवार रात से ट्रायल प्रोडक्शन भी शुरू हो गया है। 24 घंटे शुद्धता जांच के बाद मंगलवार से 40 टन ऑक्सीजन रोज मिलने लगेगी। एकेवीएन एमडी रोहन सक्सेना ने बताया कि करण मित्तल का प्लांट तीन साल से बंद पड़ा था। उनसे बात की तो बोले चालू करने में 3 महीने लगेंगे। सभी विभागों ने को-ऑर्डिनेशन से काम किया और जरूरी मंजूरियां हाथों हाथ जारी की गईं। प्लांट तक सड़क भी बनाई। नतीजा- प्लांट शुरू हो गया।

इसके लिए मित्तल ने 40 लाख रुपए खर्च किए। मुंबई से ऑक्सीजन मीटर और अहमदाबाद से दूसरी मशीनें मंगवाई गईं। ड्यूटी अधिकारी और नायब तहसीलदार विनोद राठौर ने बताया कि काम एक घंटे भी नहीं रोका गया। प्लांट इंचार्ज मदन अग्रवाल की मदद के लिए अहमदाबाद से 3 इंजीनियर आए। 14 अप्रैल से प्लांट पर काम शुरू हुआ। मोयरा सरिया ने मैकेनिकल हैंड और लेबर उपलब्ध कराए तो अन्य कंपनियों ने दूसरी सामग्री दी और प्लांट तैयार हो गया।

तीसरी कहानी: प्लांट में 24 घंटे अफसर तैनात, ताकि 9 राज्यों को ऑक्सीजन मिल सके

भिलाई स्टील प्लांट के 3 में से 2 की क्षमता रोज 265 टन मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन की है।

छत्तीसगढ़ में अभी 29 प्लांट के जरिए 400 टन से ज्यादा मेडिकल ऑक्सीजन का प्रोडक्शन किया जा रहा है। यह पहली बार है जब पूरी क्षमता के साथ उत्पादन किया जा रहा है। अधिकारी कह रहे हैं कि डिमांड के हिसाब से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। समय पर दूसरे स्टेट तक ऑक्सीजन पहुंच जाए इसके लिए पहली बार ग्रीन कॉरिडोर जैसे तरीके अपनाए जा रहे हैं। इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन का उत्पादन मार्च के बाद से ही बंद है।

भिलाई स्टील प्लांट में (BSP) ऑक्सीजन के तीन प्लांट हैं। जिन्हें प्रैक्स एयर ऑपरेट कर रही है। प्लांट-1 से उत्पादन बंद हो चुका है। प्लांट-2 और 3 की उत्पादन क्षमता 265 टन प्रतिदिन की है। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद ऑक्सीजन उत्पादक इकाइयों में मॉनिटरिंग तेज कर दी गई है।

BSP के ऑक्सीजन प्लांट में ही राज्य सरकार के 4 और केंद्र सरकार के 2 अधिकारी तैनात किए गए हैं। जिन्हें निर्देश हैं कि ऑक्सीजन प्लांट के साथ जिन राज्यों का अभी समझौता है, उस हिसाब से उन्हें ऑक्सीजन की सप्लाई की जाए। ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर रोज केंद्र और राज्य के बीच असहमति की स्थिति बन रही है। BSP के प्रबंधन को इस बारे में मीडिया से बात करने के लिए मना कर दिया गया है।

पहली बार ऑक्सीजन सप्लाई के लिए बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर प्लांट से राज्य की सीमा तक ट्रांसपोर्टेशन के दौरान किसी तरह की रुकावट का सामना न करना पड़े, इसके लिए ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट द्वारा ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है। प्लांट से टैंकरों की निकासी के लिए BSP मैनेजमेंट ने मरोदा गेट के साथ-साथ मेन गेट को भी खोल दिया है।

देश के 9 राज्यों में हो रही सप्लाई
BSP के दोनों ऑक्सीजन प्लांट से देश के 9 राज्यों में ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। इनमें मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, यूपी, ओडिशा, गुजरात, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। साभार दैनिक भास्कर

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