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त्रिपुराः नाइट कर्फ़्यू में शादी रुकवाने वाले डीएम के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

पढ़िए बीबीसी न्यूज़ हिंदी की ये खबर…

पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में तैनात एक ज़िला मजिस्ट्रेट डॉक्टर शैलेश कुमार यादव के एक शादी में कोरोना प्रोटोकॉल लागू कराने के तरीक़े की काफ़ी आलोचना हो रही है

इस मामले के सामने आने के बाद सत्ताधारी विधायकों समेत कई लोगों ने ज़िलाधिकारी पर कार्रवाई करने की मांग की है. इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने मुख्य सचिव से इस मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

दरअसल कोविड के बढ़ते संक्रमण के कारण 22 अप्रैल से अगरतला नगरपालिका क्षेत्रों में रात का कर्फ़्यू चल रहा है. इस बीच लोग कोविड के प्रोटोकॉल के तहत ज़िला प्रशासन से अनुमति लेकर शादी समारोह जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन कर रहें है.

लेकिन 26 अप्रैल को अगरतला शहर के पैलेस कंपाउंड के माणिक्य कोर्ट में एक स्थानीय चिकित्सक की बहन की शादी में जो कुछ हुआ उससे समूचा परिवार काफ़ी परेशान है.

इस पूरी घटना पर डॉक्टर सुभ्रजीत देब ने बीबीसी से कहा, “मेरा पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है. मेरी छोटी बहन की सोमवार को शादी थी और हमने इसके लिए ज़िला प्रशासन से अनुमति ली थी. लेकिन डीएम ने मेरे बुज़ुर्ग माता-पिता और परिवार की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया. उन्होंने शादी को बंद करने के नाम पर हमारे मेहमानों पर लाठियां चलाई. भद्दी भाषा का उपयोग किया.”

त्रिपुरा

घटना को लेकर सदमे में है’

शहर में नाइट कर्फ़्यू रात 10 बजे से लागू होता है और शादी का कार्यक्रम उसके बाद भी चल रहा था.

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर सुभ्रजीत कहते हैं, “नाइट कर्फ़्यू में अगर यहां कोई शादी होती है तो प्रशासन की तरफ़ से वाहन के पास दिए जाते हैं. यह पास पूरी रात के लिए दिया जाता है. बहन की शादी का मुहूर्त साढ़े 11 बजे का था. हमने ज़िला प्रशासन को वाहन के पास के लिए जो आवेदन दिया था उसमें इस बात का उल्लेख भी किया था. लेकिन इसके बाद डीएम आकर ऐसा तांडव करेंगे वो हमें पता नहीं था.”

“मेरी बड़ी बहन ने जब ज़िला प्रशासन की अनुमति वाले काग़ज़ दिखाए तो उन्होंने उस काग़ज़ को फाड़ के बहन के मुंह पर फेंक दिया. मेरा पिता दिल की बीमारी से ग्रस्त हैं और मां को शुगर की बीमारी है. वे अब तक उस दिन की घटना को लेकर सदमे में है. हम सोच नहीं सकते कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इतना ख़राब व्यवहार कैसे कर सकता है? मैं ख़ुद एक डॉक्टर हूं और मैंने कोविड के दौरान लोगों की बहुत देखभाल की है. लिहाज़ा हम किसी भी क़ीमत पर कोविड नियमों का उल्लंघन नहीं कर रहे थे. हमने नियमों के दायरे में रहकर केवल 35 मेहमानों को ही शादी में बुलाया था.”

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ज़िला प्रशासन की मंज़ूरी

सुभ्रजीत कोलकाता के एक अस्पताल में सर्जन हैं. अपनी छोटी बहन की शादी में डीएम के व्यवहार को लेकर सुभ्रजीत ने एक फ़ेसबुक पोस्ट लिखी है.

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “कल (सोमवार) नॉर्थ गेट के माणिक्य दरबार में बहन का विवाह समारोह था और जो अप्रिय घटना घटी वह हम सभी के लिए घातक थी. वे लोग जो हमें अनुचित तरीक़े से जज कर रहे हैं. कृपया हमारे दस्तावेज़ों की जाँच करें और हमें न्याय दें कि क्या हम सही थे या फिर हमें सिर्फ़ बलि का बकरा बनाया गया.”

दरअसल सुभ्रजीत के परिवार ने इस शादी के लिए ज़िला प्रशासन से अनुमति ली थी और उन्होंने प्रशासन की अनुमति से जुड़े दस्तावेज़ों का लोगों के सामने रखा है.

उन्होंने लिखा कि हिंदू धार्मिक समय के अनुसार विवाह का शुभ समय (लग्न) रात 11 बजकर 30 मिनट पर था. जिसका उल्लेख हमने पहले ही डीएम कार्यालय में प्रस्तुत किए गए अपने दस्तावेज़ों में शादी के कार्ड के साथ किया था. जिसके परिणामस्वरूप डॉक्टर शैलेश कुमार यादव ने हमें समारोह के संचालन की अनुमति दी थी.

अगरतला शहर में फैल रहे कोविड संक्रमण को रोकने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 के तहत जारी नाइट कर्फ़्यू के उल्लंघन के लिए बीते सोमवार को दो मैरिज हॉल को बंद करने का आदेश दिया गया था. वही देखने ख़ुद पश्चिम त्रिपुरा के ज़िला मजिस्ट्रेट डॉक्टर शैलेश यादव स्थानीय पुलिस के साथ विवाह स्थल पर पहुँचे थे.

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सोशल मीडिया पर वायरल

ज़िला प्रशासन की इस पूरी कार्रवाई के दौरान स्थानीय मीडिया के कुछ लोग भी वहां मौजूद थे. ज़िलाधिकारी द्वारा शादी के समारोह में की गई इस कार्रवाई के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहें है. दरअसल उस इलाक़े में दो शादियां चल रही थी.

इन वीडियो में डीएम को दुल्हा-दुल्हन और उनके परिवार पर भड़कते देखा जा सकता है. एक जगह वो शादी कराने आए बुज़ुर्ग पंडित को ‘चांटा’ मारते नज़र आ रहे हैं. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि ज़िलाधिकारी विवाह स्थल में पहुँचते ही अपने पुलिस जवानों को कहते है कि बाहर निकालो इनको, मारो इनको और पुलिस का एक जवान शादी में आए एक मेहमान को डंडे से मारता दिख रहा है.

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इसके बाद एक कमरे में पुलिस वाले कई और मेहमानों पर डंडे चलाते हैं. फिर डीएम दूल्हे को गर्दन से पकड़कर बाहर निकलने को कहते हैं. इस दौरान वीडियो में वहां महिलाएं और छोटे बच्चे भी दिख रहें है.

डीएम फिर चिल्लाते हैं, “आपको समझ नहीं आता क़ानून नाम की कोई चीज़ है यहां पर.”

यही नहीं डीएम स्थानीय थाना प्रभारी पर भी भड़क जाते हैं और उन्हें निलंबित करने की बात कहते हैं.

डीएम के आदेश के बाद पुलिस ने क़रीब 29 लोगों को हिरासत में ले लिया था लेकिन थाने में कुछ समय तक उन्हें रखने के बाद छोड़ दिया गया.

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डीएम का जवाब

इन वीडियो दिख-सुन रही बातों के बारे में सुभ्रजीत कहते हैं, “मैं घर से पूजा का सामान लेकर वहां बस पहुँचा ही था. मैंने देखा कि वे शादी बंद करवाने की बात कर रहे थे तो मैंने उनसे कहा कि सर हमने तो अनुमति ली है. तो वे कहने लगे कि आप तो मुझे पढ़े-लिखे दिख रहे हो तो मैंने उनसे कहा कि सर मैं एक सर्जन हूं. इतना कहते वो चिल्लाने लगे और मुझ गाली देते हुए कहा कि गंवार की तरह बात मत करो और पुलिस से मुझे भी गिरफ़्तार करने को कहा. वो लोग सबको गिरफ़्तार करने में लगे थे. छोटे बच्चों तक को नहीं छोड़ रहे थे.”

डीएम ने सोमवार को गुलाब बागान और माणिक्य दरबार में हो रही शादियों में छापेमारी के बाद पत्रकारों के समक्ष कहा कि अगर कोविड-19 फैलता है, तो ये वही लोग हैं जो सरकार पर कुछ भी नहीं करने का आरोप लगाएंगे. लेकिन उन्होंने क्या किया है? अनुमति 10 बजे से परे नहीं है, और उसके बाद हॉल को बंद करना होगा.

डीएम ने स्थानीय पुलिस अधिकारी की भूमिका पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा, “लोगों की लगातार शिकायतों के बाद भी स्थानीय पुलिस ने इन शादियों को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की. एक ज़िला मजिस्ट्रेट के रूप में मुझे यहाँ आना पड़ा. मैं इसके लिए पश्चिम अगरतला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को निलंबित करने की सिफ़ारिश करूंगा. क्योंकि वह इन लोगों के साथ मिला हुआ था और उनके ख़िलाफ़ विभागीय कार्यवाही की जानी चाहिए.”

घटना पर प्रतिक्रियाएं

लेकिन जैसे ही ये दोनों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई लोगों ने ज़िलाधिकारी के इस दुर्व्यवहार और पुलिस अधिकारियों पर की गई टिप्पणियों पर ग़ुस्सा व्यक्त करते हुए इसे निंदनीय और अनधिकृत बताया है.

कई लोगों ने कहा कि अगर क़ानून का उल्लंघन हुआ था तो वो लोगों को गिरफ़्तार कर सकते थे लेकिन इसके लिए गंदी भाषा का उपयोग और बुज़ुर्ग पंडित को पीटना कहीं से बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. जानेमाने गायक सोनू निगम ने भी डीएम के इस व्यवहार की निंदा की है.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तथा विपक्षी नेता माणिक सरकार ने इस घटना को ‘अवांछित’ क़रार दिया है और ज़िला मजिस्ट्रेट के इस व्यवहार के लिए उनके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई की मांग की है.

पश्चिम त्रिपुरा की सांसद और बीजेपी नेता प्रतिमा भौमिक ने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात कर उन्हें इस घटना में उचित न्याय दिलाने का भरोसा दिया है.

महिला सांसद ने कहा, “प्रशासन कोरोना वायरस के संचरण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए आवश्यक क़दम उठा रहा है लेकिन शादी वाली रात जो कुछ हुआ वह सबसे ज़्यादा अवांछित है. ऐसा नहीं होना चाहिए था.

डीएम ने माफ़ी मांग ली

इस घटना को लेकर सत्ताधारी बीजेपी विधायक सुदीप रॉय बर्मन, आशीष कुमार साहा और सुशांत चौधरी ने राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार को पत्र लिखकर डीएम को हटाने की मांग की है.

सोशल मीडिया और प्रदेश के जाने-माने लोगों द्वारा की जा रही कड़ी आलोचना के बाद डीएम ने माफी मांग ली है.

उन्होंने कहा, “मैंने कल नाइट कर्फ़्यू की अवधि के दौरान जो भी किया वो लोगों के लाभ और भलाई के लिए किया था. मेरा इरादा किसी की भावनाओं को आहत या अपमानित करना नहीं था,”

इस बीच मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने मुख्य सचिव मनोज कुमार को उन घटनाओं पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिया है. इसके साथ ही डीएम के ख़िलाफ़ डॉक्टर सुभ्रजीत ने भी एक मामला दर्ज करवाया है.

डॉक्टर सुभ्रजीत कहते हैं, “हमारे पूरे के साथ जो किया गया है उसे हम ही समझ सकते हैं. लिहाज़ा हमें इस मामले में न्याय मिलना होगा. मुझे उम्मीद है कि त्रिपुरा के निवासियों को शादियों जैसे शुभ अवसरों के दौरान इस तरह के उपद्रव का सामना नहीं करना पड़ेगा.””साभार-बीबीसी न्यूज़ हिंदी

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