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गाजियाबाद: घर पर हैं आइसोलेट… तो इन नंबरों पर करिए कॉल… मिलेगी ऑक्सिजन

पढ़िए नवभारत टाइम्स की ये खबर…

घर पर आइसोलेट रहकर अपना इलाज करा रहे कोविड-19 संक्रमित मरीजों को ऑक्सिजन दिलाए जाने की योजना के तहत इसकी पूरी मॉनिटरिंग नायब तहसीलदार को सौंपी गई है। इसके लिए साउथ जीटी रोड लोहा मंडी के सामने स्थित तारणहार गैसेज को चुना गया है।

 गाजियाबाद। घर पर आइसोलेट रहकर उपचार कराने वाले कोविड-19 संक्रमित मरीजों को आसानी से ऑक्सिजन उपलब्ध कराए जाने के लिए जिला प्रशासन ने बाकायदा ऑक्सिजन डिस्ट्रीब्यूटर के नाम घोषित किए हैं और यहां पर नायब तहसीलदार की देख रेख में लेखपाल और संग्रह अमीनो की ड्यूटी लगाई है, जो वही तैनात रहेंगे। लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए इनके नंबर भी जारी किए गए हैं, ताकि लोग इन नंबरों पर बात कर अपनी समस्या का समाधान करा सकें।

इस तरह मिलेगी ऑक्सिजन
घर पर आइसोलेट रहकर अपना इलाज करा रहे कोविड-19 संक्रमित मरीजों को ऑक्सिजन दिलाए जाने की योजना के तहत इसकी पूरी मॉनिटरिंग नायब तहसीलदार को सौंपी गई है। इसके लिए साउथ जीटी रोड लोहा मंडी के सामने स्थित तारणहार गैसेज को चुना गया है। यहां का यह 9811499694 नम्बर भी दिया गया है। इसके अलावा यहां पर तैनात किए गए क्षेत्रीय लेखपाल विनोद कुमार, जिनका नम्बर 9760912907 और संग्रह अमीन जितेंद्र सिंह, जिनका 9999992617 नम्बर दिया गया है। यह दोनों कर्मचारी चयन किए गए ऑक्सिजन डिस्ट्रीब्यूटर के यहां तैनात रहेंगे।

मरीजों के तीमारदारों से मरीजों के आधार कार्ड मरीज की कोविड-19 रिपोर्ट की एक कॉपी प्राप्त करेंगे और वीडियो कॉल के माध्यम से मरीजों को ऑक्सिजन लेवल देखकर पुष्टि होने के बाद ही ऑक्सिजन सिलिंडर उपलब्ध कराएंगे। रोजाना शाम को एडीएम देवेंद्रपाल सिंह को पूरी ऑक्सिजन की प्राप्ति और वितरण का भी ब्योरा उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वास्तविक जरूरतमंद लोगों को ऑक्सिजन उपलब्ध हो सके।

सिस्टम को और दुरुस्त करने की आवश्यकता
उधर जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई यह योजना भी इसलिए कामयाब होती नजर नहीं आ रही है, क्योंकि जिन लोगों को ऑक्सिजन की आवश्यकता होती है और इन नंबरों पर फोन लगाया जाता है तो उनका कहना है कि या तो फोन लगातार बिजी आता रहता है या फिर फोन उठता नहीं है और वापस कॉल बैक भी नहीं आती है।

लोगों का कहना है कि जिन लोगों को ऑक्सिजन की आवश्यकता होती है तो वह लोग फोन वापस पाने का ज्यादा इंतजार नहीं कर पाते हैं और उन्हें मजबूरी में दूसरी जगह से ऑक्सिजन लेनी पड़ती है। कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं कि ऑक्सिजन ना मिलने के कारण उनकी जान भी जा चुकी है।साभार-नवभारत टाइम्स

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